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Alert: मेकअप करते रहने की आदत कहीं आपको कर न दे बीमार? अध्ययन में सामने आईं चौंकाने वाली जानकारियां

Fri, 25 Jul 2025 07:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • शोधकर्ताओं ने लगभग 40,000 लोगों पर अध्ययन करके ये समझने की कोशिश की कि मेकअप उत्पादों का सेहत पर किस प्रकार से असर होता है?
  • अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया कि नकली नाखून, क्यूटिकल क्रीम, ब्लश और लिपस्टिक का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में अस्थमा होने का खतरा 47 प्रतिशत ज्यादा होता है।
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मेकअप और इससे होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : Amarujala.com
सुंदर दिखने के लिए अगर आप भी खूब सारा मेकअप करती हैं, लिपस्टिक-ब्लश और फेक नेल्स लगाती हैं तो ये चीजें कहीं आपके लिए बड़ी समस्याओं का कारण न बन जाएं? हाल ही में सामने आई अध्ययन की एक रिपोर्ट में मेकअप के शौकीन लोगों को सावधान किया गया है।

ब्रिटेन में किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों की टीम ने बताया है कि नियमित रूप से मेकअप करने से वयस्कता में अस्थमा होने का खतरा बढ़ सकता है। शोध में लिपस्टिक, आईशैडो और मस्कारा जैसे उत्पादों का इस्तेमाल करने वालों में श्वसन से संबंधित क्रॉनिक समस्याओं के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। 

अस्थमा जैसी श्वसन समस्याएं अकेले यूके में 5.4 मिलियन (54 लाख से अधिक) लोगों को प्रभावित करती हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में भी दीर्घकालिक श्वसन रोगों का खतरा बढ़ता जा रहा है। साल 2023 में अनुमानित 55 मिलियन (5.5 करोड़) मामले क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और 35 मिलियन (3.5 करोड़) अस्थमा के रोगी सामने आए थे।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, श्वसन संबंधित इन रोगों को बढ़ाने के लिए कई कारक जैसे वायु प्रदूषण और अन्य पर्यावरणीय स्थितियां जिम्मेदार हो सकती हैं। इस अध्ययन में मेकअप उत्पादों को भी इसके लिए जिम्मेदार पाया गया है।
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अस्थमा-सांस की समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe Stock
मेकअप उत्पादों का सेहत पर असर

शोधकर्ताओं ने लगभग 40,000 लोगों पर अध्ययन करके ये समझने की कोशिश की कि मेकअप उत्पादों का सेहत पर किस प्रकार से असर होता है? अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया कि नकली नाखून, क्यूटिकल क्रीम, ब्लश और लिपस्टिक का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में अस्थमा होने का खतरा 47 प्रतिशत ज्यादा हो सकता है।

हफ्ते में पांच या उससे ज्यादा बार ब्लश और लिपस्टिक लगाने से यह खतरा 18 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इसलिए अगर आप भी खूब सारा मेकअप करने की शौकीन हैं तो इन जोखिमों के बारे में जरूर जानना चाहिए। 
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मेकअप उत्पादों में मौजूद रसायन हो सकते हैं खतरनाक - फोटो : Freepik
हानिकारक रसायन बढ़ा रहे हैं बीमारियों का खतरा

अमेरिका स्थित नेशनल हार्ट-लंग्स एंड ब्लड इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता कहते हैं, शोध से ये तो साफ नहीं है कि इन उत्पादों के कारण जोखिम बढ़ा है, लेकिन यह जरूर कहा जा सकता है कि मेकअप में मौजूद आम रसायन स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकते हैं।

कुछ उत्पादों में मौजूद रसायनों को प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर करने वाला पाया गया है, जबकि कुछ अन्य में मौजूद रसायन जैसे पॉलीफ्लोरोएल्काइल पदार्थ (जिन्हें पीएफए कहा जाता है), पैराबेन, फ्थैलेट्स और फिनॉल्स शरीर के हार्मोनल संतुलन को बाधित करने वाले हो सकते हैं। 

शोधकर्ताओं ने कहा, 'हमारे निष्कर्ष पर्सनल केयर के उत्पाद और उनमें मौजूद घटकों के दुष्प्रभावों पर फिर से विचार करने पर ध्यान आकृष्ट करते हैं।

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सांस- फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का जोखिम - फोटो : Freepik.com
बढ़ रही हैं अस्थमा, खांसी, घरघराहट जैसी दिक्कतें

ये रिपोर्ट एनवायरनमेंट इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित की गई है। इस अध्ययन में 41 विभिन्न प्रकार के सौंदर्य उत्पादों को लेकर 12 वर्षों में एकत्रित डेटा का उपयोग किया गया। शोध के अंत में, 1,774 महिलाओं (लगभग 4 प्रतिशत) में वयस्कों में होने वाले अस्थमा का निदान किया गया। प्रतिभागियों में खांसी, घरघराहट, सीने में जकड़न और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याएं देखी गई। 

शोधकर्ताओं ने कहा, व्यक्तिगत देखभाल वाले उत्पादों में मौजूद ईडीसी (एंडोक्राइन-डिस्रप्टिंग कैमिकल्स) अस्थमा के जोखिमों को बढ़ा सकते हैं। यदि हमारे निष्कर्षों की पुष्टि अलग-अलग ग्रुप के लोगों पर भी होती है तो ये भविष्य में अस्थमा के जोखिमों को कम करने का रास्ता खोलने में मददगार हो सकती है।

पर्सनल केयर उत्पादों में इस्तेमाल होने वाले रसायनों पर रोक लगाकर या उनमें जरूरी बदलाव करके हम बड़ी संख्या में लोगों को श्नसन समस्याओं से बचा सकते हैं।
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मेकअप उत्पादों का इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी - फोटो : freepik
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अस्थमा-लंग्स इंस्टीट्यूट यूके में अनुसंधान और नवाचार निदेशक डॉ. सामंथा वॉकर कहते हैं, 'हम जानते हैं कि महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अस्थमा ज्यादा होता है और उनके अस्पताल में भर्ती होने की आशंका भी अधिक होती है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा क्यों होता है? हमारा मानना है कि इसमें महिलाओं के शरीर में होने वाली हार्मोनल असंतुलन बड़ा कारण हो सकता है। मेकअप उत्पाद इस खतरे को और भी बढ़ाते जा रहे हैं। इस विषय को लेकर और अधिक शोध की आवश्यकता है ताकि हम समझ सकें कि महिलाओं को कैसे स्वस्थ रखा जाए?

पिछले अध्ययनों में पाया गया है कि गर्भावस्था के शुरुआती दौर में सौंदर्य उत्पादों में मौजूद रसायनों के संपर्क में आने से शिशुओं में बचपन में अस्थमा विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है। 


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स्रोत
Chemical exposures via personal care products and the disproportionate asthma burden among the US Black population


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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