Side Effects Of Wearing Low Quality Sunglasses: अगर आप भी सस्ते के चक्कर में पैसे बचाने के लिए सड़क किनारे से चश्मा खरीदने का सोच रहे हैं तो ये खबर अवश्य पढ़ें।
Side Effects Of Wearing Low Quality Sunglasses: गर्मियों के मौसम में धूप से बचने के लिए सनग्लासेस पहनना आम बात है। कई लोग पैसे बचाने के लिए सड़क किनारे या लोकल मार्केट से सस्ते सनग्लासेस खरीद लेते हैं। ये चश्मे दिखने में आकर्षक और फैशनेबल जरूर लगते हैं, लेकिन आंखों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, केवल स्टाइल या कम कीमत को देखकर सनग्लासेस खरीदना सही फैसला नहीं माना जाता, क्योंकि खराब क्वालिटी का चश्मा आपकी आंखों को डैमेज कर सकता है। ऐसे में आइए जानते हैं कि लो-क्वालिटी सनग्लासेस पहनने से आंखों को क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं और सही चश्मा चुनते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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सही सनग्लासेस कैसे चुनें?
- फोटो : AI
UV किरणों से सुरक्षा नहीं मिलती
सस्ते और लो-क्वालिटी सनग्लासेस का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इनमें अक्सर UV प्रोटेक्शन नहीं होता।
कई बार लोग गहरे रंग के लेंस को ही सुरक्षित मान लेते हैं, जबकि असली सुरक्षा UV400 कोटिंग से मिलती है।
जब आप बिना UV सुरक्षा वाले चश्मे पहनते हैं, तो आंखों की पुतलियां फैल जाती हैं और ज्यादा मात्रा में हानिकारक UVA व UVB किरणें आंखों के अंदर पहुंच जाती हैं।
इससे रेटिना और कॉर्निया को नुकसान पहुंच सकता है।
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सही सनग्लासेस कैसे चुनें?
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आंखों में तनाव और सिरदर्द
खराब गुणवत्ता वाले लेंस रोशनी को समान रूप से फिल्टर नहीं कर पाते।
ऐसे चश्मे पहनने पर आंखों को लगातार फोकस करने के लिए अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
इसका असर सिरदर्द, आंखों में भारीपन, थकान और चक्कर आने जैसी समस्याओं के रूप में दिखाई दे सकता है।
जो लोग लंबे समय तक बाहर रहते हैं, उनके लिए यह समस्या और गंभीर हो सकती है।
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सही सनग्लासेस कैसे चुनें?
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दृष्टि पर नकारात्मक असर
लो-क्वालिटी सनग्लासेस के लेंस अक्सर ऑप्टिकल रूप से संतुलित नहीं होते।
इससे सामने की वस्तुएं टेढ़ी-मेढ़ी या धुंधली दिखाई दे सकती हैं।
लगातार ऐसे चश्मे पहनने से आंखों की फोकसिंग क्षमता प्रभावित हो सकती है और विजुअल डिस्कम्फर्ट बढ़ सकता है।
यह स्थायी नुकसान नहीं भी हो सकता, लेकिन आंखों पर अनावश्यक दबाव जरूर डालता है।
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आंखों में जलन और सूखापन
अगर सनग्लासेस सही तरह से आंखों को कवर नहीं करते या उनमें सुरक्षा की गुणवत्ता खराब होती है, तो धूल, तेज हवा और सूरज की रोशनी का असर कम नहीं हो पाता।
इससे आंखों में जलन, खुजली, लालिमा और सूखापन महसूस हो सकता है।
संवेदनशील आंखों वाले लोगों को यह समस्या ज्यादा परेशान कर सकती है।
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लंबे समय में गंभीर समस्याओं का खतरा
लंबे समय तक UV किरणों के संपर्क में रहने से आंखों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
अत्यधिक UV एक्सपोजर मोतियाबिंद, फोटोकेराटाइटिस और रेटिना को नुकसान पहुंचाने जैसे जोखिमों से जुड़ा हो सकता है।
केवल फैशन के लिए नहीं, बल्कि आंखों की सुरक्षा के लिए भी अच्छी गुणवत्ता वाले सनग्लासेस चुनना जरूरी है।
भरोसेमंद ब्रांड या प्रमाणित विक्रेता से ही खरीदारी करें।
सिर्फ डार्क लेंस देखकर चश्मा न खरीदें।
आंखों के लिए आरामदायक और सही फिटिंग वाला फ्रेम चुनें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।