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गुड स्लीप: रात में नींद न आने के पीछे हो सकते हैं ये कारण, आयुर्वेद में बताए गए हैं उपाय

Sun, 25 Oct 2026 09:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव प्रभा किरण, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रात में नींद न आना या अनिद्रा शारीरिक और मानसिक सेहत को प्रभावित कर सकती है। आयुर्वेद में अश्वगंधा, ब्राह्मी और ज्योतिष्मती जैसी जड़ी-बूटियों का उल्लेख मिलता है। जानिए अनिद्रा के संभावित कारण और किन औषधियों से इसमें लाभ पाए जा सकते हैं?
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नींद कैसे सुधारें - फोटो : Amarujala.com/AI
रात में अच्छी नींद न आने या अनिद्रा का समस्या आपके पूरी सेहत को प्रभावित करने वाली मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि अगर एक रात भी आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो इसका असर अगले दिन थकान-चिड़चिड़ापन, सिरदर्द जैसी समस्याओं के रूप में देखा जा सकता है। वहीं जिन लोगों को अनिद्रा की दिक्कत होती है यानी कि अक्सर ही अगर आपकी नींद नहीं पूरी हो पा रही है तो इसके कारण कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की दिक्कतों के बढ़ने का खतरा हो सकता है।

सभी वयस्कों को रोजाना रात में 7-9 घंटे की नींद जरूर पूरी करनी चाहिए। अगर सामान्य तौर पर आपको इसमें दिक्कत आ रही है तो इस बारे में किसी डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। कुछ अंतर्निहित स्वास्थ्य समस्याओं के चलते भी नींद न आने की दिक्कत हो सकती है।

आइए जानते हैं कि आयुर्वेद में इस समस्या के लिए किन कारणों को जिम्मेदार पाया गया है और किन औषधियों की मदद से अनिद्रा में लाभ पाया जा सकता है?
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नींद की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
आयुर्वेद में नींद विकारों का जिक्र

आयुर्वेदिक ग्रंथों के अनुसार, कफ में वृद्धि के कारण नींद अधिक आती है और वात या पित्त में वृद्धि के कारण अनिद्रा होती है, जो शारीरिक या मानसिक परिश्रम या बीमारी के कारण हो सकती है। आयुर्वेदिक चिकित्सा में कई ऐसी कारगर औषधियों के बारे में जिक्र मिलता है जो नींद की समस्या को कम करके तनाव, चिंता और थकावट जैसी दैनिक समस्याओं के इलाज में मदद कर सकती है।

आइए जानते हैं कि किन औषियों के इस्तेमाल से अनिद्रा की समस्या को ठीक किया जा सकता है?
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औषधियों के लाभ - फोटो : Freepik.com
अश्वगंधा का करें सेवन
 
  • अश्वगंधा का उपयोग सदियों से आयुर्वेदिक उपचार में किया जाता रहा है। आयुर्वेदिक विशेषज्ञों के अनुसार यह औषधि नींद के चक्र को सामान्य करने के लिए शरीर में कफ दोष को संतुलित करती है। अनिद्रा वाले लोगों को इसके सेवन से लाभ मिल सकता है। अश्वगंधा को शारीरिक शक्ति बढ़ाने और मन को शांत रखने वाले प्रभावों के लिए प्रयोग में लाया जाता रहा है।

ब्राह्मी  से मिलता है लाभ
 
  • ब्राह्मी की सौम्य (शांत) प्रकृति के कारण यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है। यह आरामदायक एहसास कराने और नींद को बढ़ावा देने के लिए प्रयोग में लाई जाती रही है। नींद संबंधी विकारों के लिए यह कारगर आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, इसका उपयोग पाचन समस्याओं को दूर करने और शरीर में रक्त परिसंचरण को बढ़ाने के लिए भी किया जाता है।

ज्योतिष्मती
 
  • ज्योतिष्मती को मलकांगनी के नाम से भी जाना जाता है। यह प्रकृति में तीक्ष्ण (मजबूत) है, और इसके बीज का पाउडर शरीर में गर्मी पैदा करती है। इसलिए, आयुर्वेदिक चिकित्सक अक्सर इसे कम मात्रा में लेने की सलाह देते हैं। इसके बीज फैटी एसिड और अल्कलॉइड से भरपूर होते हैं। शोध से पता चला है कि ज्योतिष्मती याददाश्त को ठीक रखने, दृष्टि और मानसिक और संज्ञानात्मक सतर्कता में सुधार करने में कारगर है। यह तेल और पाउडर दोनों रूपों में प्रयोग में लाई जाती है।
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नींद की गुणवत्ता कैसे सुधारें - फोटो : Freepik
नींद सुधारने के लिए क्या करें?

नींद की गुणवत्ता सुधारने के लिए रोजाना सोने और जागने का समय तय करें। रात में सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप का इस्तेमाल कम कर दें।
 

  • शाम के बाद चाय, कॉफी और कैफीन वाले पेय पदार्थों से बचें।
  • सोने से पहले हल्का संगीत सुनें, किताब पढ़ें या गहरी सांस लेने का अभ्यास करें।
  • बेडरूम को शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें। दिन में नियमित व्यायाम करें, लेकिन सोने से ठीक पहले भारी कसरत न करें।
  • वयस्कों को आमतौर पर 7-9 घंटे की नींद लेनी चाहिए। लगातार नींद न आने पर डॉक्टर से सलाह लें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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