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Alert: लगातार बढ़ता तापमान और गर्मी हो सकती है जानलेवा, महिलाओं में कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा; शोध में दावा

Fri, 06 Jun 2025 10:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल-दर साल बढ़ती गर्मी-तापमान ने स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि लगातार बढ़ते तापमान ने महिलाओं में कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा है। 
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बढ़ता तापमान और महिलाओं की सेहत के लिए खतरा - फोटो : Adobe Stock
Rising Temperature Health Effects: साल-दर साल बढ़ती गर्मी-तापमान ने स्वास्थ्य के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि इसके अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों प्रकार के स्वास्थ्य दुष्प्रभाव हो सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की आवश्यकता होती है।

हर साल गर्मी के रिकॉर्ड टूटते जा रहे हैं। कहीं 45 डिग्री तो कहीं 50 डिग्री से ऊपर तापमान पहुंच रहा है। ये केवल मौसम की बात नहीं रह गई है, बल्कि अब यह हमारे शरीर, कामकाज को भी नुकसान पहुंचा रहा है। खबरों से पता चलता है कि गर्मी बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं के चलते हर साल लाखों लोगों को हीटस्ट्रोक का सामना करना पड़ रहा है, इसके अलावा इसके तमाम दुष्प्रभावों के चलते बड़ी संख्या में मौतें भी हो रही हैं। 

इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि लगातार बढ़ते तापमान ने महिलाओं में कैंसर का खतरा कई गुना बढ़ा दिया है।
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बढ़ते तापमान के नुकसान - फोटो : Freepik.com

बढ़ते तापमान और कैंसर का संबंध

पहले के रिपोर्ट्स में हमने बढ़ते तापमान के कारण किडनी, ब्लड प्रेशर और हार्ट की बीमारियों के जोखिमों के बारे में बताया था।

इसी क्रम में एक हालिया अध्ययन में इसे महिलाओं में कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाला भी बताया गया है।  शोधकर्ताओं ने बताया कि बढ़ता तापमान स्तन, अंडाशय, गर्भाशय और सर्वाइकल कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। अमेरिकन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों इसका खुलासा किया है।
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महिलाओं में कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए मध्य पूर्व और उत्तर अफ्रीका के 17 देशों जैसे इराक, जॉर्डन, कुवैत, लेबनान, सऊदी अरब, सीरिया, ट्यूनीशिया, संयुक्त अरब अमीरात और फिलिस्तीन जैसे देशों को शामिल किया। इन देशों में तापमान में तेजी से हो रही बढ़ोतरी के कारण इन्हें जलवायु परिवर्तन के प्रति सबसे संवेदनशील माना गया है।

2050 तक इन देशों में तापमान 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। शोधकर्ताओं ने इन देशों में 1998 से 2019 के बीच महिलाओं में कैंसर के मामलों और तापमान में आए बदलाव का विश्लेषण किया।

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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
कैंसर के मामले और मौतों में बढ़ोतरी

फ्रंटियर्स इन पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार जैसे-जैसे तापमान बढ़ा, वैसे-वैसे कैंसर के मामलों और मौतों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। कैंसर के मामलों की तरह ही इससे होने वाली मौतों में भी चिंताजनक इजाफा दर्ज हुआ है।

तापमान में हर डिग्री की वृद्धि के साथ कैंसर से मौतों का आंकड़ा प्रति लाख महिलाओं में 171 से बढ़कर 332 तक पहुंच गया। अध्ययन के अनुसार कतर, बहरीन, जॉर्डन, सऊदी अरब, यूएई और सीरिया जैसे देशों में कैंसर के मामलों और मौतों में सबसे तेज बढ़ोतरी देखी गई। उदाहरण के लिए कतर में हर डिग्री तापमान वृद्धि के साथ स्तन कैंसर के मामले प्रति लाख महिलाओं में 560 तक बढ़े, जबकि बहरीन में यह संख्या 330 रही।
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किडनी से संबंधित समस्याएं - फोटो : Freepik.com
बढ़ते तापमान के और भी कई दुष्प्रभाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सूर्य की रोशनी हमारे लिए जरूरी तो है पर इसके अधिक संपर्क में रहने के कारण भी कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। धूप में ज्यादा देर तक रहना विशेषतौर पर अधिक तापमान की स्थिति कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का भी कारण हो सकती है। गर्मी के दिनों में बाहर बहुत अधिक समय बिताने से त्वचा कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है, ये ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए भी जोखिम कारक हो सकती है। 

हीटवेव का आपकी किडनी पर भी नकारात्मक असर हो सकता है, वहीं जिन लोगों को पहले से ही किडनी की दिक्कत है उन्हें और भी सावधान रहना चाहिए। अत्यधिक गर्मी के संपर्क में रहने वाले लोगों में इलेक्ट्रोलाइट्स का असंतुलन, किडनी इंजरी होने या किडनी में पथरी होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।




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स्रोत
Global warming could be driving up women’s cancer risk


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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