मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि हार्ट अटैक, स्ट्रोक हो या सड़क दुर्घटना जैसी आपात स्थितियों में रोगी को जितनी जल्दी अस्पताल पहुंचा दिया जाए और इलाज शुरू हो जाए, जान बचने की संभावना उतनी ही बढ़ जाती है। कई बार इलाज में देरी बीमारी से ज्यादा खतरनाक साबित हो जाती है। यही वजह है कि किसी भी देश की स्वास्थ्य व्यवस्था का सबसे अहम चेहरा उसकी आपातकालीन चिकित्सा सेवा मानी जाती है।
भारत जैसे बड़े देश में जहां महानगरों से लेकर दूरदराज के गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाओं की पहुंच अलग-अलग है, वहां एक भरोसेमंद और जवाबदेह एंबुलेंस सिस्टम की जरूरत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। इसका उद्देश्य सिर्फ मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना नहीं, बल्कि रास्ते में ही बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराना, हर कॉल को गंभीरता से लेना और पूरे सिस्टम को जवाबदेह बनाना है। अब तस्वीर बदलने की तैयारी है।
केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय एंबुलेंस सेवा ऑपरेशनल (एनएएस) गाइडलाइन जारी की है।