फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Endometriosis Risk: पीरियड्स के दौरान होता है बहुत ज्यादा दर्द, कहीं इनफर्टिलिटी का शिकार न हो जाएं आप?

Sat, 27 Jun 2026 03:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पीरियड्स के दौरान हल्का या मध्यम दर्द होना सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए, बार-बार दर्द निवारक दवाइयों की जरूरत पड़े तो इसकी जांच जरूर करानी चाहिए। कुछ स्थितियों ेमें ये  एंडोमेट्रियोसिस का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 5
पीरियड्स के समय दर्द? - फोटो : Amarujala.com/AI
पीरियड्स हर महीने महिलाओं के शरीर में होने वाली एक अद्भुत प्रक्रिया है। ये प्रकृति का उपहार है जो हर महीने महिला के शरीर को मातृत्व की संभावना के लिए तैयार करता है। हालांकि कई महिलाओं को हर महीने पीरियड्स के दौरान जटिलताओं का सामना कर पड़ता है। 

आमतौर पर ये मान लिया जाता है कि पीरियड्स है तो दर्द होगा ही, लेकिन चिंता की बात ये है कि कई बार यही दर्द शरीर के भीतर चल रही गंभीर समस्याओं की तरफ भी संकेत हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पीरियड्स में हल्का या मध्यम दर्द होना स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन अगर हर महीने आपको इतना दर्द होता कि इससे उठना-बैठना मुश्किल हो जाए, स्कूल-कॉलेज या ऑफिस जाना बंद करना पड़े, बार-बार दर्द की दवाइयों का सहारा लेना पड़े तो ये समस्याकारक हो सकता है। कई मामलों में एंडोमेट्रियोसिस जैसी समस्या के कारण भी इस तरह की दिक्कत देखी जाती रही है। एंडोमेट्रियोसिस पर समय रहते ध्यान न देना आपको  इनफर्टिलिटी का शिकार भी बना सकता है।

अगर आप भी पीरियड्स के दौरान दर्द से परेशान रहती हैं तो सावधान हो जाइए और समय रहते इसकी जांच कराइए।
विज्ञापन

2 of 5
एंडोमेट्रियोसिस की समस्या को जानिए (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
पीरियड्स के दौरान होती हैं समस्याएं

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 10% प्रजनन आयु की महिलाएं और किशोरियां एंडोमेट्रियोसिस का शिकार हैं। यह केवल पीरियड्स की समस्या नहीं है बल्कि लंबे समय तक इंफ्लेमेशन का कारण भी बनती है। इसका जीवन की गुणवत्ता, मानसिक स्वास्थ्य और प्रजनन क्षमता पर भी प्रभाव देखा जाता रहा है।
 
  • एंडोमेट्रियोसिस एक गंभीर और क्रॉनिक समस्या मानी जाती है। गर्भाशय की आंतरिक परत (एंडोमेट्रियम) जैसे ऊतक गर्भाशय के बाहर अंडाशय, फैलोपियन ट्यूब या पेट के अन्य अंगों पर बढ़ने लग जाते हैं।
  • ये टिश्यू हर मासिक धर्म चक्र के दौरान मोटे होते हैं, इनका ब्रेक डाउन होता है और उनसे ब्लीडिंग हो सकती है। इससे सूजन, स्कारिंग और बहुत ज्यादा दर्द की समस्या हो सकती है। कई मामलों में ये सिस्ट भी बना लेते हैं।
  • कई मामलों में इसकी पहचान होने में वर्षों लग जाते हैं क्योंकि इसके लक्षणों को अक्सर सामान्य पीरियड्स का हिस्सा मान लिया जाता है।
विज्ञापन

3 of 5
पीरियड्स में दर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
एंडोमेट्रियोसिस का बढ़ता खतरा

एंडोमेट्रियोसिस के कारण होने वाली समस्याएं और दर्द हर महिला में अलग-अलग हो सकता है। किसी को सिर्फ पीरियड्स में दर्द होता है, तो किसी को संभोग के दौरान, मलत्याग के समय या पूरे महीने पेल्विक हिस्से में दर्द बना रहता है। 
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि एंडोमेट्रियोसिस के कारण होने वाला दर्द गर्भाशय में बनने वाले प्रोस्टाग्लैंडिन नामक रसायनों के कारण होता है, जो गर्भाशय की मांसपेशियों को सिकोड़ते हैं ताकि गर्भाशय की परत बाहर निकल सके। 
  • लेकिन यदि दर्द इतना तेज हो कि रोजमर्रा के काम करना मुश्किल हो जाए, बार-बार दवाइयों की जरूरत पड़े, उल्टी, बेहोशी, तेज कमर दर्द या पेल्विक दर्द बना रहता है तो इसपर गंभीर से ध्यान दिया जाना चाहिए।

4 of 5
मासिक धर्म के दौरान होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
एंडोमेट्रियोसिस में क्या दिक्कतें होती हैं?

अमेरिकन कॉलेज ऑफ ऑब्स्टेट्रिशियन एंड गायनेकोलॉजिस्ट के अनुसार, एंडोमेट्रियोसिस के लक्षण हर महिला में अलग हो सकते हैं। इसलिए संकेतों पर ध्यान देते रहना और इससे बचाव के लिए उपाय करना जरूरी है।
 
  • पीरियड्स के दौरान अत्यधिक दर्द के साथ पेल्विक हिस्से में या फिर संभोग के दौरान या बाद में भी दर्द हो सकता है।
  • कुछ महिलाओं को शौच या पेशाब करते समय भी दर्द महसूस होता है। 
  • इसमें अत्यधिक या अनियमित रक्तस्राव, लंबे समय तक थकान, पेट फूलनs, कब्ज या दस्त जैसी आंत की समस्या और गर्भधारण में कठिनाई भी देखी जाती रही है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एंडोमेट्रियोसिस में होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
क्यों होती है ये दिक्कत और क्या करें?

एंडोमेट्रियोसिस क्यों होता है इसे पूरी तरह समझा नहीं जा सका है।
 
  • हालांकि माना जाता है कि जब आपको एंडोमेट्रियोसिस होता है, तो आपके गर्भाशय की परत जैसा टिश्यू गलत जगहों पर बढ़ने लगता है। 
  • आनुवंशिक कारणों के अलावा, प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी, हार्मोन विशेषकर एस्ट्रोजन के प्रभाव को भी इसका कारण माना जाता रहा है। 
  • यदि आपको भी ये दिक्कतें हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलकर जांच कराएं। समय पर जांच और इलाज से जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है। 


एंडोमेट्रियोसिस को बांझपन की मुख्य वजहों में से एक माना जाता है। एंडोमेट्रियोसिस की वजह से टिश्यू ऐसी जगहों पर बढ़ने लगते हैं जहां उन्हें नहीं होना चाहिए। इससे गर्भधारण के समय स्पर्म और एग के एक-दूसरे तक पहुंचने की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है। डॉक्टर की सलाह पर दवाओं और लाइफस्टाइल में बदलाव के जरिए आप अपने खतरे को कम कर सकती हैं।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें