प्रतीकात्मक तस्वीर
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इस अध्ययन के दौरान शोधकर्ताओं ने अलग-अलग शिफ्ट में काम करने को लेकर एक प्रयोग किया, जिसमें 14 प्रतिभागियों ने वॉशिंगटन स्टेट यूनिवर्सिटी हेल्थ साइंसेज के स्लीप लेबोरेटरी में सात दिन बिताए। इस दौरान आधे लोगों को तीन दिन के लिए नाइट शिफ्ट में रखा गया और बाकी आधे लोगों को तीन दिन के लिए डे शिफ्ट में। जब उनकी शिफ्ट पूरी हो गई तो उनकी जांच की गई। उनके खून के नमूनों से ली गई श्वेत रक्त कोशिकाओं के विश्लेषण से पता चला कि दिन की शिफ्ट की स्थिति की तुलना में रात की शिफ्ट की स्थिति में कैंसर से जुड़े कई जीनों की लय अलग थी। विशेष रूप से, डीएनए की मरम्मत से संबंधित जीन, जो डे शिफ्ट की स्थिति में अलग-अलग लय दिखाते हैं और नाइट शिफ्ट की स्थिति में अपनी लयबद्धता खो देते हैं, यानी नाइट शिफ्ट में काम करने वाले लोगों में डीएनए की क्षति अधिक देखने को मिली। हालांकि यह शोध तो प्रयोगशाला में किया गया था, लेकिन शोधकर्ता अब वास्तविक दुनिया में भी इस प्रयोग को करने पर विचार कर रहे हैं।