फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mental Health Day: अक्सर परेशान रहना मानसिक स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं, इन आदतों से तुरंत बनाएं दूरी

Mon, 10 Oct 2022 12:07 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
तनाव की बढ़ती समस्याओं को कैसे कम करें? - फोटो : iStock
ऑफिस के काम के दबाव, सामाजिक-पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण चिंतित-तनाव महसूस करना स्वाभाविक है, पर क्या आप अक्सर ही ऐसा अनुभव करते रहते हैं? हर छोटी-छोटी बात को लेकर तनाव में आ जाने, अक्सर एंग्जाइटी महसूस करते रहने की आदत आपके मानसिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है। तनाव-चिंता की इस समस्या को अगर समय रहते कंट्रोल न किया जाए तो इसके कारण डिप्रेशन का जोखिम भी बढ़ जाता है। डिप्रेशन, मानसिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्याओं में से एक है। ऐसे में अगर आप भी अक्सर एंग्जाइटी महसूस करते रहते हैं तो तुरंत सावधान हो जाएं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, चिंता कई चीजों के कारण हो सकती है, ऐसे में जरूरी है कि उस समस्या को पहचानें और उसे ठीक करने का प्रयास करें। कुछ लोगों में आनुवंशिक रूप से भी चिंता बढ़ने का खतरा हो सकता है, ऐसे लोगों को अपने जोखिम कारकों को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है। एंग्जाइटी को ट्रिगर करने वाले कारणों को पहचाने और उनसे दूर रहने का प्रयास करें, फिर भी लाभ नहीं मिल रहा है तो इस बारे में किसी मनोचिकित्सक की सहायता जरूर ले लें। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि हमारे दैनिक जीवन की कई आदतें एंग्जाइटी को बढ़ावा देने वाली हो सकती हैं, इनसे भी बचाव करते रहना आवश्यक हो जाता है। आइए जानते हैं चिंता को कम करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं?
विज्ञापन

2 of 5
नींद पूरी करना बहुत जरूरी - फोटो : iStock
अच्छी नींद लेना जरूरी

अध्ययनों से पता चलता है कि जिन लोगों की रात की नींद पूरी नहीं हो पाती है, उनमें अन्य लोगों की तुलना में एंग्जाइटी की समस्या का खतरा अधिक होता है। यही कारण है कि सभी लोगों को रोजाना 7-8 घंटे की नींद जरूर लेने की सलाह दी जाती है। नींद की स्थिति में आपके शरीर और मस्तिष्क को आराम करने के लिए पर्याप्त समय मिलता है, जिससे आप चिंता विकारों को दूर कर सकते हैं। एंग्जाइटी की समस्या से बचे रहने के लिए अच्छी नींद लेना जरूरी है।
विज्ञापन

3 of 5
अधिक कैफीन के नुकसान - फोटो : istock
कैफीन का कम कर दें सेवन

अक्सर हम सभी को लगता है कि कॉफी-चाय का सेवन तनाव को कम कर देता है, पर अध्ययनों में इसे नुकसानदायक और समस्याकारक माना गया है। कॉफी-चाय की एक कप आपको कुछ समय के लिए रिफ्रेश महसूस करा सकती है, पर इसकी अधिकता समस्याओं को बढ़ाने वाली मानी जाती है। बहुत अधिक कैफीन का सेवन करने से चिड़चिड़ापन और मिचली की समस्या हो सकती है। कुछ लोगों में इसे चिंता को ट्रिगर करने वाला भी माना जाता है।

4 of 5
सोशल मीडिया पर कम समय बिताएं - फोटो : Pixabay
सोशल मीडिया से बनाएं दूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सोशल मीडिया पर अधिक समय बिताने वाले लोगों में चिंता और तनाव विकारों का खतरा अन्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। सोशल मीडिया पर कई बार आपके सामने ऐसे पोस्ट आ जाते हैं जो आपको बहुत अधिक चिंतित महसूस करा सकते हैं। इसलिए यदि आप एंग्जाइटी महसूस कर रहे हैं तो सोशल मीडिया से थोड़ी दूरी बनाकर रखें। ऐसा करके आप अपने जोखिम कारकों को कम कर सकते हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
गतिहीन जीवनशैली है नुकसानदायक - फोटो : istock
सेंडेटरी लाइफस्टाइल के नुकसान

सेंडेटरी लाइफस्टाइल यानी कि गतिहीन जीवनशैली, शारीरिक और मानसिक कई तरह से आपके लिए दिक्कतें बढ़ाने वाली हो सकती है। शरीर का बिल्कुल निष्क्रिय रहना आपकी समस्याओं को ट्रिगर करने वाला हो सकता है। अध्ययनों से पता चलता है कि शारीरिक व्यायाम करने से चिंता के लक्षणों को कम करने में मदद मिल सकती है। इसलिए यदि आप एंग्जाइटी महसूस करते रहते हैं तो नियमित रूप से किसी न किसी प्रकार के शारीरिक व्यायाम की आदत बनाएं। 



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें