दुनियाभर में तेजी से क्रॉनिक बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। लिहाजा हृदय रोग, डायबिटीज और कैंसर के मामले जो कुछ दशकों पहले तक उम्र बढ़ने के साथ होते थे, वह अब न सिर्फ बच्चों तक को अपना शिकार बना रहे हैं बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाते जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि इसमें कई पर्यावरणीय कारकों की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है, बढ़ते माइक्रोप्लास्टिक का प्रदूषण उनमें से एक है जिसको लेकर विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं।
क्या आपको पता है कि रोजाना हमारे शरीर में अनजाने में ही सही, प्लास्टिक का कचरा इकट्ठा होता जा रहा है? वैज्ञानिकों ने पाया कि हर इंसान एक हफ्ते में लगभग 5 ग्राम तक माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है। ये छोटे-छोटे प्लास्टिक के टुकड़े जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक कहते हैं, हमारी हवा, पानी, खाने और यहां तक कि नमक में भी मिल चुके हैं।
लैंसेंट प्लैनेटरी हेल्थ की साल 2023 की एक रिपोर्ट बताती है कि माइक्रोप्लास्टिक कोशिकाओं में इंफ्लेमेशन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकता है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन की रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया है कि माइक्रोप्लास्टिक धीरे-धीरे फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा रहा है, इसे लंग्स कैंसर का जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।