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आरटीपीसीआर और एंटीजन के अलावा इस तरीके से भी कर सकते हैं कोविड-19 की जांच

Tue, 16 Mar 2021 07:01 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लखनऊ के सदर इलाके में कोरोना की जांच के लिए नमूना एकत्र करते स्वास्थ्य कर्मी। - फोटो : PTI
कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों ने लोगों की चिंता एकबार फिर से बढ़ा दी है। मामलों की पुष्टि करने के लिए अबतक आरटीपीसीआर और एंटीजन टेस्ट किए जाते रहे हैं। आरटीपीसीआर टेस्ट के दौरान नाक या गले से स्वैब का सैंपल लिया जाता है जबकि टेस्ट किट के माध्यम से एंटीजन टेस्ट किया जाता है। हालिया रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने दावा किया है कि नॉन-इनवेसिव स्किन स्वैब के नमूने भी कोरोनावायरस का पता लगाने के लिए पर्याप्त हो सकते हैं। इतना ही नहीं दावा यह भी किया जा रहा है कि इसका परिणाम भी तेजी से प्राप्त किया जा सकता है। इस अध्ययन को लैंसेट ई क्लीनिकल जर्नल में प्रकाशित किया गया है। आइए जानते हैं इस अध्ययन में क्या खास है
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay
ब्रिटेन स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के शोधकर्ताओं ने अध्ययन के आधार पर जारी की गई रिपोर्ट में बताया कि शरीर की वसाग्रस्त ग्रंथियों से निर्मित होने वाले सीबम की मदद से भी वायरस का पता लगाया जा सकता है। सीबम, एक प्रकार का तैलीय पदार्थ होता है जो वायरस की प्रकृति की पहचान करने में सहायक हो सकता है। अध्ययन की पुष्टि के लिए शोधकर्ताओं ने 67 मरीजों के सीबम के सैंपल लिए। परीक्षण में 67 में से 30 को कोरोना पॉजिटिव  पाया गया।
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dnd fyover corona test - फोटो : राजन राय
सीबम से कैसे किया जाता है परीक्षण?
सीबम के माध्यम से कोरोना के मामलों की पुष्टि के लिए सबसे पहले पीठ या फिर चेहरे की त्वचा को रगड़कर सैंपल लिया जाता है। सैंपल के माध्यम से प्राप्त पॉजिटिव और निगेटिव मामलों के बीच के अंतर को पता करने के लिए विशेषज्ञों ने  नमूनों का विश्लेषण भी किया। इस विश्लेषण में विशेषज्ञों को एक और खास बात का पता चला।
 
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कोरोना वायरस की जांच - फोटो : Amar Ujala
पॉजिटिव और निगेटिव मामलों के अंतर के विश्लेषण के दौरान विशेषज्ञों ने पाया कि जिन रोगियों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव थी उनमें निगेटिव मामले वाले रोगियों की तुलना में लिपिड का स्तर कम पाया गया।
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