Why Does My Head Hurt After Using My Phone: इस खबर में जानिए लंबे समय तक स्क्रीन देखने से सिरदर्द क्यों होता है, इसके पीछे क्या कारण हैं और इससे बचने के लिए विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं।
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घंटों लैपटॉप पर काम करने वालों को क्यों होता है सिरदर्द?
- फोटो : AI
Why Does My Head Hurt After Using My Phone: लंबे समय तक मोबाइल, लैपटॉप या कंप्यूटर की स्क्रीन देखना आज की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। ऑफिस का काम हो, पढ़ाई हो या सोशल मीडिया, घंटों स्क्रीन के सामने बिताना आम हो गया है। ऐसे में कई लोगों को दिन खत्म होते-होते सिरदर्द, आंखों में थकान या बेचैनी महसूस होने लगती है। लेकिन क्या हर बार इसके लिए सिर्फ स्क्रीन जिम्मेदार है? इस खबर में इसी सवाल का जवाब जानेंगे।
डॉ. नेहा पंडिता, सीनियर कंसल्टेंट न्यूरोलॉजिस्ट और यूनिट हेड के मुताबिक, स्क्रीन टाइम के साथ हमारी पूरी दिनचर्या भी सिरदर्द की समस्या को प्रभावित कर सकती है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठना, पानी कम पीना, खाना छोड़ना, तनाव और नींद पूरी न होना भी परेशानी बढ़ा सकते हैं। इस बारे में हर किसी को जानकारी होना बेहद जरूरी है। इसलिए आइए डॉक्टर से जानते हैं कि स्क्रीन टाइम और सिरदर्द के बीच क्या संबंध है और इससे बचने के लिए किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
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स्क्रीन टाइम और सिरदर्द का कनेक्शन क्या है?
सबसे पहले ये जानना जरूरी है कि आखिर इन दोनों के बीच का कनेक्शन क्या है। दरअसल, डॉक्टर नेहा के मुताबिक, लंबे समय तक बिना ब्रेक स्क्रीन देखने से डिजिटल आई स्ट्रेन हो सकता है। स्क्रीन पर लगातार फोकस करने के दौरान पलकें कम झपकती हैं, जिससे आंखों में सूखापन और थकान बढ़ सकती है। स्क्रीन की चमक और ग्लेयर भी परेशानी बढ़ा सकते हैं।
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गर्दन का तनाव भी बन सकता है वजह
मोबाइल को लगातार नीचे करके देखने या लैपटॉप पर झुककर बैठने से गर्दन और कंधों की मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है। यह तनाव कुछ लोगों में सिरदर्द को बढ़ा सकता है।
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माइग्रेन वालों को ज्यादा सावधानी
जिन लोगों को पहले से माइग्रेन की समस्या है, उनके लिए अत्यधिक स्क्रीन एक्सपोजर संभावित ट्रिगर हो सकता है। इसके साथ खराब नींद, तनाव, पानी की कमी और समय पर खाना न खाना भी माइग्रेन को प्रभावित कर सकता है।
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देर रात फोन चलाने से बिगड़ सकती है नींद
सोने से पहले फोन पर वीडियो देखना या सोशल मीडिया स्क्रॉल करना आसानी से नींद का समय कम कर देता है। नींद पूरी न होने पर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन, एकाग्रता में कमी और ‘ब्रेन फॉग’ जैसी परेशानी महसूस हो सकती है।
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क्या स्क्रीन इस्तेमाल करने से याददाश्त कमजोर होती है?
डॉ. नेहा पंडिता के मुताबिक, सामान्य स्क्रीन इस्तेमाल को सीधे तौर पर मस्तिष्क को नुकसान पहुंचाने से जोड़ना सही नहीं है। हालांकि लगातार नोटिफिकेशन, बार-बार काम बदलना, देर रात तक स्क्रीन देखना और नींद की कमी मानसिक थकान बढ़ा सकती है। कई बार याददाश्त कमजोर लगने की वजह वास्तव में एकाग्रता में कमी और थका हुआ दिमाग हो सकता है।
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बचाव के लिए अपनाएं ये आदतें
स्क्रीन से समय-समय पर नजर हटाएं, छोटे ब्रेक लें, पर्याप्त पानी पिएं और समय पर भोजन करें। वर्कस्टेशन को इस तरह रखें कि लगातार गर्दन झुकाकर स्क्रीन न देखनी पड़े। अगर बिस्तर पर लेटकर स्क्रॉल करना रोज की आदत बन गई है, तो सोने से पहले कुछ समय स्क्रीन-फ्री रखने की कोशिश करें।
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कब डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर सिरदर्द पहली बार हुआ है, सामान्य से बहुत तेज है, लगातार बढ़ रहा है या इसके साथ कमजोरी, सुन्नपन, भ्रम, दौरे, बेहोशी, बोलने में परेशानी या देखने में महत्वपूर्ण बदलाव जैसे लक्षण हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। बाकी मामलों में शायद सवाल सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि “कितने घंटे का स्क्रीन टाइम बहुत ज्यादा है?” अगर ये ज्यादा बढ़ रहा है, तो स्क्रीन टाइम को कम करने का प्रयास करें।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।