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CoronaVirus: 70 फीसदी से ज्यादा संक्रमित बच्चों में कोई लक्षण नहीं, एम्स ने बताया- कौन सा जांच है बेहतर

Fri, 06 Nov 2020 03:11 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना से संक्रमित 40 फीसदी लोग बिना लक्षणों वाले पाए गए हैं। इनमें अलग-अलग उम्र समूहों के कोरोना मरीज शामिल हैं। एम्स यानी अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान के आंकड़ों में यह बात सामने आई है। कोविड-19 प्रबंधन में हाल की चुनौतियों, मुद्दों और रुझानों पर देशभर के चिकित्सकों के एक वेबिनार में यह जानकारी दी गई। वर्चुअल प्लेटफॉर्म आधारित वेबिनार ने नेशनल ग्रैंड राउंड में कोविड की संवेदनशीलता और  विभिन्न जांच परीक्षणों के उपयोग पर चर्चा में देशभर के चिकित्सक शामिल हुए और ये आंकड़े इसी दौरान प्रस्तुत किए गए। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
जारी आंकड़ों के मुताबिक, 12 वर्ष से कम उम्र के कोरोना संक्रमित बच्चों में सबसे ज्यादा 73.5 फीसदी बिना लक्षण वाले मरीज थे। वहीं, बढ़ते आयुवर्ग के साथ इसके अनुपात में कमी आई। 80 से अधिक आयुवर्ग के मरीजों में से महज 38.4 फीसदी बिना लक्षण वाले मिले। एम्स के माइक्रोबायोलॉजी केंद्र के आंकड़ों से पता चला कि कोविड-19 के सबसे आम लक्षण बुखार, गंध महसूस कर पाने में कमी और थकान थे। 
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जांच के लिए नमूना लेता स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
एम्स में माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रोफेसर डॉ. उर्वशी सिंह ने कहा, यह हमारे सेंटर के आंकड़े हैं। आंकड़ों की प्रासंगिकता तब और बढ़ जाती है, जब हम आरटीपीसीआर परीक्षण की वैधता पर सवाल उठाते हैं। उन्होंने इस ओर ध्यान दिलाया कि बहुत से मरीजों के बारे में हमें यह नहीं पता चल पाता है कि हम किस दिन मरीज का नमूना लें। इसके पीछे की वजह यही है कि उनमें कोई लक्षण ही नजर नहीं आते हैं।

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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
वर्तमान में स्वास्थ्य संस्थानों और बाजार में उपलब्ध जांच परीक्षण तकनीकों की समीक्षा करते हुए चिकित्सकों ने कहा कि सेमी-इमेर्जेंसी या अर्द्ध-आकस्मिक यानी उभरते लक्षणों वाले मरीजों के लिए सीबीएनएएटी (CBNAAT) या ट्रूनेट (TrueNat) जांच तकनीक सही है। ये दोनों कार्टिज या चिप-आधारित परीक्षण हैं, जो कम समय में रिपोर्ट देते हैं। 
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Coronavirus Test - फोटो : Social Media
एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा, “आपातकाल के मामलों में, व्यक्ति को यह मानकर चलना चाहिए कि वह कोरोना पॉजिटिव है। ऐसा सोचते हुए वह तमाम जरूरी सावधानियां बरते और आइसोलेट रहे। हालांकि, सेमी-इमरजेंसी के मामले में, CBNAAT और TrueNat जांच की अच्छी तकनीक है, जो कम समय में सटीक परिणाम दे सकते हैं और यह निर्णय लेने में मदद कर सकते हैं कि क्या मरीज को कोविड केंद्र या किसी तरह की सर्जरी की जरूरत तो नहीं। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
चिकित्सकों ने यह भी कहा कि कम संवेदनशील जगहों के लिए रैपिड एंटीजन टेस्ट के भी परिणाम अच्छे दिखे। कारण कि यह अस्पताल के आपातकालीन सेवाओं में लगे कर्मियों में एक पॉजिटिव मरीज की स्क्रीनिंग में मदद कर सकता है। किफायती और तेजी से रिपोर्ट देने वाला यह जांच, तेजी से उपचार में भी मदद करता है। संक्रमण का पता लगने के तुरंत बाद मरीज का उपचार शुरू हो सकता है। 
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