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Anemia: भारत में हर 10 में से 6 महिलाओं में एनीमिया का खतरा, आप भी तो नहीं हैं शिकार? जानिए इसके मिथ्स-फैक्ट्स

Mon, 18 Aug 2025 09:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारत में 15-49 साल की लगभग 57% महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं, यानी हर 10 में से 6 महिलाएं इस समस्या के साथ जी रही हैं। कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हैं?
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भारतीय महिलाओं में एनीमिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
एनीमिया यानी खून में हीमोग्लोबिन कम होने की समस्या दुनियाभर में देखी जाती रही है। भारतीय महिलाओं में ये समस्या और भी ज्यादा देखी जाती है। नेशनल फैमिली एंड हेल्थ सर्वे NFHS-5 (2019–21) की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 15-49 साल की लगभग 57% महिलाएं एनीमिया का शिकार हैं, यानी हर 10 में से 6 महिलाएं इस समस्या के साथ जी रही हैं। गर्भवती महिलाओं में ये संख्या लगभग 52% है, वहीं किशोरियों (15–19 साल) में भी आधी से ज्यादा लड़कियां इससे पीड़ित हैं।

एनीमिया का मतलब है खून में हीमोग्लोबिन कम होना। हीमोग्लोबिन ही हमीरे शरीर के तमाम हिस्सों में ऑक्सीजन का संचार करता है। जिन लोगों में हीमोग्लोबिन की कमी यानी एनीमिया की समस्या होती है उनमें अक्सर थकान-कमजोरी, काम करने का मन न करना और गर्भावस्था से संबंधित जटिलताओं का खतरा हो सकता है। 

आसान भाषा में समझें तो, भारत में ज्यादातर महिलाएं खून की कमी से जूझ रही हैं और यह समस्या साल-दर-साल बढ़ रही है, जिसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर चिंता जताते रहे हैं।
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लो हीमोग्लोबिन का जोखिम - फोटो : Freepik.com
भारतीय महिलाओं में एनीमिया का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, भारतीय महिलाओं में एनीमिया होना बहुत आम है और ये बढ़ता जा रहा है। आमतौर पर इसके लिए आहार की गड़बड़ी, विशेषरूप से भोजन में आयरन की कमी होने को प्रमुख कारण माना जाता है। हालांकि यहां समझना जरूरी है कि इसका कारण सिर्फ खाना-पान ही नहीं बल्कि जीवनशैली, गड़बड़ आदतें और सामाजिक कारण भी जिम्मेदार हो सकते हैं। सही आहार, डॉक्टर की सलाह पर सप्लीमेंट्स का सेवन और इस रोग के बारे में सही जानकारी रखकर आप इससे बचाव कर सकते हैं।

एनीमिया को लेकर हमारे समाज में कई गलत जानकारियां भी हैं, जिन मिथकों को तोड़ना बहुत आवश्यक है।
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एनीमिया में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Freepik.com
मिथ: एनीमिया सिर्फ आयरन की कमी से होता है

अक्सर लोग मानते हैं कि एनीमिया का मतलब है शरीर में आयरन की कमी। लेकिन ये पूरी असलियत नहीं है। एनीमिया का मतलब है खून में हीमोग्लोबिन का कम होना। आयरन की कमी इसका एक कारण हो सकती है पर इसके अलावा कई अन्य पोषक तत्वों की कमी भी इस समस्या का कारण हो सकती है।

अध्ययनों से पता चलता है कि लगभग 50% एनीमिया आयरन की कमी से और बाकी फोलिक एसिड, विटामिन बी12 की कमी के कारण होते हैं। मलेरिया या थैलेसीमिया जैसी बीमारियों के कारण भी इसका खतरा होता है।

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खान-पान और एनीमिया - फोटो : Freepik.com
मिथ: शाकाहारी लोगों में एनीमिया का खतरा अधिक होता है?

मांसाहार वाले आहार को आयरन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, इसलिए अक्सर माना जाता है कि जो लोग मांस-मछली नहीं खाते से उनमें आयरन की कमी होना पक्का है। लेकिन यह आधा सच है। मांसाहार का सेवन आयरन की पूर्ति में सहायक जरूर है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि शाकाहारी लोगों में एनीमिया जरूर होगा।

आप शाकाहारी आहार का पालन करके भी एनीमिया से बच सकते हैं। बाजरा, रागी, चना, सोया, हरी सब्जियां, गुड़, तिल और सूखे मेवे इसका बहुत अच्छे स्रोत हैं। 
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खून की कमी को न लें हल्के में - फोटो : Freepik.com
मिथ: हीमोग्लोबिन की थोड़ी कमी होना चिंता की बात नहीं है

लोग अक्सर कहते हैं बस थोड़ा-सा खून कम है तो कोई दिक्कत नहीं। लेकिन इसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ बिल्कुल गलत सोच मानते है। हल्का एनीमिया भी शरीर पर गहरा असर डालता है। इसके कारण थकान, चक्कर, ध्यान की कमी और काम करने की क्षमता घटती है। गर्भवती महिला को हल्का एनीमिया हो तो बच्चे का वजन कम हो सकता है, समय से पहले डिलीवरी हो सकती है और मां के लिए भी खतरा बढ़ता है।

हल्के स्तर के एनीमिया को भी नजरअंदाज करना खतरनाक है। इसे समय रहते पहचानना और इलाज करना बहुत जरूरी है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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