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सावधान: सामने आए ब्लैक फंगस के अति दुर्लभ मामले, इन अंगों को पहुंचा रहे हैं नुकसान

Sun, 23 May 2021 05:16 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्लैक फंगस के दुर्लभ मामलों की पुष्टि (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Social media
देश में कोरोना संक्रमण से मचे हाहाकार के बीच म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस) के मामले भी तेजी से बढ़ रहे हैं। देखते ही देखते इस फंगल संक्रमण ने महामारी का रूप ले लिया है। अब तक देश में करीब 9 हजार से ज्यादा लोग इस घातक संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। विशेषज्ञ मानते रहे हैं कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों के लिए यह बेहद खतरनाक है। सामान्य रूप से यह फंगस आंखों, मस्तिष्क या फेफड़ों को प्रभावित करता है। इस बीच राष्ट्रीय राजधानी में कुछ ऐसे मामले भी सामने आएं हैं जिसमें इस संक्रमण का असर छोटी आंत पर देखने को मिला है। ऐसे में यह सवाल खड़े हो गए है कि क्या ब्लैक फंगस शरीर के अन्य अंगों को भी नुकसान पहुंचा सकता है?
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इंटस्टाइनल ब्लैक फंगस के मामले सामने आए - फोटो : pixabay
इंटस्टाइनल ब्लैक फंगस
राजधानी दिल्ली स्थित सर गंगाराम हॉस्पिटल में ऐसे दो मरीजों के मामले सामने आए हैं जिनमें इंटस्टाइनल ब्लैक फंगस की पुष्टि हुई है। आश्चर्यजनक बात यह है कि इसमें से एक रोगी को पहले स्टेरॉयड नहीं दिया गया था। विशेषज्ञ कोविड के दौरान स्टेरॉयड के इस्तेमाल को ब्लैक फंगस के प्रमुख कारणों में से एक मानते हैं।


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शरीर के विभिन्न अंगों को क्षति पहुंचा सकता है संक्रमण - फोटो : Social media
कई अंगों के लिए खतरनाक है ब्लैक फंगस संक्रमण
अमर उजाला से बातचीत के दौरान छाती रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ चौधरी बताते हैं कि म्यूकोरमाइकोसिस शरीर के विभिन्न अंगों को क्षति पहुंचा सकता है। सामान्य तौर पर यह दो प्रकार को होता है। पहला, राइनो ऑर्बिटल सेरेब्रल म्यूकोरमाइकोसिस जो नाक, आंख, मुंह और मस्तिष्क को प्रभावित करता है, जबकि दूसरा पल्मोनरी म्यूकोरमाइकोसिस जो श्वसन प्रणाली को प्रभावित करता है। यह फंगस जठरांत्र मार्ग, आंत, त्वचा और अन्य अंगों को भी संक्रमित कर सकता है, लेकिन ऐसे मामले दुर्लभ होते हैं।

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छोटी आंत में संक्रमण का पता चला - फोटो : iStock
क्या लक्षण देखे गए
डॉक्टरों के मुताबिक दोनों रोगियों को पेट में हल्का दर्द था। सीटी स्कैन में छोटी आंत में एक छिद्र का पता भी चला है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अस्पताल के अधिकारियों ने बताया है कि दोनों मरीजों की उम्र 50 वर्ष से अधिक है। इसमें से 69 वर्षीय व्यक्ति को कोविड के इलाज के समय स्टेरॉयड दिया गया था, जबकि दूसरे को इसकी आवश्यकता नहीं पड़ी थी।
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अंग प्रत्यारोपण वाले रोगियों को खतरा अधिक - फोटो : social media
अस्पताल द्वारा जारी बयान के मुताबिक दोनों रोगियों की प्रतिरक्षा-क्षमता कमजोर पाई गई है। आमतौर पर अंग प्रत्यारोपण वाले रोगियों में इंटस्टाइनल ब्लैक फंगस के मामले हो सकते हैं। सर गंगा राम अस्पताल में इस तरह के मामले वाले रोगियों में कोविड के साथ इंटस्टाइनल ब्लैक फंगस संक्रमण की पुष्टि हुई है। 

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नोट: यह लेख मीडिया रिपोर्टस और छाती रोग विशेषज्ञ डॉ सौरभ चौधरी के सुझावों के आधार पर तैयार किय गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें तथा किसी भी दवा का सेवन बिना डॉक्टरी सलाह के न करें।
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