फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अध्ययन: क्या दिमाग से जुड़ी है शरीर के हर हिस्से के दर्द की कहानी? फाइब्रोमायल्जिया पर बड़ा खुलासा

Fri, 04 Sep 2026 04:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फाइब्रोमायल्जिया पर हुए अब तक के सबसे बड़े आनुवंशिक अध्ययनों में 25.6 लाख से अधिक लोगों के आंकड़ों से बीमारी से जुड़े 26 आनुवंशिक क्षेत्र मिले हैं। इनमें करीब आधे तंत्रिका तंत्र से जुड़े जीनों के आसपास हैं। 
विज्ञापन
1 of 3
फाइब्रोमायल्जिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
शरीर के अलग-अलग हिस्सों में लगातार दर्द, हर समय बनी रहने वाली थकान, ठीक से नींद न आना और छोटी-छोटी बातों पर ध्यान लगाने में परेशानी बहुत आम है। इसे मेडिकल की भाषा में फाइब्रोमायल्जिया के नाम से जाना जाता है। फाइब्रोमायल्जिया से जूझ रहे लोगों के लिए ये समस्याएं रोजमर्रा की जिंदगी को मुश्किल बना देती हैं। लंबे समय से वैज्ञानिक इस बीमारी के पीछे छिपे कारणों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। अब एक बड़े आनुवंशिक अध्ययन ने इस दिशा में महत्वपूर्ण सुराग दिए हैं।

वैज्ञानिकों ने फाइब्रोमायल्जिया के जोखिम से जुड़े 26 आनुवंशिक क्षेत्र पहचाने हैं। इनमें लगभग आधे ऐसे जीनों के आसपास स्थित हैं, जिनका संबंध तंत्रिका तंत्र के विकास और दर्द को महसूस करने की प्रक्रिया से है। अध्ययन के नतीजे इस बात को मजबूती देते हैं कि फाइब्रोमायल्जिया की स्थिति में मस्तिष्क और केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

तो क्या हमारे शरीर के हर हिस्से के दर्द की कहानी हमारे दिमाग से जुड़ी होती है?
विज्ञापन

2 of 3
शरीर में दर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
फाइब्रोमायल्जिया के बारे में जानिए

फाइब्रोमायल्जिया में पूरे शरीर में दर्द के साथ अत्यधिक थकान, नींद में व्यवधान, चिंता, अवसाद और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके लक्षण हर मरीज में एक जैसे नहीं होते। बीमारी की पहचान के लिए अभी कोई सामान्य रक्त जांच उपलब्ध नहीं है, इसलिए इसका निदान कई बार चुनौतीपूर्ण रहता है।  कई लोगों को याददाश्त और मानसिक स्पष्टता में कमी महसूस होती है, जिसे आमतौर पर ‘ब्रेन फॉग’ कहा जाता है।

अध्ययन में क्या पता चला?

नेचर मेडिसिन में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने 25 लाख लोगों के आनुवंशिक आंकड़ों का विश्लेषण किया। इनमें करीब 55 हजार लोग फाइब्रोमायल्जिया से पीड़ित थे। वैज्ञानिकों ने ऐसे आनुवंशिक बदलाव तलाशे, जो मरीजों में सामान्य आबादी की तुलना में अलग आवृत्ति में पाए जाते हैं। इन बदलावों से बीमारी के पीछे काम करने वाली जैविक प्रक्रियाओं के बारे में सुराग मिल सकते हैं। सबसे मजबूत आनुवंशिक संबंध ऐसे जीन के पास मिला, जिसका संबंध हंटिंगटन रोग से है। 

इसलिए इसका यह अर्थ नहीं है कि फाइब्रोमायल्जिया वाले लोगों में हंटिंगटन रोग का खतरा बढ़ जाता है।

हंटिंगटन रोग एक दुर्लभ, आनुवंशिक और धीरे-धीरे बढ़ने वाली मस्तिष्क की बीमारी है। इसमें तंत्रिका कोशिकाएं क्षतिग्रस्त होने लगती हैं, जिससे अनियंत्रित हरकतें, सोचने-समझने में कमी और व्यवहार में बदलाव हो सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
फाइब्रोमायल्जिया का इलाज होगा आसान - फोटो : Adobe stock
भविष्य में उपचार की नई राह खुलने की उम्मीद

शोधकर्ताओं का कहना है कि ये निष्कर्ष फाइब्रोमायल्जिया को केवल मनोवैज्ञानिक समस्या मानने की पुरानी धारणा को चुनौती देते हैं और इसके जैविक आधार के प्रमाण मजबूत करते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि प्रतिरक्षा तंत्र या अन्य जैविक प्रक्रियाओं की भूमिका नहीं है।

बीमारी कई कारकों के मेल से विकसित हो सकती है।अध्ययन में शामिल लोगों की आनुवंशिक विविधता भी पूरी दुनिया की आबादी का प्रतिनिधित्व नहीं करती। फिर भी ये संकेत बीमारी के कारणों को समझने और भविष्य में नए उपचार विकसित करने के लिए वैज्ञानिकों को महत्वपूर्ण दिशा दे सकते हैं।



--------------
स्रोत:
The genetic architecture of fibromyalgia across 2.5 million individuals


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें