Monsoon Health Tips: बारिश का मौसम ऐसा होता है, जिसमें अगर अपना ध्यान न रखा जाए तो बीमार पड़ना तय है। ऐसे में हम आपको ये समझने की जरूरत है कि इस मौसम में आखिर लोग बार-बार बीमार पड़ते ही क्यों हैं, ताकि वजह जानकर आप इसका ध्यान रख पाएं।
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मानसून में बार-बार बीमार क्यों पड़ते हैं लोग?
- फोटो : AI
Monsoon Health Tips: मानसून अपने साथ ठंडी हवाएं, हरियाली और राहत लेकर आता है, लेकिन यही मौसम कई तरह की बीमारियों का खतरा भी बढ़ा देता है। बारिश के दौरान लोगों की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो सकती है। यही वजह है कि इस मौसम में शरीर से जुड़ी समस्याएं तेजी से फैलती हैं। इसके अलावा गीले कपड़े पहनना, दूषित पानी पीना, बाहर का अस्वच्छ भोजन खाना और साफ-सफाई में लापरवाही भी संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ा देती है।
ऐसे में यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर बारिश के मौसम में लोग बार-बार बीमार क्यों पड़ते हैं और किन सावधानियों को अपनाकर खुद और अपने परिवार को स्वस्थ रखा जा सकता है। एक्सपर्ट्स द्वारा दी गई सही जानकारी और थोड़ी-सी सतर्कता इस पूरे मौसम में आपको बीमारियों से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है।
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1. बढ़ी हुई नमी
बारिश के मौसम में हवा में नमी का स्तर काफी बढ़ जाता है। यह वातावरण बैक्टीरिया, वायरस और फंगस के पनपने के लिए बेहद अनुकूल माना जाता है। नमी के कारण कपड़े, बिस्तर और घर के कोने लंबे समय तक गीले रहते हैं, जिससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। वहीं, बंद कमरों में पर्याप्त वेंटिलेशन न होने से भी संक्रमण तेजी से फैल सकता है। इसी वजह से मानसून में वायरल बुखार, सर्दी-जुकाम और त्वचा संबंधी समस्याएं अधिक देखने को मिलती हैं।
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2. पानी का जमाव
बारिश के बाद सड़कों, गड्ढों, पार्कों, छतों, कूलर, गमलों और घरों के आसपास पानी जमा हो जाता है। यह जमा हुआ पानी मच्छरों के अंडे देने और उनके तेजी से बढ़ने के लिए आदर्श स्थान बन जाता है। खासतौर पर एडीज मच्छर डेंगू और चिकनगुनिया फैलाते हैं, जबकि एनोफिलीज मच्छर मलेरिया के लिए जिम्मेदार होते हैं। यदि समय रहते पानी की निकासी नहीं की जाए, तो संक्रमण तेजी से फैल सकता है।
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3. दूषित पानी और भोजन
मानसून के दौरान बारिश का पानी अक्सर पीने के पानी के स्रोतों को दूषित कर देता है। कई बार सीवर का पानी भी पीने के पानी में मिल जाता है, जिससे हैजा, टाइफाइड, दस्त और फूड पॉइजनिंग जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा खुले में बिकने वाला स्ट्रीट फूड, कटे हुए फल और लंबे समय तक रखा हुआ भोजन बैक्टीरिया से संक्रमित हो सकता है। इसलिए इस मौसम में हमेशा ताजा, गर्म और साफ भोजन खाने की सलाह दी जाती है।
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4. कमजोर इम्यूनिटी
बारिश के मौसम में तापमान और मौसम में बार-बार बदलाव होने से शरीर को खुद को अनुकूल बनाने में समय लगता है। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) अस्थायी रूप से कमजोर पड़ सकती है। जिन लोगों की पहले से इम्यूनिटी कम होती है, जैसे बच्चे, बुजुर्ग और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग, वे वायरल संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। इसलिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद और नियमित व्यायाम इस मौसम में बेहद जरूरी है।
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5. गीले कपड़े और लंबे समय तक भीगना
बारिश में भीगने के बाद यदि व्यक्ति लंबे समय तक गीले कपड़े पहनकर रहता है, तो शरीर का तापमान तेजी से गिर सकता है। इससे सर्दी, खांसी, गले में संक्रमण और वायरल फीवर का खतरा बढ़ जाता है। गीले जूते और मोजे पहनने से पैरों में फंगल इंफेक्शन, खुजली और बदबू की समस्या भी हो सकती है। इसलिए बारिश में भीगने के तुरंत बाद सूखे कपड़े पहनना और शरीर को अच्छी तरह सुखाना जरूरी है।
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बारिश में बीमारियों से कैसे बचें?
उबला या फिल्टर किया हुआ पानी पिएं।
बाहर का खुला खाना खाने से बचें।
घर के आसपास पानी जमा न होने दें।
मच्छरदानी और मच्छर भगाने वाले उपाय अपनाएं।
भीगने के बाद तुरंत सूखे कपड़े पहनें।
हाथों को साबुन से नियमित धोएं।
ताजे और गर्म भोजन का सेवन करें।
विटामिन-सी और प्रोटीन युक्त आहार लें।
पर्याप्त नींद लें और शरीर को हाइड्रेट रखें।
तेज बुखार या लगातार कमजोरी होने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
-------------- नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।