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Food Safety Warning: अखबार में पैक खाना बन सकता है गंभीर बीमारियों की वजह, FSSAI ने फिर दी चेतावनी

Mon, 08 Jun 2026 11:41 AM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Side Effects of Using Newspaper for Food: अक्सर आपने ऐसा देखा होगा कि छोटे दुकानदार और ठेले वाले खाने के सामान को पैक करने के लिए अखबार का इस्तेमाल करते हैं। ये किस हद तक सही है, आइए जानते हैं। 
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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : AI
Side Effects of Using Newspaper for Food: भारत में आज भी कई जगहों पर स्ट्रीट फूड और छोटे दुकानों में खाने-पीने की चीजों को अखबार में पैक करने की पुरानी परंपरा देखने को मिलती है। समोसे, पकौड़े, कचौड़ी वड़ा पाव और अन्य स्नैक्स अक्सर अखबार में लपेटकर दिए जाते हैं, जो देखने में भले ही आम लगे, लेकिन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। 

भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के अनुसार, अखबार में खाना पैक करना न केवल असुरक्षित है बल्कि पूरी तरह गैरकानूनी भी है। ‘फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स (पैकेजिंग) रेगुलेशंस, 2018’ के तहत खाद्य पदार्थों को स्टोर या लपेटने के लिए अखबार या किसी भी अनहाइजीनिक सामग्री के उपयोग पर सख्त प्रतिबंध लगाया गया है।

बहुत से लोगों को ये पता ही नहीं है कि अगर वो नियमित रूप से खाने को अखबार में पैक करके रखते हैं, तो इससे उनके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ेगा। यहां हम आपको इसी बारे में जानकारी देंगे। 
 
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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock
 1. स्याही में मौजूद जहरीले रसायन
 
  • अखबार में इस्तेमाल होने वाली प्रिंटिंग इंक (स्याही) में कई प्रकार के केमिकल्स, रंग, सॉल्वेंट्स और भारी धातुओं के अंश हो सकते हैं। 
  • जब कोई गर्म, तला हुआ या तेल वाला भोजन अखबार में लपेटा जाता है, तो ये रसायन धीरे-धीरे भोजन में ट्रांसफर हो सकते हैं। 
  • शरीर में पहुंचने के बाद ये केमिकल्स लिवर, किडनी और हार्मोन सिस्टम पर नकारात्मक असर डाल सकते हैं। 
  • लगातार ऐसे दूषित भोजन का सेवन स्वास्थ्य जोखिम को बढ़ा सकता है।

 
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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock
2. गंभीर बीमारियों का खतरा
 
  • अखबार में पैक किए गए भोजन के लंबे समय तक सेवन से शरीर में टॉक्सिक पदार्थ जमा हो सकते हैं। 
  • इससे पेट से जुड़ी समस्याएं जैसे गैस, अपच, फूड पॉइजनिंग के अलावा हार्मोनल असंतुलन और इम्यून सिस्टम पर असर पड़ सकता है। 
  • कई शोधों में जिक्र है कि अखबार में इस्तेमाल की जाने वाली इंक से कैंसर के बैक्टीरिया तक पनप सकते हैं।
  • कुछ शोधों में यह भी माना गया है कि लगातार दूषित केमिकल्स के संपर्क से गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। 

 

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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : Freepik.com
3. बैक्टीरिया और गंदगी का जोखिम
 
  • अखबार कई लोगों के हाथों से गुजरता है और खुले वातावरण में रखा जाता है, जिससे उस पर धूल, बैक्टीरिया और अन्य सूक्ष्म जीव जमा हो सकते हैं। 
  • जब यही अखबार सीधे भोजन के संपर्क में आता है, तो ये सूक्ष्म जीव खाने को दूषित कर सकते हैं। 
  • इससे पेट में संक्रमण, डायरिया और अन्य इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।

 
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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : अमर उजाला।
4. गर्म खाने में ज्यादा खतरा
 
  • समोसा, पकौड़ा, कचौड़ी जैसे गर्म और तैलीय खाद्य पदार्थ अखबार की स्याही को बहुत तेजी से अवशोषित कर लेते हैं। 
  • गर्मी और तेल के कारण केमिकल्स और भी आसानी से भोजन में मिल जाते हैं।
  •  इसी वजह से स्ट्रीट फूड में अखबार का उपयोग सबसे ज्यादा खतरनाक माना जाता है।
  •  यह आदत तुरंत बदलना स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद जरूरी है।

 
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स्ट्रीट फूड में अखबार का इस्तेमाल कितना खतरनाक? - फोटो : AI
सुरक्षित विकल्प क्या हैं?
 
  • फूड-ग्रेड पेपर
  •  बटर पेपर
  • फूड सेफ बॉक्स
  •  प्रमाणित पैकेजिंग मटेरियल
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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