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Covid-19: नए वैरिएंट्स के बढ़ते मामलों के बीच फिर से प्रतिबंध लागू, विशेषज्ञ बोले- अधिक जोखिम वाले रहें सावधान

Fri, 25 Aug 2023 12:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिम कारक - फोटो : Istock
दुनिया के कई देशों में कोरोना के बढ़ते नए वैरिएंट्स वैज्ञानिकों की चिंता बढ़ा रहे हैं। एरिस और BA.2.86 जैसे वैरिएंट्स के कारण संक्रमण और अस्पताल में भर्ती लोगों के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नए वैरिएंट्स में अतिरिक्त म्यूटेशन देखे गए हैं जो तेजी से संक्रमण बढ़ाने और शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने में सफल हो सकते हैं। इन वैरिएंट्स के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी है।

अमेरिका में बढ़ते संक्रमण के मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यहां लोगों को सख्ती से कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की सलाह दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने उच्च जोखिम वाले सभी लोगों को मास्क लगाने की सलाह दी है। डॉक्टर कहते हैं, यह वैरिएंट आसानी से इम्युनिट को चकमा देने वाला देखा जा रहा है, ऐसे में इसके कारण संक्रमण का खतरा हर किसी में बना हुआ है। 
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले - फोटो : PTI
कई देशों में बढ़े संक्रमण के मामले

राउटर्स में छपी एक रिपोर्ट में विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक प्रमुख अधिकारी ने बताया कि अतिरिक्त म्यूटेशन वाला BA.2.86 वैरिएंट तेजी से कई देशों में बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। अब तक अमेरिका सहित इजराइल, डेनमार्क, ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड और दक्षिण अफ्रीका में इसके मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं। प्रारंभिक अध्ययनों में शोधकर्ताओं ने बताय कि ओमिक्रॉन के मूल XBB.1.5 वैरिएंट की तुलना में वायरस के प्रमुख हिस्सों में 35 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे ओमिक्रॉन का सबसे अधिक म्यूटेटेड वर्जन बनाते हैं। 
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इम्युनिटी को चकमा देने वाले वैरिएंट्स - फोटो : iStock
इम्युनिटी को आसानी से चकमा दे रहे हैं नए वैरिएंट्स 

दुनियाभर के वैज्ञानिकों ने कहा, BA.2.86 की प्रकृति और इसके म्यूटेशन जिस प्रकार के देखे जा रहे हैं, यह वैक्सीनेटेड और पूर्व संक्रमण से शरीर में बनी प्रतिरक्षा को आसानी से चकमा देने वाला हो सकता है।

सीडीसी विशेषज्ञ कहते हैं, यह दावा करना बहुत जल्दबाजी होगी कि BA.2.86 गंभीर बीमारियों का कारण बनेगा या नहीं, हालांकि प्रारंभिक शोध में पाया गया है कि यह बहुत गंभीर तो नहीं है। नए वैरिएंट्स के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले रोगियों के मामले जरूर बढ़े हैं, लेकिन इनमें से ज्यादार वही लोग हैं जो पहले से कोमोरबिडिटी के शिकार रह चुके हैं।

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कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : istock
संक्रमण और नए वैरिएंट्स के बढ़ने के कारण

अब बड़ा सवाल ये है कि आखिर नए वैरिएंट्स के मामले और इसके कारण संक्रमण क्यों बढ़ रहा है? इस बारे में सीडीसी विशेषज्ञ कहते हैं, अधिकांश लोगों को लंबे समय से बूस्टर डोज नहीं मिला है, इसलिए सामूहिक प्रतिरक्षा छह महीने पहले की तुलना में अब कम है। संक्रमण के जोखिमों को देखते हुए प्रतिबंध लगने भी शुरू हो गए हैं। अमेरिका के कुछ क्षेत्रों और संस्थानों में मास्क अनिवार्यता वापस आ गई है।
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भारत में संक्रमण का जोखिम - फोटो : iStock
भारत में संक्रमण की स्थिति

भारत में कोरोना संक्रमण की मौजूदा स्थिति काफी नियंत्रित दिख रही है, यहां पिछले 24 घंटे में 56 नए लोगों में संक्रमण की पुष्टि की गई है। इसके साथ देश में अब एक्टिव केस के मामले 1475 हो गए हैं। अमर उजाला से बातचीत में स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, भारत में फिलहाल संक्रमण की स्थिति काफी कंट्रोल में है, हालांकि जिस तरह से वैश्विक स्तर पर नए वैरिएंट्स के मामले बढ़ते जा रहे हैं, यहां भी सभी लोगों को बचाव के उपाय करते रहना चाहिए। कोरोना के एरिस वैरिएंट के मामले भारत में भी देखे गए हैं, ऐसे में कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करके आप संक्रमण से बचाव कर सकते हैं।


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स्रोत और संदर्भ
Highly mutated COVID variant found in new countries but pandemic in 'a different phase’

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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