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Alert: डायबिटीज-बीपी ही नहीं, 61 जानलेवा बीमारियों का कारण बन सकता है मोटापा; हो जाएं सावधान

Mon, 09 Feb 2026 07:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Obesity Cause Chronic Illness: मोटापा सिर्फ आपके लुक को खराब करने वाली समस्या नहीं है, इसके कारण आपके पूरे शरीर पर कई तरह से नकारात्मक असर हो सकता है। हालिया अध्यययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि जो लोग मोटापे का शिकार होते हैं उनमें करीब 61 तरह की जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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मोटापा और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe stock photos
अधिक वजन और मोटापे की समस्या वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये समस्या एक गंभीर महामारी का रूप लेती जा रही है। दुनिया भर में एक अरब से ज्यादा लोग मोटापे या अधिक वजन का शिकार हैं। साल 1990 के बाद से मोटापे की दर दोगुनी से ज्यादा हो गई है। बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी इसका शिकार देखे जा रहे हैं, जिसको लेकर हमें अलर्ट रहने की आवश्यकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापा सिर्फ आपके लुक को खराब करने वाली समस्या नहीं है, ये कई तरह की बीमारियों का घर भी है। जिस गति से ये दिक्कत बढ़ती जा रही है, अनुमान है कि साल 2030 तक लगभग 3 अरब लोग ओवरवेट या मोटापे का शिकार हो सकते हैं।

कम्युनिकेशन मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया है कि मोटापा 86 प्रतिशत तक दीर्घकालिक बीमारियों का कारण हो सकती है। इससे सिर्फ हृदय रोग और डायबिटीज ही नहीं, कई तरह की अन्य गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।
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वजन अधिक होने के कारण क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe stock photos
कई गंभीर बीमारियों का कारण है मोटापा

मोटापा की स्थिति किस तरह से हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करती है, इसे समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने एक अध्ययन किया। इसमें वजन बढ़ने और इसके कारण होने वाली क्रॉनिक बीमारियों के खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि वजन अधिक होना आमतौर क्रोनिक किडनी रोग, ऑस्टियोआर्थराइटिस और डायबिटीज की मुख्य वजह मानी जाती है। हालांकि इसके साइड-इफेक्ट्स कहीं और अधिक भी हो सकते हैं। 

मोटापा के शिकार लोगों में करीब 61 प्रकार की जानलेवा बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है। यही कारण है कि सभी लोगों को अपने वजन को कंट्रोल में रखने के लिए निरंतर उपाय करते रहने की आवश्यकता है।
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ओवरवेट लोगों में किन बीमारियों का खतरा रहता है? - फोटो : Freepik.com
हाई बीएमआई वाले लोगोंं में गंभीर रोगों का खतरा

यूनिवर्सिटी ऑफ एक्सेटर, इंग्लैंड की टीम ने 71 अलग-अलग बीमारियों का एनालिसिस किया जो आमतौर पर एक साथ होती हैं, जैसे टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और ऑस्टियोआर्थराइटिस। इसमें यह समझने की कोशिश की गई कि क्या मोटापा इन बीमारियों के लिए रिस्क फैक्टर है?
 
  • शोधकर्ताओं ने हजारों लोगों के जेनेटिक और हेल्थ डेटा का इस्तेमाल किया जिनका बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 से अधिक था।
  • इन लोगो में 71 में से 61 रोगों के कॉम्बिनेशन का खतरा देखा गया, जो लगभग 86 प्रतिशत था।

मोटापा के शिकार लोगों में जिन बीमारियों का जोखिम अधिक था उनमें क्रोनिक किडनी डिजीज और फेफड़ों की बीमारियों के साथ गाउट और स्लीप एपनिया, मधुमेह सहित शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों से संबंधित दिक्कतें देखी गईं। 


ये भी पढ़िए- (हर उम्र पर भारी पड़ रहा मोटापा, तुरंत सुधार लें ये आदत वरना बढ़ सकती है परेशानी)

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कहीं आप भी तो नहीं हैं मोटापे का शिकार? - फोटो : Freeoik.com
अध्ययन में क्या पता चला?
 
 स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, अगर आप मोटापा को कम करने के लिए प्रयास करते हैं और अपना वजन कुछ भी कम कर लेते हैं तो इससे बीमारियों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है।
  • बीएमआई 4.5 पॉइंट कम करने से हर 1,000 लोगों में लगभग 17 लोगों में क्रोनिक किडनी डिजीज और ऑस्टियोआर्थराइटिस के खतरे को कम किया जा सकता है।
  • वहीं बीएमआई कम होने से  लगभग 9 लोगों को टाइप 2 डायबिटीज और ऑस्टियोआर्थराइटिस से बचाया जा सकता है।

बायोमेडिकल डेटा साइंटिस्ट और अध्ययन के प्रमुख लेकर प्रोफेसर जैक बॉडेन कहते हैं, हम लंबे समय से जानते हैं कि कुछ बीमारियां अक्सर एक साथ होती हैं और जिन लोगों का वजन अधिक होता है उनमें इनका जोखिम भी ज्यादा देखा जाता रहा है।  मोटापा कई बीमारियों की मुख्य जड़ है।

फिलहाल, अकेले यूके में कम से कम 90 लाख लोग दो या उससे ज्यादा दीर्घकालिक बीमारियों के साथ जी रहे हैं। इन रोगों को वजन कम करके रोका जा सकता है।
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वजन कम करने के लिए उपाय जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

शोधकर्ता कहते हैं, ये अध्ययन पब्लिक हेल्थ प्रोग्राम के जरिए मोटापे से निपटने के लिए वैश्विक प्रयासों को और तेज करने पर जोर देती है। अकेले मोटापे को कम करने के लिए भी प्रयास कर लिए जाएं तो इससे कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है, जिससे लोगों को लंबी और स्वस्थ जिंदगी जीने में मदद मिलेगी।

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अकेले यूके में लगभग 90 लाख लोग दिल का दौरा, स्ट्रोक और किडनी फेलियर के उच्च जोखिम में हैं, क्योंकि उनमें कार्डियोवैस्कुलर-किडनी-मेटाबोलिक सिंड्रोम जैसी समस्याएं एक साथ देखी जा रही हैं।

अगर वजन कम करने के लिए प्रयास तेज कर दिए जाएं तो इससे असमय मौत के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है। इसके लिए लाइफस्टाइल और खान-पान में सुधार करना सबसे जरूरी है।



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स्रोत:
Genetics identifies obesity as a shared risk factor for co-occurring multiple long-term conditions


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