पाचन की समस्याएं
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पैंक्रियाज की समस्याओं का पाचन पर असर
अगर पैंक्रियाज पर्याप्त मात्रा में पाचन एंजाइम नहीं बना पाता या एंजाइम छोटी आंत तक ठीक से नहीं पहुंचता, तो भोजन का पाचन प्रभावित हो सकता है। इस स्थिति को एक्सोक्राइन पैंक्रियाटिक इंसफिशिएंसी कहा जाता है।
- इसमें खासकर वसा का पाचन प्रभावित हो सकता है। इसके कारण आपको पेट फूलने, गैस, दस्त, वजन घटने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। लंबे समय तक पोषक तत्वों का अवशोषण ठीक से न होने पर शरीर में विटामिन ए, डी, ई और के की कमी भी हो सकती है।
ब्लड शुगर पर इसका असर
अग्न्याशय की इंसुलिन बनाने वाली कोशिकाएं शुगर लेवल को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती हैं। यदि पैंक्रियाज में कोई दिक्कत हो जाए तो इससे इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इससे शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल हो जाता है। लंबे समय में इससे डायबिटीज होने का जोखिम हो सकता है।
- अग्न्याशय की बीमारी से होने वाले डायबिटीज को टाइप-3सी डायबिटीज भी कहा जाता है। यह क्रोनिक पैंक्रियाटाइटिस, पैंक्रियाज की सर्जरी या कुछ अन्य स्थितियों के बाद हो सकता है।
अग्न्याशय की समस्या में पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द मितली और उल्टी हो सकती है। उल्टी के साथ अचानक पेट में तेज दर्द पैंक्रियाटाइटिस का संकेत हो सकता है। इस तरह की दिक्कतों में समय रहते डॉक्टर की सलाह लेना बहुत जरूरी माना जाता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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