वर्जीनिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने मस्तिष्क के भीतर संचार व्यवस्था की निगरानी के लिए एक उपकरण विकसित किया है, जो यह बताता है कि अल्जाइमर की दवाओं का सीमित प्रभाव क्यों है और उनके बंद होने के बाद मरीजों को बहुत बुरा क्यों लगता है। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि उनकी नई पद्धति से अवसाद, नींद की बीमारी (स्लीप डिसऑर्डर), न्यूरोलॉजिकल (तंत्रिका संबंधी) समस्याएं और प्रमुख मनोरोग स्थितियों के बारे में हमारी समझ पर जबरदस्त प्रभाव पड़ेगा। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह मस्तिष्क के कामकाज में वैज्ञानिक अनुसंधान को गति देगा और इससे नए उपचारों के विकास में भी मदद मिलेगी।