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Migraine Control: सिर्फ दवाइयां नहीं, यह आदतें बनेंगी माइग्रेन की असली दवा

Mon, 25 Aug 2025 01:00 PM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

यदि कोई कामकाजी महिला माइग्रेन से पीड़ित है तो उसे घर, ऑफिस, बच्चे और रिश्तों के साथ खुद को भी संभालने की जरूरत है। इसके लिए अनुशासित जीवन-शैली को अपनाना बहुत जरूरी है।
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माइग्रेन की समस्या - फोटो : Adobe
मोनिका अग्रवाल

आज की तेज रफ्तार जिंदगी में आप कई जिम्मेदारियां निभाती हैं। घर, ऑफिस, बच्चे और रिश्तों के बीच सामंजस्य भी बनाना भी आपका ही काम होता है। ऐसे में आप माइग्रेन से पीड़ित हों तो हर एक दिन चुनौतीपूर्ण हो जाता है, क्योंकि माइग्रेन में सिर्फ सिर दर्द नहीं होता, बल्कि यह मतली, थकान और रोशनी या आवाज से संवेदनशीलता भी साथ लाता है। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं और सही जीवन-शैली से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

सुबह की शुरुआत

दिन की पहली घड़ी पूरे दिन की ऊर्जा को तय करती है, इसलिए रोज तय समय पर उठने की आदत डालें, चाहे छुट्टी ही क्यों न हो। जागते ही तुरंत फोन या स्क्रीन न देखें। कुछ मिनट स्ट्रेचिंग के बाद 10-15 मिनट योग या ध्यान के लिए निकालें। अनुलोम-विलोम और भ्रामरी जैसे प्राणायाम तनाव कम करके माइग्रेन की तीव्रता को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
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स्क्रीन से दोस्ताना दूरी - फोटो : Freepik.com
नाश्ता बेहद जरूरी

खाली पेट रहना माइग्रेन को तेजी से ट्रिगर करता है, इसलिए नाश्ते को मिस न करें। पौष्टिक नाश्ते का ही सेवन करें, जैसे- ओट्स, दलिया, फल या मूंग दाल चीला आदि। चाय-कॉफी और एनर्जी ड्रिंक्स से बचें, क्योंकि अधिक कैफीन भी इस सिर दर्द को बढ़ा सकता है।

स्क्रीन से दोस्ताना दूरी

लगातार स्क्रीन देखना माइग्रेन को ट्रिगर कर सकता है। लेकिन ऑफिस में लगातार स्क्रीन देखना आपकी मजबूरी है। ऐसे में हर 30 मिनट में 1-2 मिनट के लिए स्क्रीन से नजर हटाएं। आपकी पीठ सीधी रहे, स्क्रीन आंखों के लेवल पर हो और पैर जमीन पर टिके हों।
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पानी और सुकून - फोटो : Adobe Stock
पानी और सुकून

माइग्रेन में दिन भर पर्याप्त पानी पीना जरूरी है, क्योंकि डिहाइड्रेशन माइग्रेन को बढ़ा सकता है। वहीं  तनाव के बीच शांत रहने के लिए गहरी सांस लें, थोड़ा टहलें या पसंदीदा संगीत सुनें। ऐसे ब्रेक मूड को बेहतर बनाने के साथ ही माइग्रेन की तीव्रता को भी कम करने में मदद करते हैं।

ट्रिगर पहचानें

हर व्यक्ति के माइग्रेन ट्रिगर अलग हो सकते हैं- जैसे तेज रोशनी, तेज आवाज, भूख, मौसमी बदलाव और ज्यादा स्क्रीन टाइम। माइग्रेन आने पर उस दिन का भोजन, नींद का समय, तनाव, मौसम और स्क्रीन टाइम नोट करें। इससे आपको माइग्रेन ट्रिगर का पता चल सकेगा।

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सबसे जरूरी नींद - फोटो : Freepik.com
शाम का समय

पूरे दिन की भाग-दौड़ के बीच खुद को रिलेक्स करना जरूरी है। इसलिए हल्की वॉक, बागवानी, पेंटिंग या कोई अन्य काम करें, जो आपको सुकून दे।

सबसे जरूरी नींद

माइग्रेन के मरीजों के लिए पर्याप्त नींद दवा से कम नहीं है, इसलिए 7–8 घंटे की नींद लें। सोने से पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं, कमरे की रोशनी हल्की और माहौल आरामदायक रखें।
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सही दिनचर्या और पौष्टिक आहार - फोटो : Freepik.com
सही दिनचर्या और पौष्टिक आहार

राम मनोहर लोहिया अस्पताल, दिल्ली में न्यूरोलॉजी में प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. के.एस. आनंद कहते हैं, घर और ऑफिस की दोहरी जिम्मेदारी के बीच माइग्रेन को संभालना आसान नहीं होता, लेकिन सही दिनचर्या, पौष्टिक आहार, पर्याप्त पानी और तनाव को कम करने की आदतें अपनाकर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। हालांकि आज का युवा वर्ग दवाइयों पर अधिक निर्भर हो गया है, जबकि वे केवल अस्थायी राहत देती हैं। अगर आप वाकई इस दर्द से राहत चाहती हैं तो अनुशासित जीवन-शैली अपनाएं। काम के दौरान छोटे-छोटे ब्रेक लें, मेडिटेशन करें और थोड़ी देर टहलें। समय पर भोजन करें और अत्यधिक ठंडे पेय या खाद्य पदार्थों से परहेज करें।
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