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हो जाएं सतर्क! गर्भावस्था में सामान्य से अधिक सूजन हो सकती है खतरनाक

Tue, 27 Aug 2019 04:31 PM IST
Amulya Rastogi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
गर्भावस्था के दौरान गर्भवती को कई शारीरिक व मानसिक परेशानियों से जूझना पड़ता है। मिचली आना, चक्कर आना, वजन बढ़ जाना, ब्लीडिंग होना, चिड़चिड़ापन होना और पेट में दर्द होना जैसी समस्याओं से हर गर्भवती को जूझना पड़ता है। इन सारी समस्याओं के साथ ही शरीर में सूजन भी आ जाना एक सामान्य लक्षण है। स्त्री एवं प्रसूति रोग व इंफर्टिलिटी विशेषज्ञ डॉ. नीलम मिश्रा का कहना है कि कभी-कभी ये सूजन सामान्य से अधिक होती है, जो खतरनाक हो सकती है। ऐसे में सतर्क होना बहुत जरूरी है।
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डॉ नीलम मिश्रा - फोटो : amar ujala
गर्भावस्था के दौरान महिला का शरीर लगभग 50 फीसदी खून का निर्माण करता है। साथ ही इतनी मात्रा में तरल का निर्माण भी करता है। दरअसल गर्भ में पल रहे बच्चे को भी मां के ही शरीर से पोषण मिलता है, जिसकी वजह से मां का शरीर ज्यादा मात्रा में खून व तरल का निर्माण करता है। हालांकि इस दौरान सूजन आम बात है, लेकिन यदि सूजन अधिक है तो यह चिंता की बात है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
कभी-कभी ये सूचन ब्लड प्रेशर के कारण भी होती है या फिर खून की कमी या थायराइड का लक्षण भी हो सकती है। एक और कारण हो सकता है, हालांकि यह दुर्लभ है कि किडनी की समस्या के कारण सूजन आ जाए। ऐसी स्थिति में जरूरी है कि हम अपनी डॉक्टर को बिना देर किए दिखाएं।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
सबसे अधिक सूजन पैरों में आती है
गर्भावस्था के दौरान करीब 90 फीसदी महिलाओं के पैरों में सूजन आ जाती है। सूजन कम करने के लिए आप चाहें तो अपने पैरों को गुनगुने पानी में कुछ देर के लिए डुबोकर रखें। पानी में नमक भी डाला जा सकता है। कई बार ऐसा होता है कि गर्भवती महिलाएं यदि कामकाजी हैं तो ज्यादा दौड़भाग के कारण या अधिक देर तक खड़े रहने के कारण भी सूजन आ जाती है। इसके लिए पैर लटकाकर बैठने के बजाय ऊपर करके या तकिया का सहारा लें। इस दौरान ब्रेस्ट में सूजन भी सामान्य है। दरअसल इस दौरान महिला के स्तन में दूध बनना शुरू हो जाता है। हार्मोनल परिवर्तन के चलते चेहरे में भी बदलाव होते हैं, चेहरा बदला-बदला सा या थोड़ा मुरझाया सा लगता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
दांतों का भी रखें ध्यान
गर्भावस्था के दौरान की एक बड़ी समस्या दांतों का कमजोर होना है। इस पर किसी का ध्यान नहीं जाता। दरअसल नौ महीने का समय ऐसा होता है, जब पोषक तत्वों की डिमांड काफी बढ़ जाती है, क्योंकि मां को खुद के साथ-साथ गर्भ में पल रहे बच्चे का भी पोषण करना पड़ता है। इसलिए जरूरी है कि विटामिन सी की कमी न होने दें। मौसमी फल, आंवला, नींबू और अमरूद का सेवन ज्यादा से ज्यादा करें। इससे खून की कमी नहीं होगी और जरूरी पोषक तत्व भी मिलते रहेंगे। इसके अलावा नौ महीने तक होने वाले रूटीन चेकअप को नजरअंदाज न करें, ये नियमित परीक्षण गर्भवती और सेहतमंद बच्चे के लिए बहुत जरूरी है।
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