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सेहत की बात: इन संकेतों पर ध्यान दिया तो कभी नहीं होगी डायबिटीज! जानिए प्री-डायबिटीज को कैसे करें रिवर्स

Wed, 14 Oct 2026 02:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Prediabetes Symptoms: प्री-डायबिटीज को नजरअंदाज करना भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ा सकता है। हालांकि, समय पर जांच, संतुलित खानपान, नियमित व्यायाम और वजन पर नियंत्रण से इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। इसलिए जोखिम होने पर ब्लड शुगर की जांच कराएं और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी कदम उठाएं।

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प्री-डायबिटीज के लक्षण, कारण और निवारण - फोटो : AI

Early signs of Prediabetes: आजकल बदलती जीवनशैली, गलत खानपान और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण डायबिटीज का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक बार डायबिटीज शुरू हो जाने के बाद इसे फिर से ठीक कर पाना बहुत मुश्किल होता है। लाइफस्टाइल-खानपान और दवाओं के माध्यम से इसे बस कंट्रोल रखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र में ही अगर आप इस समस्या पर ध्यान दे लें, समय रहते जांच करा लें तो जोखिमों को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है। विशेषतौर पर प्री-डायबिटीज की स्थिति में ही अगर सावधान हो जाए तो इस बीमारी को शुरू होने से पहले ही कंट्रोल किया जा सकता है।

प्री-डायबिटीज की स्थिति में शरीर में ब्लड शुगर यानी खून में ग्लूकोज का स्तर सामान्य से अधिक हो जाता है, लेकिन यह डायबिटीज की सीमा तक नहीं पहुंचता। इसे भविष्य में टाइप-2 डायबिटीज होने का एक चेतावनी संकेत माना जाता है।
 
डॉक्टर कहते हैं, टेस्ट रिपोर्ट में प्री-डायबिटीज आने का मतलब सिर्फ खतरे की घंटी नहीं है बल्कि ये शरीर का ऐसा संकेत है जो हमें समय रहते संभलने का मौका देता है। समय रहते सही खानपान और जीवनशैली में बदलाव करके ब्लड शुगर को सामान्य स्तर तक लाने और डायबिटीज के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है।

आइए जानते हैं कि प्री-डायबिटीज के शुरुआती लक्षण और कौन से उपाय अपनाकर डायबिटीज की चपेट में आने से बच सकते हैं?

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symptoms of diabetes - फोटो : अमर उजाला

प्रीडायबिटीज के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

प्रीडायबिटीज की सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ज्यादातर लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य महसूस करता है, लेकिन उसके शरीर में ब्लड शुगर का स्तर बढ़ा हुआ हो सकता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर इसका पता लगाना मुश्किल है।

कुछ लोगों में गर्दन, बगल या शरीर की अन्य जगहों की त्वचा का रंग गहरा और त्वचा मोटी होने लगती है। यह इंसुलिन रेजिस्टेंस का संकेत हो सकता है। इंसुलिन रेजिस्टेंस में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करतीं, जिससे खून में शुगर बढ़ सकती है।

इसके अलावा, वजन बढ़ना और पेट के आसपास ज्यादा चर्बी जमा होना भी जोखिम बढ़ा सकता है। बार-बार प्यास लगना, ज्यादा पेशाब आना और थकान महसूस होना बढ़े हुए ब्लड शुगर के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

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डायबिटीज - फोटो : Freepik.com

प्री-डायबिटीज की पहचान कैसे होती है?

प्री-डायबिटीज का पता लगाने के लिए ब्लड टेस्ट सबसे भरोसेमंद तरीका है। इसके लिए मुख्य रूप से तीन तरह की जांच की जाती हैं,

  • HbA1c टेस्ट: इसका स्तर 5.7 से 6.4 प्रतिशत होने पर प्रीडायबिटीज मानी जाती है। यह पिछले लगभग दो से तीन महीनों के औसत ब्लड शुगर का अंदाजा देता है।
  • फास्टिंग ब्लड शुगर: खाली पेट ब्लड शुगर 100 से 125 mg/dL होने पर यह प्रीडायबिटीज की श्रेणी में आता है।
  • ग्लूकोज टॉलरेंस टेस्ट: ग्लूकोज पीने के दो घंटे बाद ब्लड शुगर 140 से 199 mg/dL होने पर प्रीडायबिटीज मानी जाती है।


कौन-सा टेस्ट कराना है, इसका फैसला डॉक्टर आपकी स्थिति के अनुसार कर सकते हैं।

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प्रीडायबिटीज - फोटो : Amar Ujala

क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

हार्वर्ड और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी से प्रशिक्षण प्राप्त गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉक्टर सौरभ सेठी बताते हैं, प्री-डायबिटीज को वापस सामान्य स्थिति में लाया जा सकता है, खासकर अगर समय रहते सही कदम उठाए जाएं। सही जीवनशैली अपनाने से प्री-डायबिटीज को रिवर्स करने में 70-80% मदद मिल सकती है।

अगर इस दौरान जीवनशैली में आप कोई सुधार नहीं करते या प्री-डायबिटीज पर ध्यान नहीं देते तो पैंक्रियाज की वे कोशिकाएं जो इंसुलिन बनाती हैं, हर साल अपनी कार्यक्षमता का लगभग 4-5 प्रतिशत खोती जाती हैं। 
 

  • डॉ. सेठी एक आम गलतफहमी भी दूर करते हैं। उनका कहना है कि बीटा सेल्स हमेशा पूरी तरह खत्म नहीं हो जातीं। 
  • कई मामलों में वे सिर्फ लगातार ज्यादा काम करने की वजह से थकी हुई होती हैं। 
  • सही खान-पान और जीवनशैली की आदतों से इन कोशिकाओं की कार्यक्षमता में फिर सुधार हो सकता है।


डॉ. सेठी कहते हैं, अध्ययन में पाया गया कि प्री-डायबिटीज के दौरान जिन लोगों ने अपने शरीर का 10-15 प्रतिशत वजन कम किया, उनमें से 86 प्रतिशत तक लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा कम हो गया।  डॉ कहते हैं, वेट लॉस के साथ जब शरीर के अंदर, खासकर लिवर और पैंक्रियाज के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कम होती है, तो इंसुलिन के प्रति शरीर की संवेदनशीलता बेहतर हो सकती है।

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weight loss diet - फोटो : AI

प्रीडायबिटीज को सामान्य कैसे करें?

सही जीवनशैली अपनाकर ब्लड शुगर को सामान्य स्तर तक लाना संभव है। इसके लिए रोजमर्रा की आदतों में कुछ जरूरी बदलाव करना चाहिए।


1. खानपान में सुधार करें


खाने में हरी सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, फल और फाइबर से भरपूर चीजें शामिल करें। मीठे पेय, मिठाइयां और ज्यादा चीनी वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।


2. नियमित व्यायाम करें


सप्ताह में कम से कम 150 मिनट तेज चाल से चलने या दूसरी मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखें। शुरुआत धीरे-धीरे करें और अपनी क्षमता के अनुसार गतिविधि बढ़ाएं।


3. वजन नियंत्रित रखें


अगर वजन अधिक है, तो धीरे-धीरे वजन कम करने से इंसुलिन के काम करने की क्षमता बेहतर हो सकती है।


4. नींद और तनाव का ध्यान रखें


रोज पर्याप्त नींद लें और तनाव कम करने के लिए योग, ध्यान या अन्य आरामदायक गतिविधियां अपनाएं।

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अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

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