मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामले पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ते हुए देखे गए हैं, विशेषतौर पर कोरोना महामारी के बाद से इसकी दर में और भी बढ़ोतरी आई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह बड़े खतरे के रूप में उभरती समस्या है, जिसके बारे में सभी लोगों को जागरूक होना जरूरी है। मानसिक स्वास्थ्य की समस्या के कारण शारीरिक स्वास्थ्य का जोखिम भी बढ़ जाता है। दुर्भाग्यवश भारत में अब भी मानसिक स्वास्थ्य को लेकर लोगों में कलंक की भाव के कारण ज्यादातर लोगों में इसका समय रहते निदान नहीं हो पाता है।
देश में बढ़ते मानसिक रोगों के खतरे को लेकर हाल ही में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (आईआईटी) जयपुर के अध्ययनकर्ताओं ने एक चौंकाने वाली रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसमें कहा गया है कि भारत में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के लिए स्व-रिपोर्टिंग दर काफी कम है। इसका मतलब है कि लोगों को इसके लक्षणों को पहचानने और खुद से निदान-इलाज के लिए जाने की दर कम है, जोकि निश्चित ही चिंताजनक है।