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सांस की तरंगों और खांसी की आवाज सुनकर कोरोना के इलाज में मदद करेगा यह खास उपकरण

Thu, 16 Apr 2020 01:32 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सांकेतिक तस्वीर
बंगलूरू स्थित भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी) के शोधकर्ता कोरोना वायरस के निदान के लिए एक उपकरण पर काम कर रहे हैं। यह उपकरण श्वसन तरंगों, खांसी और अन्य ध्वनियों के आधार पर इलाज में मदद करेगा। इस उपकरण को मंजूरी मिलने के बाद इससे इस तरह से जांच की जा सकेगी, जिसमें स्वास्थ्यकर्मियों को कम खतरा होगा और मौजूदा जांच विधि की तुलना में जल्द परिणाम सामने आ सकते हैं। वैज्ञानिक कोरोना के इलाज में मदद करने वाले इस उपकरण के विकास की कोशिश कर रहे हैं। चूंकि इस बीमारी के प्रमुख लक्षणों में सांस संबंधी समस्याएं शामिल हैं, इसलिए श्वसन तरंगों के जरिए बीमारी के बायोमार्कर का पता लगाना आसान होगा। 
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Research
ध्वनि तंरगें रिकॉर्ड करके जांच
आठ सदस्यीय टीम के शोधकर्ता ध्वनि विज्ञान में बीमारी के ‘बायोमार्कर’ का पता लगाने और ध्वनियों के स्तर की माप करने के बाद इस उपकरणों को तैयार कर सकेंगे। टीम के एक सदस्य ने बताया, बीमारी के प्रमुख लक्षणों में श्वसन संबंधी समस्याएं शामिल हैं और इस प्रोजेक्ट में प्रतिभागियों के सांस लेने की आवाज, खांसी की आवाज, श्वसन तंत्र से उत्पन्न होने वाली ध्वनि तरंगों को रिकॉर्ड करने की आवश्यकता होती है। संपूर्ण प्रक्रिया के लिए लगभग पांच मिनट की रिकॉर्डिंग समय की जरूरत होती है।
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Research
दुनियाभर के शोधकर्ताओं को भेजेंगे डाटा
आईआईएससी के प्राध्यापक श्रीराम गणपति के नेतृत्व में जारी यह प्रोजेक्ट आंकड़े जुटाने के चरण में है। सांस और ध्वनि तरंगों की इन रिकॉर्डिंग के अलावा मरीज की उम्र, लिंग, स्थान के साथ स्वास्थ्य संबंधी तथ्य भी रिकॉर्ड किए जाएंगे। इसके डाटा को दुनियाभर के शोधकर्ताओ के साथ साझा किया जाएगा।
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शोध - फोटो : फाइल फोटो
टीम के अनुसार, महामारी के मामलों की संख्या बढ़ रही है और संक्रमण की सरल, किफायती और तेज तरीके से जांच किया जाना कई देशों में स्वास्थ्य क्षेत्र, नीति निर्माण और आर्थिक पुनरुद्धार की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटक बना गया है। ऐसे में इस प्रोजेक्ट को बड़ी उम्मीद के तौर पर देखा जा रहा है। यह प्रोजेक्ट फिलहाल आंकड़ा संग्रह चरण में है और इस उपकरण को पूर्ण मंजूरी मिलने से पहले इसे प्रयोगात्मक प्रक्रिया से गुजरना होगा।
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