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Men's Health: खतरे का कारण है आदमियों का बढ़ता पेट, ऐसे पाएं नियंत्रण

Wed, 07 Dec 2022 05:13 PM IST
स्वाति शैवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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खरनाक है पेट पर इकट्ठा चर्बी - फोटो : pixabay
मोटापे का बढ़ना कई समस्याओं की आशंका को भी बढ़ा देता है। बीते वर्षों में दुनियाभर में मोटापा एक महामारी के रूप में सामने आया है। इसके पीछे वजहें कई हो सकती हैं। खाने पीने में कोताही से लेकर अनियमित दिनचर्या, दफ्तर या घर के सिटिंग अवर्स और बढ़ता सामाजिक व कामकाजी दबाव व तनाव तक। उम्र का भी मोटापे की समस्या से कोई लेना देना नहीं है। बच्चों से लेकर युवाओं तक में मोटापा रोग का रूप लेता जा रहा है। 

मोटापे का मतलब है शरीर में अतिरक्त चर्बी या फैट का जमा होना और यह चर्बी शरीर पर बाहर दिखने के साथ साथ अंदरूनी हिस्सों को भी चपेट में ले लेती है। पेट पर चढ़ने वाली चर्बी इनमें सबसे घातक हो सकती है क्योंकि पेट वाले हिस्से में कई महत्वपूर्ण अंग काम कर रहे होते हैं और इनके काम में बढ़ा हुआ मोटापा बाधा बनने लगता है। पुरुषों के पेट का बढ़ना भी इसलिए ही खतरा पैदा कर सकता है। जानिए क्या है यह खतरा और कैसे पाया जा सकता है इस पर नियंत्रण। 
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बीमारियों को न्योता है मोटापा - फोटो : iStock
कई मुश्किलों का है कारण 

बढ़ा हुआ वजन केवल बाहरी शारीरिक स्थिति को ही असंतुलित नहीं करता, इसकी वजह से पूरी सेहत असंतुलित हो सकती है। हर बढ़ते किलो के साथ व्यक्ति डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, ह्रदय रोग जैसी समस्याओं के और करीब पहुँच जाता है। शरीर में पूरे बढ़े हुए वजन की तुलना में पेट पर बढ़ा वजन अधिक चिंता का विषय हो सकता है। ये कई बीमारियों की आशंका को बढ़ा सकता है, जैसे-
 
  • कार्डियोवैस्क्युलर डिसीज (ह्रदय संबंधी)
  • टाइप-2 डायबिटीज 
  • कोलोरेक्टल कैंसर 
  • स्लीप एप्निया (खर्राटों से जुड़ी समस्या)
  • कम उम्र में विभिन्न वजहों से मृत्य का खतरा 
  • जोड़ों से संबंधित समस्याएं, आदि 
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कामकाज और जीवनशैली डालते हैं बुरा प्रभाव - फोटो : Pixabay
भारतीय पुरुषों की समस्या 

भारतीय पुरुषों के मामले में एक और चीज जो खतरा पैदा करती है वह है उनकी लाइफस्टाइल। अधिकांश पुरुष अपने भोजन और निजी कामों जैसे कपड़े धोने, घर की साफ-सफाई आदि के लिए घर की महिलाओं पर निर्भर रहते हैं। खासकर जीवन में स्थाईत्व आ जाने के बाद। उनका ज्यादातर समय दफ्तर में लम्बे समय तक बैठे रहकर काम करने में बीतता है। यदि वे फील्ड में काम करते हैं तो भी अपने खान-पान को लेकर लापरवाही बरतते हैं।

दूसरी ओर शराब और सिगरेट के सेवन में भी उनका प्रतिशत महिलाओं की तुलना में अधिक होता है। ऊपर से हमारे समाज में महिलाओं के मोटापे को उनके अनाकर्षक होने से जोड़ा जाता है, जिसका असर उनकी जिंदगी के हर हिस्से पर पड़ता है। जबकि पुरुषों के लिए आकर्षक दिखने की कोई बाध्यता नहीं होती। इन सब स्थितियों के चलते पुरुष अपने बढ़ते पेट को नजरअंदाज करने लगते हैं और नतीजा घातक हो जाता है।  
 

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खान पान की अनियमितता बनती है मुसीबत - फोटो : social media
बढ़ते पेट का खतरा 

पेट पर इकट्ठी होने वाली चर्बी केवल त्वचा के नीचे मौजूद अतिरिक्त परतों (सबक्यूटेनियस फैट) के रूप में नहीं होती। यह विसरल फैट के रूप में पेट के भीतर महत्वपूर्ण अंगों के आस पास जमा होने लगती है और यही अधिक नुकसान करती है। इससे उन अंगों पर दबाव बनने लगता है और उनकी काम करने की क्षमता प्रभावित होने लगती है। लगातार बढ़ते इस दबाव का असर पूरे शरीर के संचालन पर पड़ने लगता है और धीरे धीरे अंदरूनी क्षति होने लगती है। उसपर यदि कोई अपना अधिक समय केवल बैठे रहकर, जंक फ़ूड खाकर बिताता है तो मुश्किल और भी बढ़ जाती है।

