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दावा: इस वैक्सीन की तीसरी खुराक से 10 गुना बढ़ जाएगी कोरोना के खिलाफ एंटीबॉडी, डेल्टा वैरिएंट से भी मिलेगी सुरक्षा

Fri, 09 Jul 2021 02:30 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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कोरोना वैक्सीन - फोटो : iStock
पिछले डेढ़ साल से कोरोना महामारी ने दुनियाभर के लोगों को परेशान करके रखा हुआ है। इसके नए-नए वैरिएंट्स के आने से तो चिंताएं और भी बढ़ गई हैं। हालांकि इस वायरस के खिलाफ टीकाकरण अभियान तो तेजी से चल रहे हैं, लेकिन कई विशेषज्ञों द्वारा ऐसा भी दावा किया जा रहा है कि वायरस के बदलते स्वरूप पर वैक्सीन की दो खुराक प्रभावी नहीं हैं। ऐसे में अमेरिकी वैक्सीन निर्माता कंपनी फाइजर टीके की तीसरी खुराक देने की तैयारी में लगी हुई है। दरअसल, कंपनी का कहना है कि कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन की तीसरी डोज की जरूरत पड़ सकती है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ऐसे में कंपनी ने एलान किया है कि आने वाले हफ्तों में वो तीसरी खुराक के लिए रेग्युलेटरी अप्रूवल (नियामक की मंजूरी) की मांग करेगी। दावा किया जा रहा है कि कंपनी तीसरी खुराक को लेकर ट्रायल कर चुकी है और अंतरिम ट्रायल के डेटा के आधार पर ही मंजूरी प्राप्त करने की कोशिश करेगी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कितनी कारगर होगी वैक्सीन की तीसरी खुराक? 
  • फाइजर ने दावा किया है कि अध्ययन के प्रारंभिक आंकड़ों से पता चलता है कि पहले दो डोज की तुलना में वैक्सीन की तीसरा डोज एंटीबॉडी लेवल को पांच से दस गुना बढ़ा सकती है। कंपनी का कहना है कि वैक्सीन की तीसरी खुराक दूसरी खुराक के छह महीने बाद बूस्टर के तौर पर दी जाएगी। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Pixabay
बीटा वैरिएंट के खिलाफ मिलेगी बेहतर सुरक्षा
  • कंपनी का अनुमान है कि वैक्सीन की तीसरी खुराक से कोरोना के बीटा वैरिएंट (बी.1.351) के खिलाफ बेहतर सुरक्षा मिलेगी। दरअसल, फाइजर और बायोएनटेक का मानना है कि बीएनटी162बी2 (BNT162b2) वैक्सीन की तीसरी खुराक में डेल्टा सहित वर्तमान में ज्ञात सभी वैरिएंट्स के खिलाफ सुरक्षात्मक प्रभावकारिता के उच्चतम स्तर को संरक्षित करने की क्षमता है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
फाइजर का कहना है, 'जैसा कि इस्रायल के स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी वास्तविक दुनिया के आंकड़ों में देखा गया है, संक्रमण और लक्षण संबंधी रोग दोनों को रोकने में टीके की प्रभावकारिता में टीकाकरण के छह महीने बाद गिरावट आई है, हालांकि गंभीर बीमारियों को रोकने में वैक्सीन की प्रभावकारिता उच्च बनी हुई है। इसके अलावा, हाल के समय में कोरोना का डेल्टा वैरिएंट इस्रायल के साथ-साथ कई अन्य देशों में प्रमुख वैरिएंट बन कर उभरा है। इसलिए अब तक के आंकड़ों के आधार पर यह संभावना है कि पूर्ण टीकाकरण के बाद छह से 12 महीनों के भीतर तीसरी खुराक की आवश्यकता हो सकती है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
फाइजर और बायोएनटेक का मानना है कि सुरक्षा के उच्चतम स्तर को बनाए रखने के लिए वैक्सीन की तीसरी खुराक फायदेमंद हो सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इस्रायल समेत कई देशों में फाइजर-बायोएनटेक की वैक्सीन का इस्तेमाल किया जा रहा है। 

स्रोत और संदर्भ:   
Pfizer and BioNTech Provide Update on Booster Program in Light of the Delta-Variant 
https://cdn.pfizer.com/pfizercom/2021-07/Delta_Variant_Study_Press_Statement_Final_7.8.21.pdf?IPpR1xZjlwvaUMQ9sRn2FkePcBiRPGqw 

अस्वीकरण नोट: यह लेख फाइजर-बायोएनटेक द्वारा साझा किए गए रिसर्च रिपोर्ट के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।   
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