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अध्ययन में दावा: वैज्ञानिकों ने खोज ली 'चमत्कारी दवा', ये फेफड़ों के कैंसर-मौत का जोखिम 51% तक कर सकती है कम

Sun, 18 Jun 2023 12:23 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़े के कैंसर को कैसे ठीक करें? - फोटो : iStock
फेफड़ों का कैंसर वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। शोधकर्ताओं ने पाया कि दुनियाभर में हर 16 में से एक व्यक्ति में लंग कैंसर का जोखिम हो सकता है। अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक लगभग हर ढाई मिनट में यू.एस. में किसी न किसी व्यक्ति में फेफड़े के कैंसर का पता चलता है और हर दिन फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित करीब 350 लोगों की मौत हो जाती है। वैसे तो पिछले पांच वर्षों में लंग्स कैंसर, किसी भी प्रकार के कैंसर से होने वाली मृत्यु दर का बड़ा जोखिम रहा है, हालांकि रोगियों के अधिक समय तक जीवित रहने की दर 21 फीसदी से बढ़कर 25 फीसदी हुई है।

इस बीच लंग्स कैंसर और इसके कारण होने वाली मौतों की रोकथाम को लेकर अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की टीम को बड़ी सफलता मिली है। रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने एक ऐसी दवा खोज ली है जो फेफड़ों के कैंसर के खतरे को काफी कम कर सकती है।
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फेफड़ों में कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
फेफड़ों के कैंसर का कम हो सकता है मृत्युदर

दवा निर्माता कंपनी एस्ट्राजेनेका ने एक ऐसी पिल के नैदानिक परीक्षण में सफलता का दावा किया है जो लंग्स कैंसर के कारण होने वाली मौत के मामलों को 50 फीसदी तक कम कर सकती है। शिकागो में अमेरिकन सोसायटी ऑफ क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी की वार्षिक बैठक में परीक्षण के परिणाम प्रस्तुत किए गए हैं।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार  फेफड़ों के कैंसर के शुरुआती चरण के रोगियों की सर्जरी के बाद, दैनिक रूप से इस दवा के सेवन ने मृत्यु के जोखिम को काफी हद तक कम किया है। 
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लंग्स कैंसर की दवा (सांकेतिक) - फोटो : iStock
अध्ययन में क्या पता चला?

फेफड़ों के कैंसर वाले 682 रोगियों पर इस दवा का अध्ययन किया गया। लगभग आधे प्रतिभागियों को तीन साल तक दैनिक रूप से यह गोली दी गई, जबकि अन्य आधे को प्लेसबो दिया गया। कैंसर के निदान के पांच साल बाद, प्लेसीबो लेने वाले समूह के 78% की तुलना में इस दवा को लेने वाले 88% रोगी अभी भी जीवित थे। शोधकर्ताओं ने पाया कि यह दवा फेफड़ों के कैंसर से मृत्यु के समग्र जोखिम को 51% तक कम कर सकती है।

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कैंसर का इलाज - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

येल कैंसर सेंटर में अध्ययन मुख्य अन्वेषक डॉ. रॉय हर्बस्ट कहते हैं, मुझे लगता है कि कैंसर रोगियों के इलाज में यह दवा काफी कारगर हो सकती है। हम वास्तव में फेफड़ों के कैंसर के उपचार में प्रगति देख रहे हैं, जैसे पहले कभी नहीं देखा गया था। इस दवा के परीक्षण के परिणाम हमारी अपेक्षा से लगभग दोगुने अच्छे हैं।

हमें उम्मीद है कि आगामी परीक्षणों के आधार पर इस दवा को वैश्विक स्वीकृति मिलेगी और हम दुनियाभर में तेजी से बढ़ रहे फेफड़ों के कैंसर को रोकथाम में विशेष सफलता पा सकेंगे। 
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लंग्स कैंसर के लिए दवा - फोटो : Pixabay
दवा के परीक्षण परिणाम काफी आशावादी

हर्बस्ट की शोध टीम ने तीन साल पहले भी इस दवा को लेकर किए अध्ययन में बताया था कि यह ट्यूमर को वापस आने से रोकने और कैंसर को मस्तिष्क, यकृत और हड्डी में फैलने से रोकने में कारगर हो सकती है। डॉ. रॉय हर्बस्ट कहते हैं हम पहले से ही जानते थे कि यह दवा प्रभावी थी। हालांकि, अब हम जो देख रहे हैं वह यह है कि इससे रोगी लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं। 

रोगियों के सर्वाइवल को लेकर जारी नया डेटा डॉक्टरों को इस दवा को लिखने के लिए प्रोत्साहित कर सकता है। चूंकि कैंसर का उपचार महंगा है इसलिए हमारी कोशिश है कि एक दवा के माध्यम से ही लंग्स कैंसर से मृत्यु के जोखिम को कम किया जा सके।




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स्रोत और संदर्भ 
Overall Survival with Osimertinib in Resected EGFR-Mutated NSCLC


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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