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Antibiotic Resistance: एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर पीएम मोदी ने चेताया, जानिए इसपर क्या कहते हैं डॉक्टर्स?

Mon, 29 Dec 2025 07:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 'मन की बात' के इस साल के आखिरी अंक में पीएम मोदी ने एंटीबायोटिक्स के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल, जीवन बचाने वाली इन दवाओं को बेअसर और खतरनाक बना रहा है। 
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा - फोटो : amarujala.com
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समय-समय पर सेहत में सुधार को लेकर लोगों को जागरूक करते रहे हैं। बढ़ते मोटापे की समस्या से निपटने के लिए खाने के तेल में कटौती की बात हो या फिट इंडिया मूवमेंट, स्वास्थ्य सुधार उनके विकसित भारत मिशन का महत्वपूर्ण पहलू है।

इसी क्रम में रविवार (28 जनवरी) को अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के इस साल के आखिरी अंक में उन्होंने एंटीबायोटिक्स दवाओं के गलत इस्तेमाल पर चिंता जताई। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना डॉक्टरी सलाह के इनका इस्तेमाल, जीवन बचाने वाली एंटीबायोटिक दवाओं को बेअसर और खतरनाक बना रहा है। खासकर निमोनिया और यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन जैसी बीमारियों में इसका जिस तरह से बिना डॉक्टरी सलाह के इस्तेमाल हो रहा है, वह काफी चिंताजनक है।
 

मोदी ने कहा कि दवाओं के लिए सही गाइडेंस की जरूरत होती है और एंटीबायोटिक्स हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही लेनी चाहिए। इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल एक गंभीर स्वास्थ्य संबंधित खतरा बनता जा रहा है।
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पीएम मोदी ने एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को लेकर किया अलर्ट - फोटो : पीएमओ
डॉक्टर्स की टीम ने इस पहल की सराहना की
 
पीएम मोदी द्वारा एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर आईसीएमआर की रिपोर्ट का जिक्र करने की डॉक्टर्स की टीम ने सराहना की है।

इंस्टिट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलिअरी साइंसेज (आईएलबीएस) के डायरेक्टर शिव कुमार सरीन ने कहा, प्रधानमंत्री ने देश के नागरिकों से अपील की है कि वे एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल सोच-समझकर और मेडिकल स्पेशलिस्ट की सलाह पर ही करें। मैं लोगों, डॉक्टरों और फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री की सोच को जगाने के लिए उनका धन्यवाद करता हूं।
 

भारत दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स का सबसे बड़ा उपयोगकर्ता है और अस्पतालों में लगभग 4 में से 3 संक्रमण के मामले एंटीबायोटिक्स के प्रति रेजिस्टेंट हो सकते हैं। यानी कि ऐसे मामलों पर दवाओं का असर नहीं होता है। मैं पीएम की अपील का समर्थन करता हूं, एंटीबायोटिक्स कोई रूटीन दवा नहीं हैं। इसका इस्तेमाल हमेशा विशेषज्ञों की सलाह पर ही करना चाहिए।
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एम्स के डायरेक्टर, एम श्रीनिवास - फोटो : ANI
क्या कहते हैं एम्स दिल्ली के डायरेक्टर?

पीएम मोदी की अपील की सराहना करते हुए एम्स दिल्ली के निदेशक डॉ. एम. श्रीनिवास ने कहा, एंटीबायोटिक दवाएं बिना सोचे-समझे नहीं ली जानी चाहिए। एम्स की बात करें तो हमने इसमें लीडरशिप रोल लिया है और हमारे पास डिपार्टमेंट-वाइज प्रोटोकॉल, एसओपीएस और हॉस्पिटल इन्फेक्शन कंट्रोल सिस्टम हैं। एंटीबायोटिक्स सिर्फ डॉक्टरों की सलाह पर ही लेनी चाहिए।

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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Freepik.com
एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस क्या है?

एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस तब होता है जब बैक्टीरिया या कवक जैसे रोगाणुओं को मारने के लिए बनाई गई दवाओं (एंटीबायोटिक्स) के प्रति ये रोगाणु बचाव की क्षमता विकसित कर लेते हैं।

एंटीबायोटिक दवाएं मुख्यरूप से संक्रमण की स्थिति में रोगजनकों को खत्म करने के लिए दी जाती हैं, पर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की स्थिति में ये दवाएं काम करना ही बंद कर देती हैं। इस स्थिति में दवा लेने पर भी रोगाणु मरते नहीं बल्कि और बढ़ते रहते हैं। प्रतिरोधी संक्रमणों का इलाज करना कठिन और असंभव भी हो सकता है।
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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के मामले - फोटो : Freepik.com
हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण  एंटीबायोटिक रेजिस्टेंट

डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक साल 2023 में दुनिया भर में देखा गया हर छह में से एक बैक्टीरियल संक्रमण एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधी था। डब्ल्यूएचओ ने बताया, मूत्र मार्ग और रक्तप्रवाह में संक्रमण पैदा करने वाले जीवाणुओं में एंटीबायोटिक प्रतिरोध सबसे अधिक देखा गया है जबकि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल और यूरो-जेनिटल गोनोरिया इंफेक्शन पैदा करने वाले जीवाणुओं में प्रतिरोध दर कम देखी गई। विशेषज्ञों ने सावधान किया है कि अगर अभी भी सख्त कदम न उठाए गए तो आने वाले वर्षों में ये समस्या गंभीर रूप ले सकती है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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