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सावधान: इस अंग में कोई दिक्कत हुई तो पाचन और शुगर दोनों की बढ़ सकती है परेशानी, अक्सर लोग कर देते हैं इग्नोर

Fri, 09 Oct 2026 08:04 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Health Alert: पैंक्रियाज भोजन पचाने वाले एंजाइम और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले हार्मोन्स बनाता है। इसमें सूजन या दूसरी गड़बड़ी होने पर पेट दर्द, दस्त, वजन घटने और कुछ मामलों में डायबिटीज की समस्या हो सकती है। 
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पैंक्रियाज की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
शरीर को स्वस्थ रखने के लिए सभी अंगों का ठीक तरीके से काम करते रहने की जरूरत होता है। हालांकि जब शरीर के अंगों की बात होती है तो सबसे पहले हमारे दिमाग में हार्ट-लंग्स, किडनी और लिवर का ही ख्याल आता है।

पर क्या आप जानते हैं कि हमारे शरीर में कुछ अंग ऐसे हैं जो एक साथ कई जरूरी काम करते हैं। अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज भी ऐसा ही एक अंग है। पेट के पीछे मौजूद ये छोटा सा अंग भोजन पचाने के साथ-साथ खून में शुगर का स्तर कंट्रोल रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और खानपान की गड़बड़ी ने दूसरे अंगों के साथ पैंक्रियाज की सेहत पर भी बुरा असर डाला है। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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पैंक्रियाज - फोटो : Adobe stock Images
पैंक्रियाज की ठीक तरीके से काम करते रहना जरूरी

जब हम खाना खाते हैं, तो अग्न्याशय पाचन में मदद करने वाले एंजाइम बनाता है। ये एंजाइम भोजन में मौजूद वसा, प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट को छोटे हिस्सों में तोड़ने में मदद करते हैं। इसके अलावा, अग्न्याशय इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन भी बनाता है, जो ब्लड शुगर को संतुलित रखने में मदद करते हैं।
 
  • अगर इस अंग में सूजन, चोट या दूसरी गड़बड़ी हो जाए, तो भोजन पचाने से लेकर और शुगर को कंट्रोल रखने तक सबकुछ प्रभावित हो सकता हैं। 

यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ हार्ट-लिवर की ही तरह पैंक्रियाज को भी स्वस्थ रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
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डायबिटीज कंट्रोल रखने के लिए पैंक्रियाज का ठीक रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
पैंक्रियाज शरीर में क्या-क्या काम करता है?

पैंक्रियाज पेट के पीछे स्थित एक ग्रंथि है, जो पाचन और हार्मोन्स को कंट्रोल करने जैसे काम करती है।
 
  • यह पाचन एंजाइम बनाता है, जो छोटी आंत में पहुंचकर भोजन को पचाने में मदद करती है। इतना ही नहीं अग्न्याशय बाइकार्बोनेट भी बनाता है, जो पेट से छोटी आंत में पहुंचने वाले अम्ल को निष्क्रिय करने में मदद करता है।
  • अग्न्याशय इंसुलिन और ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन बनाता है। इंसुलिन रक्त में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है, जबकि ग्लूकागॉन जरूरत पड़ने पर शुगर को बढ़ाने में भूमिका निभाता है।

इसलिए अग्न्याशय में गड़बड़ी पाचन और शुगर, दोनों को प्रभावित कर सकती है।
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पाचन की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
पैंक्रियाज की समस्याओं का पाचन पर असर

अगर पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में पाचन एंजाइम नहीं बना पाता या एंजाइम छोटी आंत तक ठीक से नहीं पहुंचता, तो भोजन का पाचन प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति को एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक इंसफिशिएंसी कहा जाता है।
  • इसमें खासकर वसा का पाचन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण आपको पेट फूलने, गैस, दस्त, वजन घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से न होने पर शरीर में विटामिन ए, डी, ई और के की कमी भी हो सकती है।

ब्लड शुगर पर इसका असर

अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं शुगर लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि पैंक्रियाज में कोई दिक्कत हो जाए तो इससे इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय में इससे डायबिटीज होने का जोखिम हो सकता है।
 
  • अग्न्याशय की बीमारी से होने वाले डायबिटीज को टाइप-3सी डायबिटीज भी कहा जाता है। यह क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस, पैंक्रियाज की सर्जरी या कुछ अन्य स्थितियों के बाद हो सकता है।

अग्न्याशय की समस्या में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द मितली और उल्टी हो सकती है। उल्टी के साथ अचानक पेट में तेज दर्द पैंक्रियाटाइटिस का संकेत हो सकता है। इस तरह की दिक्कतों में समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी माना जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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