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Mike Tyson: इस बीमारी ने माइक टायसन को कर दिया था 'अधमरा', ऐसी गलतियां करते हैं तो आप भी हो सकते हैं शिकार

Tue, 19 Nov 2024 10:03 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टायसन ने सोशल मीडिया पर अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा जून में तो स्थिति ऐसी हो गई थी कि लगभग मैं मर सा गया था।
आखिर माइक टायसन को क्या बीमारी थी जिसने उनकी हालत इतनी खराब कर दी थी?
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माइक टायसन - फोटो : instagram
दिग्गज मुक्केबाज माइक टायसन जब आखिरी बार रिंग में उतरे तो प्रशंसकों की नजर उन्हीं पर टिकी रही। 58 वर्षीय महान मुक्केबाज कोनिवार को भले ही 27 वर्षीय जेक पॉल से हार गए, लेकिन मैच के बाद उन्होंने कहा मुझे इसका कोई पछतावा नहीं है। टायसन ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट किया, 'यह उन स्थितियों में से एक है जब आप हार गए, लेकिन फिर भी जीत गए। आखिरी बार रिंग में आने का कोई पछतावा नहीं है।'

टायसन ने इस फाइट के बाद सोशल मीडिया पर अपनी स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भी चर्चा की है। उन्होंने कहा मई तक मैं बिल्कुल फिट था। हालांकि इसके बाद कई बार ब्लड ट्रांसफ्यूजन हुआ। इस दौरान शरीर का लगभग आधा खून और वजन कम हो गया। जून में तो स्थिति ऐसी हो गई थी कि लगभग मैं मर सा गया था। एक बार फिर से रिंग में उतरने के लिए मुझे काफी संघर्ष करना पड़ा।

अब सवाल उठता है कि आखिर माइक टायसन को क्या बीमारी थी जिसने उनकी हालत इतनी खराब कर दी थी? आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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माइक टायसन बनाम जेक पॉल - फोटो : Twitter
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

माइक टायसन की स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर चर्चा करते हुए अमेरिकन गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिकल एसोसिएशन के एक डॉक्टर ने कहा, अगर मैं टायसन का इलाज कर रहा होता तो उनसे कहता कि वह जेक पॉल के साथ अपनी लड़ाई को स्थगित कर दें। वह कुछ समय पहले तक अल्सर की समस्या से जूझ रहे थे।

डॉक्टरों की टीम ने कहा कि इस तरह की स्थिति में फिर से मेहनत करना आपकी सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। घाव को ठीक होने के लिए शरीर को आराम देने की जरूरत होती है। 
 


आइए जानते हैं कि गैस्ट्रिक अल्सर क्या समस्या है?
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पाचन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
गैस्ट्रिक अल्सर के बारे में जानिए?

गैस्ट्रिक अल्सर को पेट का अल्सर भी कहा जाता है। ये तब होता है जब पेट की सुरक्षात्मक परत में घाव होने लग जाता है। पेट में अल्सर होने की समस्या वैसे तो आम है पर अगर इसका समय पर इलाज न किया जाए तो कई प्रकार की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है। अल्सर से लगातार खून बहता रहता है, जिससे समय के साथ काफी ब्लड लॉस हो सकता है। 

पेट के अल्सर से होने वाला रक्तस्राव हल्के से लेकर गंभीर तक हो सकता है, गंभीर स्थितियों में इसके कारण जानलेवा समस्याओं का भी खतरा रहता है।

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पेट में अल्सर - फोटो : Freepik.com
कैसे जानें किसी को हो गया है अल्सर?

पेट में अल्सर होने पर आपको काफी दर्द जैसा महसूस होता है। अल्सर का दर्द पेट में एसिड की जलन जैसा महसूस होता है। कई लोगों को पेट के अल्सर के साथ अपच का अनुभव होता है, जिसका मतलब है पेट में जलन के साथ-साथ पेट भरा होने का एहसास। खाना शुरू करने के कुछ समय बाद या खाने के काफी समय बाद आपको पेट भरा हुआ महसूस हो सकता है। कुछ लोगों को एसिड रिफ्लक्स और हार्टबर्न, मतली और उल्टी, पेट फूलने, डकार आने और गैस के दर्द जैसी दिक्कत भी हो सकती है। 

कुछ लोगों को पेट के अल्सर का बिल्कुल भी एहसास नहीं होता, इसे साइलेंट अल्सर कहा जाता है। जब तक आपको रक्तस्राव या छिद्र जैसी जटिलताएं नहीं होतीं, तब तक इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं। 
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पाचन तंत्र को ठीक रखना जरूरी - फोटो : Freepik.com
कैसें करें इससे बचाव

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कहा, खान-पान में गड़बड़ी के कारण भी इस तरह की समस्याओं का खतरा हो सकता है। कुछ अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान, शराब का सेवन या फिर अधिक तैलीय या एसिडिक भोजन करने के कारण अल्सर होने का खतरा बढ़ सकता है। अल्सर के इलाज या सर्जरी के बाद सभी लोगों को सेहत को लेकर भी काफी सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

ओहियो के क्लीवलैंड क्लिनिक के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट मैथ्यू होशिट ने कहा कि अल्सर की सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण होता है। यदि कोई व्यक्ति समय से पहले प्रशिक्षण या गहन अभ्यास करना शुरू कर देता है, तो इसके कारण परिणाम गंभीर हो सकते हैं। हालांकि होशिट ने यह भी कहा कि टायसन के मामले का आकलन करना कठिन होगा, क्योंकि यह बहुत दुर्लभ है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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