टेस्टोस्टेरोन बढ़ा तो भी हो सकता है खतरा
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टेस्टोस्टेरोन की कमी और अधिकता दोनों खतरनाक
टेस्टोस्टेरोन पुरुषों की सेहत के लिए तो जरूरी है ही, महिलाओं में भी इसकी थोड़ी मात्रा पाई जाती है। जिन पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन की कमी (हाइपोगोनाडिज्म) होती है उन्हें यौन इच्छा में कमी, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन, थकान, मांसपेशियों में कमी, मूड स्विंग्स और बालों के झड़ने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। यह ऑस्टियोपोरोसिस और अनिद्रा का कारण भी बन सकता है।
- हाइपोगोनाडिज्म में शरीर इस हार्मोन की पर्याप्त मात्रा नहीं बना पाता।
- 40 साल की उम्र के बाद, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर हर साल लगभग एक प्रतिशत कम हो जाता है।
- हाइपोगोनाडिज्म की स्थिति को ठीक करने या फिर कुछ लोग मांसपेशियों को बढ़ाने के लिए टेस्टोस्टेरोन के सप्लीमेंट्स लेते हैं।
कैम्ब्रिज स्टडी के लेखकों में से एक एमिली मोरबे कहती हैं, देखा गया है कि बड़ी संख्या में पुरुष मांसपेशियों को मजबूत बनाने के लिए खुद से टेस्टोस्टेरोन सप्लीमेंट ले रहे हैं। ये सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है।