धूप में निकलेंगे, तो काले हो जाएंगे। ज्यादा देर धूप में रहेंगे, तो टैनिंग की समस्या होगी। सौंदर्य के प्रति महिलाओं की इसी चिंता ने सेहत को ज्यादा प्रभावित किया है। जीवनशैली में बदलाव और खानपान को लेकर बरती जाने वाली लापरवाही के कारण लोगों में विटामिन डी की समस्या बढ़ रही है।
विटामिन डी की कमी धीरे-धीरे स्वास्थ्य और विकास के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। इसकी कमी से महिलाओं में ओस्टियोपोरोसिस (हड्डियों से संबंधित एक ऐसी बीमारी है, जिससे हडि्डयों में फ्रैक्चर का खतरा बढ़ जाता है।) की समस्या बढ़ती जा रही है। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में 70% और शहरी क्षेत्रों में 94% लोग विटामिन डी की कमी का सामना कर रहे हैं।
कई तरह की चिकित्सकीय जांच करने वाली एक डायग्नोस्टिक चेन एसआरएल ने देशभर की विभिन्न शाखाओं में जांच के लिए आए तीन लाख से अधिक नमूनों का विश्लेषण करके यह निष्कर्ष निकाला है कि भारत में लगभग 79 प्रतिशत से अधिक लोग विटामिन डी की समस्या से जूझ रहे हैं।
कंसल्टेंट ज्वाइंट रिप्लेसमेंट एंड स्पाइन सर्जन, डॉ. राघवेंद्र के एस बताते हैं कि दिनचर्या में शमिल आपकी कई ऐसी आदतें हैं, जो आपको इस बीमारी की ओर ले जाती है, जैसे धूप से परहेज, पोषक आहार की कमी आदि। महिलाओं में 45-50 वर्ष की उम्र में मेनोपॉज के तुरंत बाद कलाई के फ्रैक्चर का खतरा बढ़ता है, 60 साल तक जारी रहता है। जिन महिलाओं के शरीर में विटामिन डी की कमी होती है, वो उदास रहने के अलावा तनाव में भी रहती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि 50 साल से अधिक उम्र की हर तीन में से एक महिला को ओस्टियोपेरोसिस का खतरा रहता है। वजह है- महिलाओं में एस्ट्रोजन स्तर में बदलाव होना, शारीरिक श्रम की कमी और डाइट में कैल्शियम की कमी। इस वजह से उनकी हड्डियां कमजोर पड़ने लगती हैं।
महिलाओं में देखा गया है कि वे सूरज की रोशनी में बहुत कम रहती हैं आैर जब धूप में जाती भी हैं, तो उनके शरीर का अधिकांश हिस्सा ढका रहता है। इस कारण शरीर को जितना एक्सपोजर होना चाहिए, वह हो नहीं पाता। ऐसे में महिलाओं के पास विटामिन-डी की कमी को पूरा करने का सबसे बेहतर तरीका है कि वे पर्याप्त धूप लें, क्योंकि सप्लीमेंट से कुछ खास फायदा नहीं होता है।
चूंकि विटामिन डी की मदद से कैल्शियम को शरीर में बनाए रखने में मदद मिलती है, जो हड्डियों की मजबूती के लिए जरूरी है। इसके अभाव में हड्डियां कमजोर होती हैं और फ्रैक्चर की समस्या बढ़ जाती है। विटामिन डी कैंसर, क्षय रोग जैसे रोगों से भी बचाव करता है। ऐसे में महिलाओं को कैल्शियम से भरपूर हर तरह के आहार लेने चाहिए। अगर आप नॉनवेज खाती हैं, तो मछली विटामिन डी का अच्छा स्त्रोत है। अंडे की जर्दी में भी विटामिन डी पाया जाता है। सोया उत्पाद, मशरूम और मखाने का सेवन भी आपके लिए अच्छा रहेगा।
देश के विभिन्न शहरों में कराए एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि 90 फीसदी छात्र-छात्राएं विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं और ऐसे मामले लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं। जबकि देश के करीब-करीब हर हिस्से में विटामिन डी का प्राकृतिक स्रोत सूर्य की रोशनी सालों भर पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहती है। इसी को ध्यान में रखते हुए हाल ही में, खाद्य सुरक्षा नियामक एफएसएसएआई ने 'प्रोजेक्ट धूप' के नाम से एक अनोखी योजना शुरू की है, जिसके तहत स्कूलों को अपनी सुबह की प्रार्थना सभा दोपहर करने को प्रोत्साहित करना है, ताकि बच्चों को प्राकृतिक रूप से सूर्य की रोशनी में विटामिन डी मिल सके।
एक दिन में शरीर को जितना विटामिन डी चाहिए होता है, उसका लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा सूर्य के प्रकाश से मिलता है, जबकि केवल 10 प्रतिशत आहार के माध्यम से मिलता है। 11 बजे सुबह से एक बजे दोपहर तक की धूप मानव शरीर में विटामिन डी के स्तर को बढ़ाने में फायदेमंद है। इसलिए बच्चों को मजबूत हड्डियों और प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए धूप से परिचित कराना जरूरी है।