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'Gold' से होती है इस ब्लड ग्रुप की तुलना, फिर खतरे में क्यों रहती है इन लोगों की जान

Sat, 26 Jan 2019 02:26 PM IST
मंजू ममगाईं बीबीसी हिंदी
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Blood Group

गोल्डन ब्लड, सुनकर ही किसी बेशकीमती चीज का अहसास होता है।यह खून का दुर्लभ ग्रुप है जो दुनिया में बहुत कम लोगों का होता है।भले ही इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को आप खास समझें मगर हकीकत यह है कि उनके लिए यह बात कई बार जानलेवा भी बन जाती है।जिस ब्लड ग्रुप को गोल्ड ब्लड कहा जाता है, उसका असली नाम आरएच नल (Rh null) है।Rh null क्या है और यह क्यों इतना कीमती समझा जाता है कि इसकी तुलना सोने से होती है? आखिर इस ब्लड ग्रुप वाले लोगों को क्या खतरा होता है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए पहले हमें पहले यह समझना होगा कि ब्लड ग्रुप का वर्गीकरण कैसे होता है।

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ऐसे तय होते हैं ब्लड ग्रुप

खून जिन लाल रक्त कोशिकाओं से बना होता है, उनके ऊपर प्रोटीन की एक परत होती है, जिन्हें एंटीजन कहा जाता है।ब्लड टाइप A में सिर्फ एंटीजन A होते हैं, ब्लड B में सिर्फ B, ब्लड AB में दोनों होते हैं और टाइप O में दोनों ही नहीं होते।लाल रक्त कोशिकाओं में एक और तरह का एंटीजन होता है।इसे कहते हैं RhD। यह एंटीजन 61 Rh टाइप के एंटीजनों के समूह का हिस्सा होता है। जब खून में Rhd हो तो इसे पॉजिटिव कहा जाता है और अगर न हो तो नेगेटिव टाइप कहा जाता है।इस तरह से सामान्य ब्लड ग्रुप्स की पहचान करके उनका वर्गीकरण इस तरह किया जाता है: A-, B +, B-, AB +, AB-, O + और O-।

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अगर किसी को खून चढ़ाने की जरूरत पड़े तो उसके ब्लड ग्रुप का पता होना जरूरी होता है।अगर नेगेटिव ग्रुप वाले शख़्स को पॉजिटिव वाले डोनर का खून चढ़ाया जाए तो यह उनके लिए जानलेवा हो सकता है।ऐसा इसलिए क्योंकि उसके शरीर के एंटीबॉडीज इस खून को अस्वीकार कर सकते हैं।इसी कारण O- ब्लड ग्रुप वालों को यूनिवर्सल डोनर कहा जाता है क्योंकि इसमें न तो एंटीजन A, B होते हैं और न ही RhD। ऐसे में खून बिना रिजेक्ट हुए अन्य ग्रुप वालों के खून में मिक्स हो जाता है।

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खतरनाक 'गोल्डन ब्लड'

इस तरह से खून के जितने भी कॉम्बिनेशन हैं, उनमें Rh null सबसे अलग है।अगर किसी के रेड ब्लड सेल में Rh एंटीजन है ही नहीं, तो उसका ब्लड टाइप Rh null होगा।बायोमेडिकल रिसर्च पोर्टल मोजेक पर छपे लेख में पेनी बेली ने लिखा है कि पहली बार इस ब्लड टाइप की पहचान 1961 में की गई थी।ऑस्ट्रेलियाई मूल निवासी महिला में यह मिला था।उसके बाद से लेकर अब तक पूरी दुनिया में इस तरह से 43 मामले ही सामने आए हैं।नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ कोलंबिया में हेमैटोलॉजी में विशेषज्ञ नतालिया विलारोया ने बीबीसी को बताया कि इस तरह का ब्लड अनुवांशिक रूप से मिलेगा।उन्होंने कहा, "माता-पिता दोनों इस म्यूटेशन के वाहक होने चाहिए।"

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Rh null ब्लड टाइप एक वरदान भी हो सकता है और अभिशाप भी।एक तरह से तो यह यूनिवर्सल ब्लड है जो किसी भी Rh टाइप वाले या बिना Rh वाले दुर्लभ ब्लड टाइप वाले को चढ़ाया जा सकता है। मगर ऐसा बहुत कम मामलों में ही किया जाता है क्योंकि इसे पाना लगभग असंभव है।नेशनल रेफरेंस लैबरेटरी के निदेशक डॉक्टर थिएरी पेरर्ड के हवाले से मोजेक पर लिखा गया है, "बेहद दुर्लभ होने के कारण ही इसे गोल्डन ब्लड कहा जाता है।"बेली के मुताबिक, इस टाइप का खून बेशकीमती होता है। भले ही इस खून को ब्लड बैंकों में बिना किसी नाम-पते के स्टोर किया जाता है, मगर ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें वैज्ञानिकों ने अपने शोध के लिए ब्लड सैंपल लेने के इरादे से रक्तदान करने वालों का पता लगाने की कोशिश की है।

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महंगा पड़ता है यह ब्लड ग्रुप होना

गोल्डन ब्लड ग्रुप होना कई बार लोगों को महंगा भी पड़ता है।यूएस रेयर डिजीज इन्फर्मेशन सेंटर के मुताबिक जिन लोगों का ब्लड टाइप Rh नल होता है, उन्हें हल्का अनीमिया हो सकता है।ऊपर से अगर उन्हें खून चढ़ाने की जरूरत हो तो उन्हें सिर्फ Rh null ब्लड ही चढ़ाया जा सकता है जिसे खोजना मुश्किल होता है। न सिर्फ इसलिए कि इस ब्लड टाइप वाले लोग बहुत कम हैं और अगर दूसरे देश में कोई डोनर मिल जाए तो खून को लाना पेचीदा काम बन जाता है।आरएच नल ब्लड टाइप वाले लोग ब्राजील, कोलंबिया, जापान, आयरलैंड और अमरीका में रहते हैं।इन्हें प्रोत्साहित किया जाता है कि वे खून को डोनेट करते रहें ताकि यह उनके लिए भी कभी रिजर्व के तौर पर काम आए। मगर चूंकि इस ब्लड वाले लोग बहुत कम हैं, इसलिए इनका खून अन्य जरूरतमंदों के काम भी आ जाता है।

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