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शरद पूर्णिमा की रात इस बीमारी से पीड़ित लोग रहें सावधान, 72 घंटे तक भूलकर भी ना करें ये 5 काम

Wed, 24 Oct 2018 02:05 PM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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- फोटो : file photo
अगर आपके परिवार में कोई मानसिक रोगी है तो उसे पूर्णमासी की रात घर पर बिल्कुल अकेला न छोड़ें। लगातार उसे अपनी निगरानी में रखें। उसके साथ बातचीत करते रहें वरना उसकी सेहत और बिगड़ सकती है। 
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- फोटो : file photo
चिकित्सकों के अनुसार पूनम का चांद मानसिक बदलाव के साथ नकारात्मक सोच भी विकसित करता है। खासकर ये चांद मनोरोगियों को बेसब्र और बेचैन बना देता है। मनोरोगियों में इस तरह के आए बदलाव को ‘ल्यूनेटिक बिहेवियर’ कहते हैं। 
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शरद पूर्णिमा वैसे तो लोगों की आस्था से जुड़ा हुआ है। इसे लेकर अलग-अलग कई मान्यताएं और कई वैज्ञानिक तथ्य भी जुड़े हुए हैं। धरती से सबसे नजदीक होने की वजह से चांद का गुरुत्वाकर्षण न सिर्फ समुद्र में बड़े ज्वार लाता है बल्कि जीवधारियों में मानसिक बदलाव भी लाता है।चिकित्सकों के अनुसार इसमें अवसाद, आत्महत्या की प्रवृति भी काफी हद तक बढ़ जाती है।

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माना जाता है कि जीवधारियों के शरीर में पानी की मात्रा अत्यधिक होती है इसलिए उस पर पूर्णमासी का खासा असर होता है। मनोरोग विशेषज्ञ डा. नीरज गुप्ता कहते हैं कि पूर्णमासी पर मरीज के व्यवहार में बदलाव आता है। डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। इस दौरान मन में आत्महत्या की प्रवृति बढ़ सी जाती है। ऐसे में मरीज अकेले छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
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सावधानी के हैं 72 घंटे
डाक्टरों के मुताबिक मनोरोगियों पर पूर्णमासी का 72 घंटे तक असर रहता है। ये बहत्तर घंटे उनके लिए खतरनाक होते है। इस दौरान उनकी हरकतें भी असामान्य होती है। अधिक बोलने लगते हैं। अपने को बलशाली भी समझने लगते हैं। मरीज आत्महत्या करने की कोशिश करता है।
 
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पूर्णमासी पर इन घटनाओं में इजाफा
- जेलों में कैदियों की आपसी लड़ाई की आशंका
- वाहन चालकों पर भी असर, दुर्घटनाओं में वृद्धि
- कुत्तों में हिंसक वृत्ति बढ़ती है, काटने में इजाफा
- आत्महत्या की घटनाओं में भी वृद्धि देखी गई है
- मनोरोगियों का डिप्रेशन (अवसाद) बढ़ जाता है
 
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