हम इन्हीं बातों से महिलाओं की शिक्षा के महत्व को समझ सकते हैं । लेकिन महिलाओं की अशिक्षा के पीछे प्रमुख कारण है पीरियड्स । हाल ही में किए गए एक सर्वे के अनुसार लगभग 2 करोड़ से भी ज्यादा लड़कियां पीरियड्स की वजह से स्कूल जाना छोड़ देती हैं । पीरियड्स एक प्राकृतिक व सामान्य स्थिति है परन्तु जागरूकता के अभाव के कारण ये एक समस्या बनती जा रही है । जो कि न सिर्फ 2 करोड़ से ज्यादा लड़कियों के स्कूल छोड़ने का कारण बनती है बल्कि कई सारी घातक बीमारियों को भी न्यौता देती है ।
अक्सर पीरियड्स 12 से 13 वर्ष की उम्र में शुरू हो जाते हैं । उस समय लड़कियां अपने शरीर में होने वाले इस परिवर्तन को मानसिक रूप से स्वीकार करनें में सक्षम नहीं होती हैं । जिसकी वजह से वो तनाव, अवसाद आदि से ग्रसित रहने लगती हैं ।साथ ही जागरूकता के अभाव व सैनिटरी नैपकिन जैसे आवश्यक उत्पादों की उपलब्धता न होने के नाते वो अन्य साधनों का उपयोग करना शुरू कर देती हैं जो कि उनके शरीर को हानि पहुंचाते हैं । इसलिए पहली बार पीरियड्स के बारे में लड़कियों को जागरूक करना अतिआवश्यक होता है ।
पहले पीरियड्स के बारे पहले से ही लड़कियों को सहज महसूस कराना चाहिए, क्योंकि ये कोई समस्या नहीं बल्कि एक प्राकृतिक व्यवस्था है जो कि उन्हें स्वस्थ रखती है । बच्चों को खुद से घुलने मिलने दें ताकि अपने बारे में वो हर बात आपसे बांट सकें । खुद लड़कियों को सही समय पर पीरियड्स के बारे में बताते रहें, ताकि बो इस बारे में मानसिक रूप से तैयार हो सकें । पीरियड्स के समय अच्छी गुणवत्ता का सैनिटरी नैपकिन ही इस्तेमाल करें और दूषित कपड़ों के प्रयोग से बचें । किसी भी तरीके की समस्या होने पर तुरंत चिकित्सक की सलाह लें ।
हमेशा याद रखे की जागरूकता ही आपके और आपके बच्चों के स्वास्थ्य की सही तरीके से रक्षा कर सकती है । पीरियड्स कोई समस्या नहीं है, लेकिन ये समस्या बन सकती है । आपकी जागरूकता ही इससे होने वाली समस्याओं से बचा सकती है, इसलिए जरूरी है अच्छी गुणवत्ता के उत्पादों का प्रयोग करने की ।