इस काढ़े को पीने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। इसके अलावा चिकनगुनिया, डेंगू, मलेरिया के साथ शुगर और पीलिया के मरीजों को भी यह काढ़ा लाभ पहुंचाता है। इस काढ़े को बनाने के लिए सबसे पहले हरड़, बहेड़ा, आंवला, कुटकी, चिरायता, वासापत्र, नीमपत्र और गिलोय को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण तेयार कर लें। रोजाना दस ग्राम चूर्ण एक गिलास पानी में उबाल लें। जब एक चौथाई पानी बच जाए तो इस गुनगुने पाने को पी लें।