आपका कैलोरी इनटेक इसमें बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उदाहरण के लिए आप पूरे दिन में कितनी कैलोरी लेते हैं और कितनी कैलोरी जला पाते हैं, इस पर ही सारा समीकरण निर्भर करता है। इसके अलावा आपकी उम्र, अन्य शारीरिक स्थितियां और जेनेटिक कंडीशन भी मोटापे को आमंत्रण देने का काम कर सकती हैं। यदि आप बहुत खाते हैं और कम व्यायाम करते हैं तो भी समस्या हो सकती है। 
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कमर का 38-40 इंच से अधिक होना है खतरा - फोटो : pixabay
कैसे लगेगा पता 

पेट पर बढ़ा मोटापा आपके लिए खतरा है इसका पता हालाँकि टाइट होते कपड़ों और शारीरिक स्थिति से ही लग जायेगा लेकिन इसके लिए विशेषज्ञ बकायदा एक पैमाने को भी तय करते हैं। इसके लिए आपको पेट का माप लेने जरूरत है। एक जगह पर स्थिर खड़े रहकर एक टेप से अपने पेट का माप लें। यह माप हिपबोन (कूल्हे की हड्डी) के ऊपर से लीजिये। गहरी सांस लेकर बदन को ढीला छोड़िये और फिर जो माप आता है उसे नोट कीजिये।  

पुरुषों के लिए कमर (पेट) का यह माप 38-40 इंच तक भी ठीक माना जाता है लेकिन इससे अधिक होना खतरे का संकेत है। यानी अगर कमर के माप के कारण आपको 38 इंच से अधिक की जींस या ट्राउजर लेना पड़ रहा है तो सम्भल जाइए। 
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प्लांट बेस्ड डाइट है अच्छा विकल्प - फोटो : iStock
ये उपाय आएंगे काम 
 
  • पहला फोकस डाइट पर। याद रखिये वजन कम करने का मतलब कभी भी खाने से दूरी बना लेना या खाना छोड़ देना नहीं है। भूखे रहने से न केवल इम्युनिटी पर बुरा असर पड़ सकता है बल्कि डायबिटीज होने की आशंका भी हो सकती है। इसलिए अपने भोजन को संतुलित बनाने पर ध्यान दें। इसके लिए अधिकांशः प्लांट बेस्ड डाइट को चुनें। इसमें मोटा अनाज, पत्तेदार सब्जियां, अनाज आदि को अपनायें। कोशिश करें कि दिनभर कुछ न कुछ जंक या पैकेज्ड फ़ूड खाने की आदत पर रोक लगे। अगर खाने की इच्छा हो तो फल, मूंगफली के दाने, छाछ, काले भिगोये हुए चने, अखरोट, बादाम, आदि को संतुलित मात्रा में खाएं। 
  • पौष्टिक और संतुलित भोजन में भी मात्रा को ध्यान में रखें। अगर आप सामान्य दाल-सब्जी रोटी-चावल वाला भोजन करते हैं तो भी इसकी मात्रा को ध्यान में रखें। एक बार ढेर सारा भोजन करने की बजाय टुकड़ों में भोजन करें। 
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व्यायाम करेगा मदद - फोटो : istock
रहें फिजिकली एक्टिव 
 
  • केवल अल्कोहल ही नहीं, सॉफ्ट ड्रिंक्स, बाजार के शर्बत और पैक्ड जूस, कोल्ड्रिंक्स आदि से भी दूरी बनायें। ये सीधे सीधे ढेर सारी शकर आपके शरीर में भेजते हैं। इसी तरह बाजार के पैक्ड स्नैक्स भी खाने से बचें, भले ही वह डाइट फ़ूड के नाम से क्यों न आता हो।  
  •  भले ही आप कोई जिम न जॉइन करें, न ही कोई फिटेनस सेंटर लेकिन फिजिकल एक्टिविटी को अपने रूटीन में शामिल जरूर करें। विशेषज्ञों का मानना है कि रोजाना सिर्फ 15 मिनिट का ब्रिस्क वॉक (जो बिना किसी व्यवधान के एक बार में तेज गति से पूरा हो) या कुछ सूर्य नमस्कार भी आपको फायदा दे सकते हैं, बशर्ते आप इन्हें रोज करें।  
  • अगर आप दौड़ सकते हैं, साइकिल चला सकते हैं या स्वीमिंग कर सकते हैं तो भी बहुत अच्छा। कोशिश करें कि एक्सरसाइज को अलग अलग रूपों में रूटीन में शामिल करें, जैसे हफ्ते में दो दिन ब्रिस्क वॉक, दो दिन सूर्य नमस्कार और दो दिन साइकिलिंग।  
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धूम्रपान से भी रहें दूर - फोटो : pixabay
  • यह हमेशा याद रखें कि पेट की चर्बी को कम होने में सबसे अधिक समय लगता है और इसके पीछे उम्र व अन्य शारीरिक स्थितियां भी काम करती हैं। इसलिए दो हफ्तों में परिणाम पाने की आशा रखने की बजाय एक-एक महीने का लक्ष्य लेकर चलें। पहले महीने में सिर्फ खुद के परिवर्तनों को महसूस करें जो स्वस्थ जीवनचर्या के कारण आपको महसूस होंगे, जैसे शरीर में हल्कापन, स्फूर्ति का बढ़ना, आत्मविश्वास का बढ़ना और तनाव का कम होना। 
  • पहले तीन महीने में मात्र 2-3 किलो वजन कम करने का लक्ष्य बनायें। इसे ही आगे बढ़ाते रहें। यदि सालभर में आप 10 किलो तक वजन कम कर लेते हैं तो यह एक बड़ी उपलब्धि होगी। इसके साथ ही सिगरेट और शराब जैसी चीजों से भी दूरी बनाएं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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