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हेल्थ की बात: रकिंग वॉक के दीवाने हो रहे फिटनेस लवर्स, क्या हैं इस एक्सरसाइज के फायदे?

Sat, 24 Oct 2026 08:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव यासमीन सिद्दीकी, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रकिंग वॉक फिटनेस का एक ऐसा तरीका है, जिसमें पीठ पर वजनदार बैग लेकर पैदल चला जाता है। यह सामान्य वॉक के मुकाबले एक्सरसाइज की तीव्रता बढ़ा सकती है। इससे कैलोरी बर्न करने, मांसपेशियों की मजबूती और स्टैमिना बढ़ाने में मदद मिल सकती है। 
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रकिंग वॉक के क्या फायदे हैं? - फोटो : Amarujala.com/AI
फिट रहने के लिए जरूरी नहीं कि हर दिन जिम में घंटों पसीना बहाया जाए। कई बार आपकी रोजमर्रा की वॉक भी फिटनेस का नया रास्ता खोल सकती है। बस इसके तरीके में थोड़ा बदलाव करना होगा। रकिंग वॉक ऐसा ही एक तरीका है, जिसमें पीठ पर वजन वाला बैकपैक लेकर चला जाता है। इससे सामान्य वॉकिंग के मुकाबले शरीर को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है और मांसपेशियां भी सक्रिय होती हैं।

यही वजह है कि फिटनेस के शौकीनों के बीच यह तरीका लोकप्रिय हो रहा है। हालांकि, इसके फायदे पाने के लिए सही तकनीक, हल्का वजन और शरीर की क्षमता का ध्यान रखना बेहद जरूरी है।
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मोटापे का खतरा - फोटो : Adobe Stock
रकिंग वॉक के बारे में जान लीजिए

रकिंग वॉक एक तरह की वॉकिंग एक्सरसाइज है, जिसमें पीठ पर बैकपैक लेकर चला जाता है। सामान्य वॉकिंग में शरीर पर अतिरिक्त भार नहीं होता, जबकि रकिंग में बैग का वजन उठाकर चलना पड़ता है।
 
  • इससे शरीर को अधिक मेहनत करनी पड़ती है और पैर, कूल्हों व धड़ की मांसपेशियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
  • यही वजह है कि रकिंग वॉक से सामान्य वॉकिंग की तुलना में अधिक कैलोरी बर्न होती है।
  • रकिंग की खासियत यह है कि इसे पार्क, खुले मैदान या सुरक्षित वॉकिंग ट्रैक पर किया जा सकता है। इसके लिए महंगे जिम उपकरणों की जरूरत नहीं होती।
  • हालांकि, कितना वजन उठाया जाए और कितनी देर चला जाए, यह व्यक्ति की उम्र, फिटनेस और शारीरिक क्षमता पर निर्भर करता है।

कैलोरी बर्न करने से लेकर स्टैमिना बढ़ाने तक में फायदेमंद

वहीं, अगर आपको गर्दन, पीठ, जॉइंट्स या पेल्विक फ्लोर की समस्या है या आप गर्भवती हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ही रकिंग वॉक की शुरुआत करें। इसके अलावा, अगर आप लंबे समय से किसी बीमारी से जूझ रही हैं, शारीरिक रूप से सक्रिय नहीं हैं या किसी तरह के एक्सीडेंट का शिकार हुई हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
 
  • सब कुछ सही होने के बावजूद अगर मांसपेशियों में खिंचाव के अलावा पीठ, पैर या कंधे में दर्द होने लगे, तो इसे रोक दें। दर्द को नजरअंदाज करके दूरी या भार बढ़ाना चोट लगने के जोखिम को बढ़ा सकता है।
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रकिंग वॉक की सावधानियां - फोटो : Amarujala.com/AI
हल्के वजन से करें शुरुआत

रकिंग वॉक शुरू करते समय सबसे बड़ी गलती जरूरत से ज्यादा वजन उठाना है। शुरुआत में हल्के बैकपैक के साथ केवल 10 से 15 मिनट चलें। शरीर सहज महसूस करे, तो धीरे-धीरे समय और वजन बढ़ाया जा सकता है। दोनों को एक साथ बढ़ाने से बचें।
 
  • बैकपैक ऐसा चुनें, जो पीठ पर अच्छी तरह फिट हो और चलते समय हिले नहीं। वजन को संतुलित रखें, ताकि शरीर का पॉश्चर बिगड़े नहीं। चलते समय सिर सीधा, कंधे सहज और पीठ स्वाभाविक स्थिति में रखें। शुरुआत में समतल रास्ता चुनें और शरीर को आराम देने के लिए पर्याप्त समय भी दें।

शरीर को मिलेंगे कई लाभ
 
  • रकिंग वॉक तेजी से कैलोरी बर्न कर वजन घटाने में मददगार है। यह पैरों, पीठ, कंधों, जांघों और पेट की मांसपेशियों को मजबूत बनाती है।
  • नियमित अभ्यास से शरीर का संतुलन बढ़ता है।
  • यह हृदय और फेफड़ों की क्षमता सुधारने, हड्डियों का घनत्व बनाए रखने और मेटाबॉलिज्म बेहतर करने में सहायक है।
  • साथ ही, सही तकनीक से रकिंग करने पर शरीर की ताकत बढ़ती है।
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वॉक करने के फायदे - फोटो : AI Generated
क्या है विशेषज्ञ की सलाह

फिटनेस एक्सपर्ट डॉ. अमित अग्रवाल बताते हैं कि रकिंग वॉक का उद्देश्य वजन उठाना नहीं, बल्कि शरीर को फिट और मजबूत बनाना है। जिन लोगों को गर्दन, कमर या घुटनों में दर्द है, उन्हें पहले विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए। रकिंग वॉक आप धीरे-धीरे शुरू करें और दर्द को नजरअंदाज न करें। अचानक ज्यादा चलने से मांसपेशियों और जोड़ों में चोट लग सकती है। नियमित रकिंग और संतुलित खान-पान वजन नियंत्रित करने, दिल की सेहत सुधारने, सांस लेने की क्षमता बढ़ाने और रोजमर्रा के काम आसानी से करने में मदद करते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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