फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Alert: एड़ियों-टखनों में अक्सर रहती है दर्द और सूजन? न करें इग्नोर, लिवर-दिल की बीमारियों का हो सकता है संकेत

Fri, 05 Sep 2025 04:40 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • क्या आप जानते हैं कि एड़ियों और टखनों में होने वाली दिक्कतें भी गंभीर समस्याओं की तरफ इशारा हो सकती हैं, जिसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
  • एड़ियों के साथ-साथ टखनों में भी होने वाली दिक्कतों को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कई बार ये हृदय रोग या लिवर की समस्याएं की तरफ भी इशारा हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 5
एड़ियों-टखनों में दर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
लाइफस्टाइल और खान-पान की गड़बड़ी ने कई प्रकार की बीमारियों के खतरे को बढ़ा दिया है। डॉक्टर कहते हैं, अगर हम कम उम्र से ही दिनचर्या को ठीक रखने वाले उपाय कर लें तो इससे बीमारियों से बचाव हो सकता है, वहीं अगर जागरूकता के साथ शरीर के लक्षणों पर ध्यान दे लें तो इससे बीमारियों के गंभीर रूप लेने का जोखिम कम हो सकता है।

बीमारियों की स्थिति में हमारा शरीर हमेशा छोटे-छोटे संकेत देता है, जिनपर अगर समय रहते ध्यान दे लिया जाए और इनका इलाज हो जाए तो गंभीर खतरों को टाला जा सकता है। उदाहरण के लिए आंखों में पीलापन (पीलिया) होना लीवर की बीमारियों का संकेत माना जाता है, तो अचानक से नजर धुंधली होना शुगर बढ़ने का संकेत माना जाता है।

क्या आप जानते हैं कि एड़ियों और टखनों में होने वाली दिक्कतें भी गंभीर समस्याओं की तरफ इशारा हो सकती हैं, जिसे बिल्कुल भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
विज्ञापन

2 of 5
एड़ियों में दर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
क्या आपको भी एड़ियों-टखनों में रहती है दिक्कत?

क्या आप जानते हैं कि अगर एड़ियां बार-बार फट रही हैं, तो ये सिर्फ ठंडे मौसम या धूल-मिट्टी की वजह नहीं है, बल्कि यह डायबिटीज, थायरॉइड या शरीर में खून की कमी की निशानी हो सकती है। एड़ियों में लगातार सूजन दिल या किडनी की गड़बड़ी का इशारा देती है। वहीं एड़ियों का दर्द कई बार गठिया या यूरिक एसिड बढ़ने की कहानी कहता है।

एड़ियों के साथ-साथ टखनों में भी होने वाली दिक्कतों को भी अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। कई बार ये हृदय रोग या लिवर की समस्याएं की तरफ भी इशारा हो सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
टखनों में दर्द को न करें अनदेखा - फोटो : Freepik.com
टखनों में होने वाली समस्याओं को न करें अनदेखा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपके टखनों में अक्सर दर्द या सूजन की समस्या रहती है तो इसे अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए। अगर यह दर्द लंबे समय तक बना रहे, तो विशेषज्ञों का कहना है कि यह दो जानलेवा स्थितियों का संकेत हो सकता है - फैटी लिवर रोग या हार्ट फेलियर।

टखनों में दर्द-सूजन की स्थिति को एडिमा के नाम से भी जाना जाता है। आमतौर पर रक्त वाहिकाओं में होने वाली समस्याओं के कारण ये दिक्कत होती है। हालांकि, अगर यह लंबे समय तक बना रहे, तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए। 

4 of 5
हार्ट अटैक और हार्ट फेलियर का खतरा - फोटो : Freepik.com
हृदय रोग-हार्ट फेलियर का संकेत

टखनों में अगर सूजन या दर्द की समस्या काफी समय से बनी हुई है तो इसे इग्नोर न करें, ये हार्ट फेलियर का संकेत हो सकता है। हार्ट फेलियर तब होता है जब आपका हृदय शरीर में रक्त को ठीक से और प्रभावी ढंग से पंप नहीं कर पाता। डॉक्टरों का कहना है कि इसके कारण सीने में तकलीफ और सांस लेने में तकलीफ के अलावा पैरों, टखनों और टखनों में सूजन की भी दिक्कत हो सकती है।

आमतौर पर कंजेस्टिव हार्ट फेलियर के कारण हृदय के एक या दोनों निचले कक्ष रक्त पंप करना बंद कर देते हैं। इसके कारण खून पैरों-टखनों में जमा होने लग जाता जाता है जिसके कारण इनमें सूजन और दर्द की दिक्कत हो सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
लिवर की बीमारियों के संकेत - फोटो : adobe stock images
लिवर रोग की बीमारी के कारण भी होती हैं ये दिक्कतें

टखनों में सूजन-दर्द की समस्या का एक कारण लिवर से संबंधित रोग-फैटी लिवर भी हो सकता है। फैटी लिवर रोग में आपके लिवर में अतिरिक्त चर्बी जमा होने लग जाती है।

डॉक्टरों का कहना है कि एडिमा की समस्या पोर्टल हाइपरटेंशन के बढ़ते दबाव के कारण होती है, जो फैटी लिवर रोग से जुड़ी लिवर क्षति के कारण होता है। इस दबाव के कारण आसपास के ऊतकों में तरल पदार्थ जमा हो जाता है, जिससे सूजन आ जाती है। फैटी लिवर का समय पर पहचान और इलाज जरूरी है।



-----------------------------
नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें