फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

लंबे समय से गले में खराबी हो सकती है डिप्थीरिया का संकेत, इन घरेलू उपायों से पा सकते हैं शीघ्र फायदा

Thu, 08 Apr 2021 03:26 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
गले में संक्रमण को न करें नजरअंदाज - फोटो : pixels
डॉ देवेंद्र अग्रवाल
पेडियाट्रिक सर्जन
डिग्री- एमबीबीएस एमएस (जनरल सर्जरी), एमसीएच (पैडियाट्रिक सर्जरी)
अनुभव - आठ वर्ष 
Medically Reviewed by Dr. Devendra Agarwal


गले में खराबी और बुखार होना सामान्य है। कई मामलों में देखने को मिलता है कि गले में खराबी की समस्या के साथ ही लोगों के गले के अंदर सफेद या ग्रे रंग की एक परत जमने लगती है। इस स्थिति को नजरअंदाज न करें, यह डिप्थीरिया का संकेत हो सकता है। डिप्थीरिया एक गंभीर संक्रामक बीमारी है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकले बैक्टीरिया के शरीर में प्रवेश करने पर होती है। यह बैक्टीरिया मुंह के अलावा नाक या आंख के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। 
डिप्थीरिया के लक्षण विषाक्त पदार्थों के कारण पैदा होते हैं। धीरे-धीरे ये रक्त वाहिकाओं के जरिए पूरे शरीर में फैल जाते हैं। इस रोग से ग्रस्त व्यक्ति का श्वसन मार्ग बुरी तरह से प्रभावित हो जाता है जिसकी वजह से बुखार, भूख न लगने, गले में खराश, सिरदर्द और गर्दन में सूजन की दिक्कत हो सकती है। कई प्रकार के घरेलू उपायों के माध्यम से इस समस्या को दूर किया जा सकता है। आइए डिप्थीरिया में कारगर ऐसे ही कुछ घरेलू उपायों के बारे में जानते हैं। 
विज्ञापन

2 of 6
अनानास का रस पीने से गले के संक्रमण में लाभ मिलता है। - फोटो : pixabay
अनानास का सेवन
अनानास का ताजा रस पीने से गले में जो कुछ भी जमा होता है, वो निकल जाता है। गले के संक्रमण विशेषकर डिप्थीरिया को दूर करने में यह काफी प्रभावी उपाय हो सकता है। अनानास के जूस में बीटा-कैरोटीन होता है इसलिए भी इसे डिप्थीरिया को दूर करने का असरकारी उपाय माना जाता है। बीटा-कैरोटीन एक प्रकार का एंटीऑक्सिडेंट है।
विज्ञापन

3 of 6
तुलसी के पत्ते संक्रमण में लाभकारी हैं - फोटो : iStock
तुलसी की पत्तियों के सेवन से लाभ
तुलसी की पत्तियां भी डिप्थीरिया के रोग में बहुत फायदेमंद होती हैं। इसके एंटीबैक्टीरियल गुण श्वसन मार्ग से जुड़े संक्रमणों के इलाज में मदद करती हैं। एक गिलास पानी में आप तुलसी की पत्तियों को डालें और इस पानी को पी लें। इस उपाय से डिप्थीरिया से काफी राहत मिलती है।

4 of 6
अरंडी का उपयोग है फायदेमंद - फोटो : pixabey
अरंडी
अरंडी में एंटी-इंफ्लामेट्री और एंटी-माइक्रोबियल गुण होते हैं जो कि डिप्थीरिया की स्थिति का इलाज करने में असरकारी रूप से मदद कर सकते हैं। इसके लिए अरंडी की पत्तियों को पीस लें, आप चाहें तो इसमें कुछ सहजन की पत्तियां भी डाल सकते हैं। अब इसमें लहसुन का रस डालकर पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को सूंघने से नासिका मार्ग साफ हो जाता है और डिप्थीरिया के मरीजों को राहत मिलती है।
विज्ञापन

5 of 6
नमक पानी के फायदे - फोटो : iStock
नमक भी है प्रभावी
गले में खराश के लिए नमक बहुत बढिया उपाय है। एक गिलास गुनगुने पानी में एक चम्मच नमक डालकर गरारे करें। ये नुस्खा शरीर में नमक की कमी के कारण होने वाली सांस से जुड़ी समस्याओं के इलाज में भी मददगार है।
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
खूब सारा पानी पिएं - फोटो : istock
किन आदतों को लाएं प्रयोग में
डिप्थीरिया से ग्रस्त व्यक्ति को अपनी आदतों में बदलाव करने की सलाह दी जाती है। ऐसे रोगियों को सामान्य तौर पर इन उपायों को प्रयोग में लाना चाहिए।
  • खूब पानी पिएं।
  • पर्याप्त आराम करें।
  • हाथों को ठीक तरह से धोएं।
  • आहार में मुलायम चीजों और तरल पदार्थों को शामिल करें।
इस प्रकार इन घरेलू नुस्खों की मदद से आप काफी हद तक डिप्थीरिया से छुटकारा पा सकते हैं और सबसे खास बात है कि उपरोक्त प्राकृतिक चीजों का कोई दुष्प्रभाव भी नहीं होता है।


नोट: यह लेख दिल्ली स्थित डॉ देवेंद्र अग्रवाल से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर अग्रवाल को 30 वर्षों का अनुभव है। डॉ अग्रवाल ने पटना मेडिकल कॉलेज एमबीबीएस और लखनऊ विश्वविद्यालय से परास्नातक (जनरल सर्जरी) की पढ़ाई के साथ बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से एमसीएच (पेडियाट्रिक सर्जरी) की पढ़ाई पूरी की है। इसके अलावा डॉ अग्रवाल रमा मेडिकल कॉलेज में सहायक प्रोफेसर भी रह चुके हैं। इन्हें पेडियाट्रिक गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) सर्जरी और लैप्रोस्कोपिक सर्जरी में विशेष रुचि है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें