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अलर्ट: ये फल सिर्फ पेट ही नहीं, दिल की सेहत के लिए भी है फायदेमंद; पर इन लोगों को बरतनी चाहिए सावधानी

Mon, 26 Oct 2026 11:53 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पपीता फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल है। इसमें मौजूद पपेन एंजाइम प्रोटीन के पाचन में मदद करता है। पपीता पाचन सुधारने, वजन नियंत्रित रखने और संतुलित आहार के जरिए हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकता है। 
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पपीता खाने के फायदे - फोटो : Amarujala.com/AI
पपीता एक ऐसा फल है, जो स्वादिष्ट होने के साथ कई जरूरी पोषक तत्वों से भी भरपूर होता है। इसमें फाइबर, विटामिन और एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद कर सकते हैं। पपीते में मौजूद पपेन नामक एंजाइम प्रोटीन को पचाने में सहायता करता है। यही वजह है कि इसे पाचन के लिए फायदेमंद फलों में गिना जाता है। इसके अलावा, इसमें विटामिन-ए, विटामिन सी, फोलेट और पोटैशियम जैसे पोषक तत्व भी पाए जाते हैं।

पपीते के सेवन से पाचन को बेहतर रखने, वजन नियंत्रित करने और हृदय को स्वस्थ बनाए रखने में मदद मिल सकती है। इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की कोशिकाओं को ऑक्सीडेटिव तनाव से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करते हैं। हालांकि, पपीता किसी बीमारी का इलाज नहीं है और कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए इसके प्रभाव के पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं। आ

इए जानते हैं पपीता खाने के फायदे और इससे जुड़ी जरूरी सावधानियां।
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पपीते के फायदे - फोटो : Freepik.com
पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है पपीता

पपीते में कई ऐसे पोषक तत्व होते हैं, जिनकी शरीर को सामान्य रूप से काम करने के लिए जरूरत होती है। इसमें फाइबर, कार्बोहाइड्रेट, थोड़ी मात्रा में प्रोटीन और कैल्शियम के साथ विटामिन ए, सी, ई तथा फोलेट जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं।
 
  • पपीते में मौजूद विटामिन सी शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सामान्य बनाए रखने और कोलेजन के निर्माण में मदद करता है।
  • वहीं, फाइबर पाचन को बेहतर रखने में सहायक होता है।
  • पपीते में पानी की मात्रा भी अच्छी होती है और इसकी कैलोरी अपेक्षाकृत कम होती है। इस कारण इसे संतुलित डाइट में शामिल करना फायदेमंद हो सकता है।
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कब्ज की समस्या - फोटो : Freepik.com
हृदय स्वास्थ्य के लिए हो सकता है फायदेमंद

पपीते में विटामिन सी, कैरोटेनॉयड्स और अन्य एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो शरीर को ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाने में मदद करते हैं। इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को सामान्य बनाए रखने में मदद करता है। इसके अलावा, पपीते का फाइबर संतुलित आहार के हिस्से के रूप में कोलेस्ट्रॉल नियंत्रित रखने में मदद कर सकता है। हृदय को स्वस्थ रखने के लिए केवल एक फल पर निर्भर रहने के बजाय फल-सब्जियों से भरपूर भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और धूम्रपान से दूरी जरूरी है। 

पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है

पपीते को पाचन के लिए उपयोगी फल माना जाता है। इसमें पपेन नामक एंजाइम होता है, जो प्रोटीन को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करता है। इसके अलावा, पपीते में मौजूद फाइबर मल त्याग को नियमित रखने और कब्ज की समस्या से राहत पाने में सहायक हो सकता है। इसमें पानी की अच्छी मात्रा होने से भी पाचन संबंधी सामान्य जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलती है।

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पपीता के नुकसान - फोटो : Adobe Stock
कैंसर के जोखिम को कम करने में क्या भूमिका है?

पपीते में लाइकोपीन और अन्य एंटीऑक्सीडेंट यौगिक पाए जाते हैं। ये शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने में भूमिका निभाते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने वाले कारकों में से एक है, जिसका संबंध कई बीमारियों से देखा गया है। हालांकि, प्रयोगशाला में किसी यौगिक के संभावित प्रभाव का मतलब यह नहीं है कि पपीता खाने से इंसानों में कैंसर होने का खतरा निश्चित रूप से कम हो जाता है।
 
  • पपीते का सेवन कैंसर के कुछ कारकों को कम करने में मदद कर सकती है, पर इसे कैंसर से बचाव का प्रमाणित तरीका नहीं माना जा सकता।
  • कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए तंबाकू से दूर रहना, वजन को कंट्रोल  रखना, संतुलित भोजन करना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार जांच कराना जरूरी है।
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गर्भावस्था में पपीता के नुकसान - फोटो : Freepik.com
किन लोगों को पपीता खाते समय सावधानी बरतनी चाहिए?

पका हुआ पपीता अधिकतर लोगों के लिए सामान्य मात्रा में सुरक्षित माना जाता है। हालांकि, कुछ लोगों को इसका सेवन करते समय सावधानी बरतनी चाहिए।
 
  • कच्चे या अधपके पपीते में लेटेक्स की मात्रा अधिक हो सकती है, जो गर्भाशय में संकुचन पैदा कर सकता है। इसलिए गर्भावस्था में कच्चे और अधपके पपीते के सेवन से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
  • जिन्हें पपीते या लेटेक्स से एलर्जी है, उन्हें इससे बचना चाहिए। खुजली, सूजन या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सा सहायता लें।
  • कुछ लोगों को अधिक मात्रा में पपीता खाने से पेट में मरोड़ या दस्त हो सकते हैं। ऐसे में इसकी मात्रा कम करें।
  • यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है या आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो डाइट में बड़े बदलाव करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: ये रूपायन में प्रकाशित कंटेट है। अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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