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Alert: आलू नुकसानदायक नहीं, इसे खाने का तरीका है समस्या का कारण; शोधकर्ताओं ने खोला अब तक का सबसे बड़ा राज

Fri, 05 Jun 2026 07:59 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि ज्यादा आलू खाना सेहत के लिए नुकसानदायक तो है ही, पर अगर आप आलू को डीप फ्राई करके खाते हैं तो आपके लिए दिक्कतें और भी बढ़ सकती हैं। कैसे आइए जान लेते हैं।
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खान-पान में गड़बड़ी - फोटो : Amarujala.com/AI
गरम-गरम पकौड़े हों या फ्रेंच फ्राइज, समोसे हों या पूरी-कचौड़ी, ये किसे पसंद नहीं आएगा? लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही स्वाद धीरे-धीरे शरीर के अंदर एक खामोश खतरा पैदा कर सकता है। डीप फ्राई वाली चीजों को पहले से ही सेहत के लिए कई तरह से हानिकारक बताया जाता रहा है। ये हाई कैलोरी वाले होते हैं जिससे वजन बढ़ने और हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्याओं का खतरा हो सकता है। 

डीप फ्राई चीजों के साथ शरीर में भारी मात्रा में ट्रांस फैट भी पहुंच रहा होता है जिससे दिल की सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ जाती हैं। पर क्या आप जानते हैं कि जो लोग अक्सर डीप फ्राई चीजें खाते हैं उनमें टाइप-2 डाइबिटीज होने का खतरा भी काफी ज्यादा हो सकता है? अगर आप भी ऐसी चीजें ज्यादा खाते हैं तो आज से ही सावधान हो जाइए, ये एक आदत शरीर को कई बीमारियों का घर बना सकती है।

डीप फ्राई चीजों और डायबिटीज का क्या लिंक है? आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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फ्रेंच फ्राइज से होने वाले खतरे - फोटो : Freepik.com
आलू तो नुकसानदायक, डीप फ्राई करके खाना ज्यादा खतरनाक

बीएमजे जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम ने बताया कि ज्यादा आलू खाना सेहत के लिए नुकसानदायक तो है ही, पर अगर आप आलू को डीप फ्राई करके खाते हैं तो आपके लिए दिक्कतें और भी बढ़ सकती हैं। असली समस्या आलू नहीं, बल्कि उसे बनाने का तरीका है खासकर डीप फ्राई करना है।
 
  • करीब 37 साल (1984 से 2021) तक इस शोध के लिए 2.05 लाख से ज्यादा लोगों को ट्रैक किया गया।
  •  इन लोगों की सेहत शुरू में अच्छी थी और उन्हें पहले से डायबिटीज, दिल की बीमारी या कैंसर नहीं था। हर चार साल में उनसे उनके खाने-पीने की आदतों पर विस्तृत जानकारी ली जाती थी।
  • लंबे समय के फॉलो-अप में कुल 22,299 लोगों में टाइप-2 डायबिटीज पाई गई।
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टाइप-2 डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe Stock
डीप फ्राई चीजें सेहत के लिए नुकसानदायक

शोधकर्ताओं ने आलू खाने के सेहत पर असर को लेकर जब जानने की कोशिश की तो पता चला कि हफ्ते में तीन बार आलू खाने से डायबिटीज का खतरा लगभग 5% तक थोड़ा बढ़ जाता है। हालांकि जब आलू को पकाने के तरीके के आधार पर अलग-अलग देखा गया, तो तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
 
  • डीप फ्राई आलू या फ्रेंच फ्राइज को हफ्ते में तीन बार खाने से टाइप-2 डायबिटीज का खतरा करीब 20% तक बढ़ गया।
  • हालांकि उबले, बेक किए हुए या मैश किए हुए आलू को भले ही हफ्ते में तीन बार भी खाया गया पर इससे डायबिटीज के खतरे में कोई खास बढ़ोतरी नहीं देखी गई।

इस अंतर से साफ होता है कि आलू तब जाता नुकसानदायक हो जाता है जब इसे डीप फ्राई करके खाया जाए। तेल में तलने सेउसमें कैलोरी बढ़ जाती है और उसकी रासायनिक संरचना भी बदल जाती है, जिससे इंसुलिन रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है।

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खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
दूसरे कार्बोहाइड्रेट्स का क्या असर होता है?

शोध में यह भी देखा गया कि अगर आलू की जगह दूसरे कार्बोहाइड्रेट्स लिए जाएं तो क्या असर पड़ता है।
 
  • अगर हफ्ते में तीन बार आलू की जगह साबुत अनाज खाए जाएं, तो टाइप-2 डायबिटीज का खतरा लगभग 8% तक कम हो सकता है।
  • लेकिन अगर उबले या बेक किए आलू की जगह सफेद चावल खाया जाए, तो उल्टा असर होता है और डायबिटीज का खतरा बढ़ सकता है।
  • इससे यह साफ होता है कि केवल तले हुए खाने से बचना ही जरूरी नहीं है, बल्कि उसकी जगह क्या खाया जा रहा है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
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डीप फ्राइड फूड्स खाने से बचें - फोटो : Freepik.com
तो क्या आलू खाना बिल्कुल बंद कर दें? 

आहार विशेषज्ञ कहते हैं, ऐसा नहीं है कि आपको आलू खाना बंद कर देना चाहिए। बस कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।
 
  • फ्रेंच फ्राइज, आलू के चिप्स और ज्यादा तली चीजें खाना कम कर दें।
  • घर पर आलू बनाते समय उसे छिलके के साथ उबालना या बेक करना बेहतर विकल्प है, क्योंकि इससे फाइबर बचा रहता है। 
  • बहुत कम तेल का इस्तेमाल करें या एयर फ्रायर का उपयोग करें।
  • अपने भोजन में साबुत अनाज जैसे ओट्स, क्विनोआ, ब्राउन राइस और मिलेट्स को शामिल करें, ताकि शरीर में शुगर का असर धीरे-धीरे हो।


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स्रोत:
Vitamin B-12 and the Gastrointestinal Microbiome: A Systematic Review


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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