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Coronavirus Mutation: कोरोना का एक और नया रूप मिला, वैज्ञानिकों ने कहा- पहले की अपेक्षा यह ज्यादा खतरनाक

Sat, 04 Jul 2020 03:07 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronavirus - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण के बीच इस वायरस की प्रकृति और इसके म्यूटेशन यानी बदलते रूपों को लेकर भी कई तरह के शोध हो रहे हैं। कोरोना वायरस की इसी ट्रैकिंग के दौरान ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने इसका एक नया स्ट्रेन ढूंढ निकाला है। वैज्ञानिकों ने कोरोना वायरस के इस नए रूप (स्ट्रेन) का नाम 'D614G' रखा है। वायरस के इस नए स्ट्रेन के बारे में बताया जा रहा है कि यह महामारी फैलाने वाले पुराने वायरस पर भारी है और इसमें वर्तमान में संक्रमण फैला रहे वायरस से ज्यादा संक्रमण फैलाने की क्षमता है। शोधकर्ताओं ने इस वायरस के जीनोम सीक्वेंस का विश्लेषण करने के बाद यह जानकारी दी है।
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
जीनोम सीक्वेंस का अध्ययन
  • ब्रिटेन के शेफिल्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने कोरोना वायरस के जीनोम सीक्वेंस का अध्ययन करने के बाद बताया कि वायरस के नए स्ट्रेन में पुराने वायरस से ज्यादा संक्रमण फैलाने की क्षमता है। हालांकि राहत की बात यह है कि वायरस के नए स्ट्रेन के संक्रमण के बाद स्थिति ज्यादा गंभीर नहीं बनेगी। 
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
वायरस के स्पाइक प्रोटीन में बदलाव
  • शेफिल्ड यूनिवसिर्टी के शोधकर्ताओं के मुताबिक, वायरस का यह नया स्ट्रेन पूरी दुनिया में पहले से मौजूद कोरोना वायरस की जगह ले रहा है। इस नए स्ट्रेन में इंसानों की कोशिकाओं को संक्रमित करने की क्षमता अधिक है। मेडिकल जर्नल सेल में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन में थोड़ा बदलाव देखा गया है। इसी स्पाइक प्रोटीन का इस्तेमाल कर वायरस इंसानी कोशिकाओं में प्रवेश करता है और संक्रमण फैलाता है। 

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Coronavirus - फोटो : Pexels
तीन संस्थानों ने मिल कर किया शोध
  • मेक्सिको की लॉस अल्मॉस नेशनल लैब, नार्थ कैरोलिना की ड्यूक यूनिवर्सिटी और इंग्लैंड की शेफिल्ड यूनिवर्सिटी ने मिलकर यह शोध अध्ययन किया है। शोधकर्ता थुसान डिसिल्वा ने कहा कि टीम ने महामारी की शुरुआत में ही कोरोना की जीनोम सीक्वेंसिंग की। इस दौरान पाया कि म्यूटेशन के बाद कोरोना ने अपना नया स्ट्रेन तैयार किया है, जो तेजी से दुनियाभर में फैल रहा है।  
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
10 हजार से अधिक सीक्वेंस
  • शोधकर्ताओं का कहना है कि सांस की समस्या से जूझ रहे कोरोना मरीजों में नए स्ट्रेन का ज्यादा वायरल लोड देखा गया है, जिससे स्पष्ट होता है कि यह ज्यादा लोगों को संक्रमित कर सकता है। इस शोध अध्ययन के दौरान इसके 10 हजार से अधिक सीक्वेंस मिले हैं। 
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Research - फोटो : Pixabay
शोध से मिली अहम जानकारी
  • मेक्सिको की लॉस अल्मॉस नेशनल लैब के शोधकर्ता डॉ. विल फिशन के मुताबिक, इस शोध अध्ययन काफी अहम जानकारी उपलब्ध कराई है। शोधकर्ताओं की टीम वायरस के संपर्क में कुछ समय तक रही थी। इसलिए रिसर्च के दौरान काफी सावधानी बरतनी पड़ी। उनका कहना है कि कोरोना के स्ट्रेन किस हद तक म्यूटेट होते हैं यह पता करने के लिए इस नए स्ट्रेन पर नजर रखी जा रही है।
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