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कोरोना वायरस को कमजोर करती है ये वैक्सीन, कम होता है मौत का खतरा: शोध

Sun, 14 Jun 2020 04:55 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Vaccine For Coronavirus (File)
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच दुनियाभर के वैज्ञानिक इसकी वैक्सीन तैयार करने में जुटे हैं। भारत, अमेरिका, ब्रिटेन समेत कई देश वैक्सीन बनाने की रेस में आगे चल रहे हैं। कई तरह के ट्रायल के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। लेकिन जबतक वैक्सीन या कोई निश्चित दवा तैयार नहीं हो जाती, तबतक पहले से ही मौजूद दवाओं के जरिए कोरोना के लक्षणों का इलाज किया जा रहा है। हाल ही में हुए एक शोध अध्ययन में कहा जा रहा है कि पोलियो की वैक्सीन कोरोना वायरस के संक्रमण से बचा सकती है। आइए जानते हैं, इस अध्ययन में ऐसा क्यों कहा जा रहा है और कोरोना से बचाने में पोलियो की वैक्सीन कैसे कारगर साबित हो सकती है:
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polio vaccine
  • मेडिकल जर्नल साइंस में प्रकाशित शोध अध्ययन के मुताबिक, ओरल पोलियो वैक्सीन (OPV) कोरोना वायरस को कमजोर करती है। इसके साथ ही यह ओपीवी कोरोना के मरीजों से दूसरों में संक्रमण फैलने का खतरा भी कम करती है। वैक्सीन में मौजूद इंटरफेरान के कारण यह कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाती है और शरीर की इम्यूनिटी भी बढ़ाती है। शोध के दौरान इस बात के प्रमाण मिले हैं। 
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Coronavirus Update - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
तीन गुना कम करती है मौत का खतरा 
  • रिसर्च में यह देखा गया कि क्या पहले से तैयार एक वायरस की वैक्सीन का असर दूसरे वायरस पर भी होता है। शोध के दौरान जब ओरल पोलियो वैक्सीन दी गई तो सामने आया कि यह इंफ्लूएंजा वायरस से होने वाली मौत का खतरा तीन गुना तक कम करती है। 

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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
एचआईवी के वायरस की खोज करने वाले विशेषज्ञ टीम में शामिल
  • कोरोना संक्रमण रोकने के लिए पोलियो वैक्सीन पर कई वायरोलॉजिस्ट यानी विषाणु विशेषज्ञ शोध कर रहे हैं। इस अमेरिकी टीम में शामिल डॉ. रॉबर्ट गैलो भी शामिल हैं, जिन्होंने एचआईवी वायरस की खोज की थी। इन दिनों वैज्ञानिक डॉ. रॉबर्ट का फोकस पोलियो वैक्सीन पर है। 
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Oral Polio Vaccine - फोटो : अमर उजाला
1961 में बनी थी वैक्सीन
  • रूसी वैज्ञानिक डॉ. अल्बर्ट सेबिन ने साल 1961 में ओरल पोलियो वैक्सीन का आविष्कार किया था। पोलियो वैक्सीन में विशेष प्रकिया द्वारा निष्क्रिय किए गए पोलियो के जिंदा वायरस होते हैं। इसमें पोलियो की बीमारी पैदा करने की वायरस की क्षमता खत्म कर दी जाती है और पोलियो के खिलाफ इंसानी शरीर इम्यून हो जाता है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
कारगर और असरदार
  • अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कार्यकारी शोध निदेशक और वायरस विशेषज्ञ डॉ. कॉन्सटेन्टिन चुमाकोव का कहना है कि ओरल पोलियो वैक्सीन ऐसी वैक्सीन है, जो शरीर में पहुंचने वाली बाहरी चीजों से तब तक लड़ती है, जब तक इंसानी शरीर का इम्यून सिस्टम उस बाहरी चीज के खिलाफ एंटीबॉडी विकसित न कर ले। 
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Research - फोटो : Pixabay
1960 में हुए शोध का हवाला
  • फिलहाल तीन तरह की ओरल पोलियो वायरस वैक्सीन हैं जो इम्यूनिटी बढ़ाने में कारगर है। साल 1960 में हुए शोध का हवाला देते हुए डॉ. कॉन्सटेन्टिन ने बताया कि रूस में तीन साल का ट्रायल चला था, जिसमें उनकी मां भी एक शोधकर्ता के तौर पर शामिल थीं। डॉ. कॉन्सटेन्टिन का कहना है कि पोलियो की वैक्सीन कोरोना से बचाने का स्थाई इलाज नहीं है। 

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Research - फोटो : Pixabay
अस्थाई तौर पर बचाव 
  • डॉ. कॉन्सटेन्टिन का कहना है कि अस्थायी तौर पर इम्यूनिटी बढ़ाकर वायरस से लड़ने का बेहतर तरीका है। हालांकि उनका कहना है कि पोलियो की वैक्सीन पूरी तरह से सुरक्षा नहीं दे सकती, क्योंकि यह कोरोना वायरस के लिए नहीं बनाई गई थी। इसके बावजूद  यह अस्थाई तौर पर बचाव तो कर ही सकती है। 

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कोरोना के मरीज - फोटो : PTI
  • मेडिकल जर्नल साइंस में प्रकाशित इस अध्ययन में ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) के बारे में बात की गई है। शोध के मुताबिक, साक्ष्यों से पता चला है कि जीवित क्षीण टीके भी इंटरफेरॉन और अन्य जन्मजात प्रतिरक्षा तंत्रों को प्रेरित करके ऐसे रोगजनकों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा प्रदान कर सकते हैं। 

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कोरोना वायरस की जांच - फोटो : PTI
  • शोधकर्ताओं के मुताबिक, ओपीवी यानी ओरल पोलियो वैक्सीन, कोरोना वायरस के खिलाफ अस्थाई सुरक्षा प्रदान कर सकता है। इस शोध में संक्रमण से लड़ने में तपेदिक और काली खांसी के खिलाफ कुछ टीकों की प्रभावकारिता को भी इंगित किया गया है। 

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Coronavirus - फोटो : Pexels
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि एटिट्यूड बैक्टीरियल वैक्सीन जैसे कि तपेदिक के खिलाफ बीसीजी, काली खांसी के खिलाफ लाइव अटेक्सिन वैक्सीन आदि संक्रमण से बचाव करने में कारगर हो सकते हैं। 
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नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
  • रिसर्च बताते हैं कि कोरोना शरीर की इम्यूनिटी कमजोर करता है। इसलिए तीव्र श्वसन सिंड्रोम कोरोना वायरस में ओपीवी जैसे टीके के प्रयोग से जन्मजात प्रतिरक्षा सिस्टम को बढ़ाया जा सकता है और इंसानी शरीर को संक्रमण से बचाया जा सकता है। शोध में कहा गया है कि यदि ओरल पोलियो वैक्सीन के साथ रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल के नतीजे पॉजिटिव आते हैं तो इसका इस्तेमाल बड़ी आबादी को बचाने में किया जा सकता है। 
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