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Heart Disease: दिल की बीमारियों के बढ़ते मामलों को लेकर बड़ा खुलासा, शहरी आबादी में ये आदत पाई गई खतरनाक

Tue, 14 Jul 2026 06:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शोधकर्ताओं का मानना है कि कुछ प्रिजरवेटिव्ज शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं और मेटाबॉलिज्म प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। 
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दिल की बीमारियों का बढ़ता जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल की बीमारियों का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ते हुए देखा जा रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों का खान-पान गड़बड़ होता जा रहा है, शारीरिक मेहनत कम हो गई है, इन स्थितियों ने दिल की बीमारियों का जोखिम काफी बढ़ा दिया है। हम जो कुछ भी खाते-पीते हैं उसका भी हमारे दिल पर असर होता है। यही कारण है कि विशेषज्ञ सभी लोगों  को खाने-पीने वाली चीजों का सावधानी से चयन करने की सलाह देते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अलर्ट किया है कि डिब्बा बंद खाने को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए उसमें मिलाए जाने वाले प्रिजरवेटिव्ज दिल को खोखला कर रहे हैं। खाद्य पदार्थों के साथ इन प्रिजरवेटिव्स का अधिक सेवन उच्च रक्तचाप और हृदय रोगों के लिए बड़ा खतरा है।

यह खुलासा फ्रांस में 1.12 लाख लोगों पर किए गए अध्ययन में किया गया है। गौरतलब है कि भारत में विशेषतौर पर शहरी आबादी में  डिब्बा बंद खाने का चलन, गांवों की तुलना में कहीं अधिक है।
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
प्रिजरवेटिव्ज से दिल को खतरा

शोधकर्ताओं ने यह विश्लेषण किया कि प्रतिभागी किन खाद्य पदार्थों का सेवन कर रहे हैं और उनमें कौन-कौन से प्रिजरवेटिव्ज मौजूद हैं। इसके बाद करीब सात से आठ वर्षों तक प्रतिभागियों के स्वास्थ्य पर नजर रखी गई।  इस दौरान यह दर्ज किया गया कि किन लोगों में उच्च रक्तचाप, हार्ट अटैक, स्ट्रोक या एंजाइना जैसी हृदय संबंधी समस्याएं विकसित हुईं। 
 
  • यूरोपियन हार्ट जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार लगभग सभी प्रतिभागी किसी न किसी प्रकार के खाद्य प्रिजरवेटिव्स के संपर्क में थे।
  • अध्ययन के शुरुआती दो वर्षों के दौरान करीब 99 प्रतिशत प्रतिभागियों ने ऐसे प्रिजरवेटिव्ज वाले खाद्य पदार्थों का सेवन किया था। 
  • जिन लोगों ने कुछ विशेष प्रिजरवेटिव्ज का सबसे अधिक सेवन किया, उनमें उच्च रक्तचाप होने का खतरा लगभग 29 प्रतिशत अधिक था। 
  • वहीं हृदय रोगों का खतरा भी करीब 16 प्रतिशत तक बढ़ा हुआ पाया गया। 

विश्लेषण में सोडियम नाइट्राइट, पोटैशियम सोर्बेट और कुछ सल्फाइट यौगिकों को विशेष रूप से अधिक जोखिम से जुड़ा पाया गया। इसके अलावा एंटीऑक्सिडे श्रेणी के कुछ प्रिजरवेटिव्ज अधिक सेवन और रक्तचाप बढ़ने बीच भी संबंध देखा गया।
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डिब्बाबंद चीजों का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
मेटाबॉलिज्म हो सकती है प्रभावित 

शोधकर्ताओं के अनुसार यह अध्ययन इस विषय को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रारंभिक कदम है। उनका कहना है कि अभी और प्रयोगात्मक अनुसंधान की आवश्यकता है, क्योंकि यह अध्ययन अवलोकन आधारित है और इससे प्रत्यक्ष कारण- परिणाम संबंध स्थापित नहीं किया जा सकता।
 
  • शोधकर्ताओं का मानना है कि कुछ प्रिजरवेटिव्ज शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं और मेटाबॉलिज्म प्रणाली को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे लंबे समय में हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
  • विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि इस तरह के अवलोकन आधारित अध्ययन किसी बीमारी का प्रत्यक्ष कारण सिद्ध नहीं करते।
  • जो लोग अधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ खाते हैं, उनकी जीवनशैली भी कई मामलों में अलग हो सकती है।
  • कम शारीरिक गतिविधि, अधिक नमक और वसा का सेवन तथा अन्य स्वास्थ्य संबंधी आदतें भी हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित कर सकती हैं।

अध्ययन के निष्कर्ष यह संकेत देते हैं कि अत्यधिक प्रोसेस्ड और पैकेज्ड खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन हृदय स्वास्थ्य के लिए अनुकूल नहीं हो सकता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सामान्य तौर पर ताजा, कम प्रोसेस्ड और घर में तैयार भोजन को प्राथमिकता देने की सलाह देते हैं।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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