फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Alert: नींद की कमी शरीर को बना देती है बीमारियों का घर, 170 से अधिक रोगों का हो सकता है खतरा

Mon, 04 Aug 2025 07:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी और आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 88 हजार से ज्यादा लोगों की नींद से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि नींद की कमी से 172 से अधिक बीमारियों का खतरा हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 4
नींद की कमी के नुकसान - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जितना जरूरी स्वस्थ और पौष्टिक आहार का सेवन करना है, उतना ही जरूरी है रोजाना रात में अच्छी और निर्बाध नींद प्राप्त करना। नींद की कमी आपके संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाली हो सकती है। कई अध्ययनों से पता चलता है जिन लोगों की नींद अनियमित होती है या नींद पूरी नहीं होती है उनमें अन्य लोगों की तुलना में हृदय रोग, इंफ्लेमेशन और कई अन्य प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का खतरा कई गुना अधिक हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अच्छी नींद लेना सिर्फ आराम का विषय नहीं, ये एक बुनियादी जरूरत है, जिसका हमारी सेहत पर सीधा असर पड़ता है। अनियमित नींद 'स्लो पॉइजन' की तरह आपके स्वास्थ्य को खोखला कर सकती है।

हालिया शोध में विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि अनियमित नींद की स्थिति एक दो नहीं 170 से अधिक प्रकार की बीमारियों का कारण बन सकती है।


नींद की कमी 170 से अधिक बीमारियों का घर

चीन की पेकिंग यूनिवर्सिटी और आर्मी मेडिकल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने 88 हजार से ज्यादा लोगों की नींद से जुड़े डेटा का विश्लेषण किया। इसमें पाया गया कि नींद की कमी से 170 से अधिक बीमारियों का संबंध है। सोने और जागने का तय समय न होने से बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इनमें पार्किंसन रोग का खतरा 2.8 गुना और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 1.6 गुना ज्यादा है।

शोधकर्ताओं ने नींद से जुड़ी छह आदतों-नींद की अवधि, नींद आने का समय, नींद का रिदम (यानी सोने-जागने का चक्र), नींद की गहराई, नींद की गुणवत्ता और रात में बार-बार जागने की आदत को लेकर अध्ययन किया। 
विज्ञापन

2 of 4
अच्छी नींद सभी लोगों के लिए जरूरी - फोटो : adobe stock
संपूर्ण स्वास्थ्य पर देखा जाता है असर

शोधकर्ताओं ने पाया कि रात में देर से सोने वालों में लिवर सिरोसिस का खतरा अधिक हो सकता है। जो लोग रात 12:30 बजे बाद सोते हैं उनमें लिवर सिरोसिस होने का खतरा उन लोगों से 2.6 गुना ज्यादा था, जो रात 11:30 बजे से पहले सो जाते हैं। इसके अलावा खराब नींद या कम नींद लेने का मस्तिष्क और दिल की सेहत पर भी नकारात्मक असर हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक की सेहत पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव देखे गए हैं।
विज्ञापन

3 of 4
नींद की कमी का हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : adobe stock photos
हृदय रोग और मस्तिष्क की समस्याओं का जोखिम

अध्ययनों से पता चलता है कि अनिद्रा और स्लीप एपनिया जैसी स्थितियों सहित नींद की गड़बड़ी, हृदय रोग के जोखिमों को बढ़ा देती है।

खराब नींद उच्च रक्तचाप, मोटापा और मधुमेह जैसे जोखिम कारकों को बढ़ा सकती है, साथ ही इससे सूजन की समस्या भी बढ़ जाती है जिसका सीधा असर हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित करने वाला हो सकता है। जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के एक अध्ययन के अनुसार, अनियमित नींद से हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

इसी तरह नींद की कमी याददाश्त, निर्णय क्षमता और ध्यान को प्रभावित करती है। दीर्घकालिक स्थितियों में इससे अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
क्या आपकी भी नहीं पूरी हो रही है नींद? - फोटो : Freepik.com
ये भी जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, अच्छी नींद लेना सभी उम्र के लोगों के लिए जरूरी है। ये शारीरिक-मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को प्रभावित करती है। इससे होने वाले कुछ और दुष्प्रभावों को भी जानिए।
  • नींद की अनियमितता शरीर में कोर्टिसोल (स्ट्रेस हार्मोन) बढ़ाती है और मेलाटोनिन (नींद के लिए जरूरी हार्मोन) को गड़बड़ कर देती है।
  • अध्ययनों से पता चलता है कि नींद की कमी से शरीर संक्रमण से लड़ने में कमजोर हो जाता है।
  • नींद की कमी से ग्रेलिन (भूख बढ़ाने वाला हार्मोन) बढ़ता है और लेप्टिन (भूख कम करने वाला हार्मोन) घटता है। इससे आप अधिक खाने लगते हैं जिससे वजन बढ़ सकता है।


-----------
स्रोत
Phenome-wide Analysis of Diseases in Relation to Objectively Measured Sleep Traits and Comparison with Subjective Sleep Traits in 88,461 Adults


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें