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Liver Test: रिपोर्ट में SGPT और SGOT आया है हाई? क्या ये लिवर खराब होने का संकेत है

Sat, 01 Aug 2026 08:15 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एसजीओटी और एसजीपीटी ऐसे एंजाइम हैं जो मुख्य रूप से लिवर की कोशिकाओं में पाए जाते हैं। जब किसी कारण से लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है, तो ये एंजाइम खून में सामान्य से अधिक मात्रा में आने लगते हैं। हालांकि इनका बढ़ना हमेशा गंभीर लिवर रोग का संकेत नहीं होता।
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लिवर की जांच - फोटो : Amarujala.com/AI
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई तरह की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा दिया है। इसका लिवर की सेहत पर भी कई तरह से नकारात्मक असर देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 30 साल से अधिक उम्र के सभी लोगों को डॉक्टर की सलाह पर  नियमित रूप से लिवर की जांच कराते रहना चाहिए। लिवर की सेहत को जानने के लिए लिवर फंक्शन टेस्ट (एलएफटी) को सबसे कारगर तरीका माना जाता है।

क्या आपकी जांच में भी एसजीपीटी और एसजीओटी का लेवल अक्सर बढ़ा हुआ रहता है? कई बार लोग पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहे होते हैं, लेकिन रिपोर्ट में एसजीपीटी और एसजीओटी बढ़े हुए मिलते हैं। रिपोर्ट देखते ही ज्यादातर लोग घबरा जाते हैं कि कहीं उनका लिवर खराब हो गया है?

अगर आपकी जांच रिपोर्ट में भी इसका स्तर बढ़ा हुआ रहता है तो आइए जान लेते हैं इसे कैसे कंट्रोल किया जा सकता है?
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खून की जांच-एलएफटी - फोटो : Freepik.com
एसजीपीटी और एसजीओटी

सीरम ग्लूटामेट पाइरुवेट ट्रांसएमिनेस (एसजीपीटी) और सीरम ग्लूटामिक-ऑक्सालोएसेटिक ट्रांसएमिनेज (एसजीओटी) दो ऐसे एंजाइम हैं जो मुख्य रूप से लिवर की कोशिकाओं में पाए जाते हैं। जब किसी कारण से लिवर की कोशिकाओं को क्षति होती है, तो ये एंजाइम खून में सामान्य से अधिक मात्रा में आने लगते हैं। 
 
  • हालांकि इनका बढ़ना हमेशा गंभीर लिवर रोग का संकेत नहीं होता। 
  • फैटी लिवर, वायरल हेपेटाइटिस, मोटापा-डायबिटीज के अलावा कुछ दवाओं का लंबे समय तक सेवन और यहां तक कि बहुत कठिन व्यायाम के कारण भी कुछ मामलों में इन एंजाइमों का स्तर बढ़ सकता है।
  • यही वजह है कि डॉक्टर केवल एसजीओटी और एसजीपीटी देखकर कोई निष्कर्ष नहीं निकालते। 
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लिवर रिपोर्ट - फोटो : adobestock
इन दोनों एंजाइमों के बारे में जान लीजिए

एसजीपीटी मुख्य रूप से लिवर में होता है जबकि एसजीओटी लिवर के अलावा हृदय, मांसपेशियों और अन्य ऊतकों में भी मौजूद रहता है। जब लिवर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचता है तो ये एंजाइम रक्त में अधिक मात्रा में पहुंच जाते हैं। इसलिए डॉक्टर इन्हें लिवर की सेहत का महत्वपूर्ण संकेतक मानते हैं।
 
  • रिपोर्ट में इन एंजाइमों का बढ़ना यह संकेत देता है कि लिवर की कोशिकाओं पर किसी प्रकार का दबाव या क्षति हो सकती है। 
  • हालांकि इसका अर्थ यह नहीं कि हर बार गंभीर लिवर रोग ही हो। 
  • कई बार हल्का संक्रमण, फैटी लिवर, कुछ दवाएं, शराब, वायरल संक्रमण या अस्थायी कारणों से भी इनका स्तर बढ़ सकता है। 

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लिवर की समस्याओं का जोखिम - फोटो : Freepik.com
एसजीओटी-एसजीपीटी को कैसे कंट्रोल करें?

डॉक्टर बताते हैं कि जिन लोगों की रिपोर्ट में एसजीओटी-एसजीपीटी बढ़ा रहता है, उनमें सबसे पहले इसके कारणों का पता लगाना जरूरी है। 
 
  • यदि फैटी लिवर है तो वजन कम करना, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और मीठे व प्रोसेस्ड फूड को कम करना मददगार हो सकता है।
  • यदि वायरल हेपेटाइटिस या कोई अन्य बीमारी कारण है, तो उसका उचित इलाज कराया जाना चाहिए। 
  • शराब का सेवन पूरी तरह बंद करना चाहिए। 
  • डॉक्टर की सलाह के बिना कोई सप्लीमेंट या दवा नहीं लेनी चाहिए। 
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लिवर को कैसे स्वस्थ रखें? - फोटो : Adobe Stock
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये आदतें

डॉक्टर कहते हैं, सभी लोगों को लिवर को स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहना चाहिए। 
 
  • हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज और पर्याप्त प्रोटीन वाला संतुलित भोजन लें। 
  • नियमित व्यायाम करें ताकि वजन कंट्रोल रहे। 
  • शराब और धूम्रपान से बचें, ये लिवर को स्वस्थ रखने के लिए बहुत जरूरी है।
  • बिना डॉक्टर की सलाह के पेन किलर या हर्बल सप्लीमेंट्स का लंबे समय तक सेवन न करें। 
  • यदि एसजीओटी और एसजीपीटी का स्तर बहुत अधिक बढ़ा हुआ हो या रिपोर्ट के साथ पीलिया, तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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