फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

क्या दूसरी डोज के बाद भी महसूस किए जा रहे हैं वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स? कैसे करें इससे बचाव?

Sun, 02 May 2021 02:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
विज्ञापन
1 of 6
टीकाकरण अभियान में तेजी लाने पर जोर - फोटो : Social Media
डॉ. रिचा अस्थाना
(एमबीबीएस, एमडी), एम्स

डॉ अजीत सिंह ओबेरॉय
कैंसर रोग विशेषज्ञ


कोरोना वायरस की बढ़ती रफ्तार को रोकने के लिए सरकार ने वैक्सीनेशन अभियान और तेज कर दिया है। देश में 18 साल और उससे अधिक आयु के लोगों को भी टीके दिए जाने की शुरुआत हो चुकी है। इससे पहले 45 साल और उससे अधिक आयु के लोगों को टीके दिए जा रहे थे। मौजूदा समय में 45 साल से अधिक आयु के ज्यादातर लोगों को वैक्सीन की पहली डोज मिल चुकी है, कुछ लोग इसकी दूसरी डोज भी ले चुके हैं जबकि कुछ 28 दिनों का अंतराल पूरा होने की प्रतीक्षा में हैं। वैक्सीन की पहली डोज के बाद कुछ लोगों को इसके साइड-इफेक्ट के रूप में तेज बुखार और शरीर में दर्द का अनुभव हुआ था। ऐसे में लोगों के मन में सवाल है कि क्या दूसरी डोज के बाद भी ऐसी दिक्कतें आ सकती हैं?
आइए इस बारे में विशेषज्ञों से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 6
कोरोना वैक्सीन की दोनों डोज लेना आवश्यक - फोटो : iStock
क्या दोनों डोज लेना जरूरी है?
कई लोगों के मन में यह सवाल भी आ रहा है कि, क्या वैक्सीन की एक खुराक लेने के बाद दूसरी भी जरूरी है? इस बारे में एम्स की डॉ. रिचा अस्थाना (एमबीबीएस, एमडी) कहती हैं कि जो लोग वैक्सीन की एक खुराक ले चुके हैं उन्हें दूसरी खुराक भी जरूर लेनी चाहिए। पहली डोज के बाद शरीर में वायरस के खिलाफ एंटीबॉडीज तो बन जाते हैं लेकिन वह उतने प्रभावी नहीं होते हैं। वैक्सीन की दूसरी खुराक देकर उन एंटीबॉडीज को बूस्ट किया जाता है। दूसरी डोज के बाद ही वैक्सीन की एफेकेसी 80 फीसदी के करीब की देखी गई है। 
विज्ञापन

3 of 6
कुछ लोगों को महसूस हो रहे हैं वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स - फोटो : Pixabay
वैक्सीन की पहली डोज के बाद दिखे थे साइड-इफेक्ट्स
कैंसर रोग विशेषज्ञ अजीत सिंह ओबेरॉय कहते हैं कि टीकाकरण की दूसरी खुराक को लेकर लोगों के मन में सवाल इसलिए हैं क्योंकि पहली खुराक के बाद कई लोगों में इसके साइड इफेक्ट्स देखे गए थे। लोगों को बुखार, जी मिचलाने, सिरदर्द, शरीर में दर्द, ठंड लगने, डायरिया और थकान जैसी दिक्कतें हो रही थीं। विशेषज्ञ कहते हैं कि वैक्सीन के बाद इस तरह की दिक्कतें होना सामान्य है, क्योंकि शरीर में जब कुछ बाहरी चीज प्रवेश करती है तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया होना आम बात है।

4 of 6
कोरोना वायरस वैक्सीन से घबराएं नहीं - फोटो : iStock
क्या दूसरी डोज के बाद भी ऐसे साइड इफेक्ट्स हो रहे हैं?
डॉक्टर कहते हैं कि पहली डोज की तरह ही कुछ लोगों को कोविड-19 वैक्सीन की दूसरी डोज के बाद भी दिक्कतें आ सकती हैं। वैक्सीन की दूसरी खुराक को अपेक्षाकृत ज्यादा प्रभावशाली माना जाता है ऐसे में यह उन लोगों को भी प्रभावित कर सकती है, जिन्हें पहली डोज के बाद किसी तरह की दिक्कत नहीं हुई थी। अच्छी बात यह है कि दूसरी डोज लेने के बाद शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली वायरस के खिलाफ और अधिक मजबूत हो जाती है।
विज्ञापन

5 of 6
बूस्टर के रूप में काम करती है वैक्सीन की दूसरी डोज - फोटो : pixabay
दूसरी डोज न लेने से क्या हो सकता है?
इस संबंध में डॉ. रिचा कहती हैं कि वैक्सीन की दोनों खुराक लेने के बाद ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है। दूसरी डोज को 'बूस्टर' के रूप में जाना जाता है। अब तक जिन लोगों को 'बूस्टर' की खुराक नहीं मिली है उन्हें अब भी वायरस से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स स्वत: ठीक हो जाते हैं - फोटो : Pixabay
वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए क्या करें?
डॉक्टरों के मुताबिक वैक्सीन के साइड-इफेक्ट्स एक से दो दिन में स्वत: ठीक हो जाते हैं। कुछ लोगों को वैक्सीन लगने वाली जगह पर दर्द और उस बांह में असुविधा का अनुभव हो सकता है। वैक्सीन के साइड इफेक्ट्स से बचने के लिए ये सामान्य उपाय किए जा सकते हैं।
  • जहां पर वैक्सीन लगा हो वहां आइस पैक या ठंडी सेकाई कर सकते हैं।
  • वैक्सीनेशन के बाद तरल पदार्थों का अधिक सेवन करें।
  • खूब मात्रा में पानी, फलों के जूस और पौष्टिक आहार लें।
  • कुछ दिनों तक शराब और धूम्रपान से बचें।
  • हल्के लक्षण महसूस होने पर पैरासिटमॉल ले सकते हैं। 

-----------------------------
नोट: यह लेख एम्स की डॉ. रिचा अस्थाना (एमबीबीएस, एमडी) और कैंसर रोग विशेषज्ञ अजीत सिंह ओबेरॉय से एक बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें