Polycystic Ovary Syndrome: आज की तेज रफ्तार और तनावपूर्ण जीवनशैली में महिलाओं की सेहत से संबंधित कई समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) भी ऐसी ही एक समस्या है। भारत में हर 5 में से 1 महिला इस स्थिति से जूझ रही है, और ये आंकड़े लगातार बढ़ते जा रहे हैं।
पीसीओएस केवल एक हार्मोनल असंतुलन नहीं, बल्कि एक लाइफस्टाइल की भी दिक्कत है जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता, मानसिक स्वास्थ्य, और समग्र जीवनशैली को गहराई से प्रभावित कर सकता है।
प्रसव उम्र की महिलाओं में हार्मोनल बदलाव के कारण पीसीओएस और इससे संबंधित अन्य जटिलताओं का खतरा रहता है। इस समस्या में शरीर में एण्ड्रोजन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, अंडाशय पर कई छोटे सिस्ट हो सकते हैं। पीसीओएस के कारण मासिक धर्म के रुकने या अनियमित होने, बालों के अधिक विकास, मुंहासे, बांझपन और वजन बढ़ने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।